Vimla Pandey

Abstract


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भेदभाव

भेदभाव

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आंगन मे , अपने छोटे हाथ मे बड़ा सा कटोरा लिये विधान, बड़े भाई की कटोरी में झाँक रहा था। मां ने फिर चतुराई से बड़े भाई की कटोरी खीर से भर दी है।

आंखों में प्रश्नचिन्ह लिए छोटू ने पिता से सवाल किया कि ये भेद क्यों है। खीर तो उसे भी बहुत पसंद है। कह कर वो घर के हर सदस्य के पास भागता यही पूछता है।हर सदस्य उसे अपने हिस्से से एक एक ग्रास दे देते हैं।


अब बड़े बेटे, प्रेम का सवाल है,वो बड़ा है पर सब लाड़ छोटे से करते हैं।सबसे बड़ा बर्तन उसे खाने को देते हैं। वो घूम घूम कर शिकायत करता है।सब उसे अपने अंक में ले कर दुलारते हैं।


दोनो भाई , बड़े हो गए हैं,अपनी दुनिया मे मगन हैं।शहर के दो बड़े से घरों के, दो बूढ़े फोन पर एक दूसरे से दुख सुख कह रहे हैं," पूरा खाना , सत्कार मिलता है न?"



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