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भावनाओं में आकर फैसले ना लें

भावनाओं में आकर फैसले ना लें

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दीपक और नैना दोनों ने प्रेम विवाह किया था। दोनों के परिवार वाले बड़ी कठिनाइयों से तैयार हुए थे। आरंभ में सब ठीक चल रहा था। एक पुत्र भी उत्पन्न हो गया । अब हर दिन तो एक जैसे नहीं रहते। दीपक अपने दफ्तर में अधिक व्यस्त रहने लगा। कभी- कभी वह देर से घर पहुँच पाता था। एक दिन नैना की एक सहेली घर आई और उसने नैना के दिमाग मे यह बात डाल दी कि शायद दीपक का मन नैना से ऊब चुका है और अब वह किसी अन्य के साथ समय व्यतीत करता है। नैना के मन मे यह बात बैठ गई। अब जब भी दीपक देर से घर लौटता , नैना उसे उल्टी सीधी बातें सुना देती थी। पहले तो दीपक कुछ समझ नहीं पाया पर बाद में वह भी जवाब देने लगा। जिससे घर मे प्रतिदिन बहस होती। खूब झगड़े होने लगे।अब तो उनकी लड़ाई बाहर वाले भी सुनते थे। बेटे के स्कूल से फोन आया कि उसका गृहकार्य समय पर पूर्ण नहीं हो पाता है।

रोज़ रोज़ की चिक चिक से तंग आकर नैना अपने बेटे को लेकर मायके चली आई।

भड़काने वालों की भी कोई कमी नहीं थी। नैना की बुआ जी ने नैना के खूब कान भर दिए। नौबत तलाक तक पहुचँ गई। दोनों पक्ष तलाक के लिए तैयार थे।

दो दिन बाद कोर्ट मे सुनवाई थी। दीपक की सैकेट्री नैना से मिलने उसके मायके आई। नैना के घर वालों ने उसे नैना से यह कहकर मिलने नहीं दिया कि वह ही नैना की सौतन है। दो दिन बाद नैना और दीपक कोर्ट पहुचँ गए।

दीपक की आँखों से लग रहा था कि वह कई माह से ठीक से सो नहीं पाया था। अभी कोर्ट मे दीपक और नैना की सुनवाई के लिए समय था। नैना बाहर पानी पीने आई तो दीपक की वही सैकेट्री जो घर आई थी फिर सामने आकर खड़ी हो गई। नैना ने कहा उसे किसी से भी कोई बात नहीं करनी है। पर सैकेट्रीे बोली कि उसे उसकी बात सुननी ही पड़ेगी। नैना को उसने उसके बेटे की कसम दे दी। अब नैना और सैकेट्री वहीं पास में रखी बैंच पर बैठ गए। नैना बोली-" जल्दी बताओ क्या कहना चाहती हो?"

सैकेट्री बोली-" नैना मैडम आप बहुत बड़ी गलती कर रही हो

दीपक सर से डायवोर्स लेकर" , फिर बोली-" सर आपसे बहुत प्यार करते हैं। अभी कुछ महीनों पहले सर को कम्पनी की तरफ से एक ऑफर मिला था कि अगर वह उसे एक निश्चित समय तक पूरा कर देते हैं तो उन्हें तोहफे मे "टू - रूम -सैट "वाला फ्लैेट मिलेगा।"

नैना सब खामोशी से सुन रही थी। सैकेट्री फिर बोली-" इसी कारण सर देद देर तक ऑफिस मे काम करते रहते थे। वह आपको गिफ्ट मे सपनों का घर देना चाहते थे।" सैकेट्री ने अपने पर्स से फ्लैट से सम्बंधित कागज़ नैना को दिखाए। उन्हें देखते ही नैना की आँखों से झर झर आँसू बहने लगे। इतने मे कोर्ट से आवाज़ आई "नैना और दीपक जहाँ कहीं भी हों कोर्ट मे हाजि़र हो।" अब नैना तेज़ कदमों से कोर्ट की ओर बढ़ गई।

वहाँ बाहर ही दीपक उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। उसने दीपक का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ कार मे बैठाकर मंदिर ले गई। दोनों परिवार कुछ भी नहीं समझ पाएं कि आखिर ये क्या हो रहा है ? नैना ने मंदिर मे भगवान के समक्ष दीपक से माफी माँगी और कभी भी उसका साथ ना छोड़ने का वादा किया। उधर कोर्ट आवाज़ लगाता रह गया इधर नैना समझ चुकी थी कि कभी भी भावनाओं मे आकर कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।

आज दोनों बहुत खुश थे।


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