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jagjit singh

Abstract

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jagjit singh

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भरोसा कहाँ

भरोसा कहाँ

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"तू कैसा भी दिखता हो, कोई फर्क नहीं पड़ता,

अगर तेरा दिल साफ़ है,.........", वगैरा, वगैरा........, 

अगर कोई ऐसा बोल रहे हैं तो, बकवास है, 

उदाहरण के लिए,

एक खूबसूरत लड़की,...... लेकिन चेहरा जला हुआ, अम्ल अटैक का वज़ह से, 

अपनाने के लिए कोन तैयार है?!....., 

तू कैसा भी हो, वगैरा....... नहीं बोल सकते हो, 

क्यु, बहुत आम बात है दोस्त, 

कितनों का मन साफ़ है, 

जो देख रहे हों, सब हवस का नंगा नाच है, 

और एक उदाहरण, 

एक भला, नेक इंसान जो अच्छा पढ़ा लिखा हो, 

या ना हो, धनी हो या ना हो, 

वक़्त का मारा, बीमार पड जाता है, जिंदगी भर,...... 

अपनाने का बात छोड़ो, जो अपने है, 

पहले छोड़ चले जाएंगे, 

मेकअप का दुनिया, कृत्रिम रंगों से सजाया है, 

भरोसा करोगे तो डूब जाओगे, सच ये है, यहा भरोसा करने के लिए कुछ नहीं है. 



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