भरोसा...एक बंधन भाग-1
भरोसा...एक बंधन भाग-1
कुसुम को आज वो सारी खुशियाँ मिल चुकी थी, जिसको अक्सर उसने सपनों में देखा था। तुषार का कॉल आया। कुसुम, अभी कहाँ हो ? कब से मैं तुम्हारा इन्तिज़ार कर रहा हूँ चौराहे पर। आ रही हूँ तुषार। बस पांच मिनट और। पापा, मां जा रही हूँ। आने में थोड़ी देर होगी। ठीक है बेटा। ख्याल रखना अपना। (कुसुम की माँ और पापा नें जाते हुए कहा)
कुसुम और तुषार एक दूसरे को पसंद करते हैं। आज दोनों की प्लांनिग थी कि किसी होटल में बर्थडे मनाया जायेगा। आज तुषार का बर्थडे है। तुषार, तुमने सारे दोस्तों को बोल दिया आने के लिए ? हाँ, कुसुम सभी होटल ही आ जाएंगे। दिए गए समय पर सारे दोस्त आ गए। तुषार नें केक काटा। सभी ने खूब पार्टी एन्जॉय किया।
रात के 11 बज चुके थे। तुषार, तुम अपने पापा को हम दोनों के रिश्तों के बारे में बताये हो ? हाँ, कुसुम, मेरी खुशी में ही उनकी खुशी है। पापा ने हमारी शादी के लिए कब से अपनी रजामंदी दे दी है। तुम अपनें पापा से एक बार बात कर लो। अगर तुम्हारे पापा मेरे पापा से बात कर लें तो बेहतर होगा। वैसे मैनें खुद ही पापा से बोला कि वो ही चले जाएं तुम्हारे घर, तुम्हारा हाथ मेरे लिए मांगने। तुम बहुत अच्छे हो तुषार। आई लव यू सो मच। लव यू टू कुसुम। कुसुम तुषार के गले लग जाती है।
अगले सुबह, कुसुम के घर तुषार के पापा आतें है। नमस्कार भाई साहब। जी नमस्कार। किन्तु मैंने आपको पहचाना नहीं। (कुसुम के पापा) जी, मेरा नाम शैलेन्द्र सिंह है। तुषार मेरा बेटा है। कुसुम उसे जानती है। दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते है। मैं चाहता हूँ उन दोनों के प्यार को रिश्ते में बदल दिया जाए। इसके लिये में आपका बहुत आभारी रहूंगा।
कुछ कहने से पहले मैं कुछ देर बात बेटी से बात करना चाहता हूँ। (पंकज सिंह, कुसुम के पिताजी) जी, बिल्कुल। क्यूँ नहीं। मुझे कोई जल्दी नहीं। आप उससे पूछ लीजिए। जी, धन्यवाद।
फिर, कुसुम से पूछने पर पता चला कि वो भी तुषार को चाहती है और शादी के लिए तैयार है।
कुसुम के पापा ने शैलेन्द्र सिंह को सारी बात बताई। अब तो कुछ बचा नहीं। मैं जल्द से जल्द पंडित जी से मिलकर शुभ मुहूर्त की तारीख निकलवाता हूँ। जी, जैसा आप उचित समझे। (पंकज सिंह ने कहा)
क्या सुनिश्चित तारीख पर ये शादी हो पाई ?
क्या इतनी आसानी से तुषार के पापा शादी के लिए मान गए ?
क्या दोनों का जीवन खुशहाल जो पाया ?
सारे प्रश्नों के उत्तर अगले लेख में।
