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jagjit singh

Abstract

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jagjit singh

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अफसोस

अफसोस

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इस बार तेरा तरफदारी, ना वफादारी नहीं करनी, 

देख लिया तेरा यारी, फिर दिल नहीं तोड़ना, 

दिल ऊब गया, टूट गया, 

तेरा सच्चाई समझ मे आया तो, मे रो पडा, 


तेरे महफ़िल में सितारें अनेक, 

तुझे सितारों का मुबारक हो, 

में चला, फिरसे, मेरे अंधेरे गालियों मे भटकने, 

जितना भी तेरा तारीफ किया, सच है, 

पूछलो, गावा, है तेरे आशिक़ें, 

तेरा पूजा करते, दिन और रात, 

सिर्फ और सिर्फ तुझे चाहा, दिल से, कसम से, 

तेरा आशियाना, ना मिला, 


चलो किसी और को मुबारक हो, 

रुतबा का बातें ना करो तो बेहतर है, 

कोन कब, कहां, कैसे जिंदगी काटेगा, 

अब मुझे अपना दम आज़माना है, 

जी ते जी, तेरे दर पे पलट के नहीं आऊंगा, 


किसी रोज़ मेरा किस्सा, सुनोगे, 

कैसा किस्मत से लड़ते, लड़ते, जिया, 

और मारा भी लडते, 

सुनो, ये मेरा यारी और प्यार है, 

पहचान ने का दम, अफसोस, तेरे अंदर नहीं है।


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