Anuja Manu

Abstract


4.0  

Anuja Manu

Abstract


बेरोजगारी का हाल

बेरोजगारी का हाल

4 mins 244 4 mins 244

आज पहली बार शीला का बेटा शीला कू सामने जोर से बोला, शीला कांप ग ई, यह क्या, जो बेटा चुपचाप रहता था कभी सामने नही बोला आज उसके चिल्लाने से आसपास आवाज चली ग ई, हर कोई सुनकर दंग रह गया, बहुत पहले शीला के पति की मौत हो ग ई थी, और अकेले ही शीला ने अपने बेटे को पढाया, शीला खुद एक शिक्षिका थी, वह चाहती थी,उसका बेटा पढलिखकर कुछ अच्छा बने, कालेज तक तो रोहित पढ रहा था, पर फिर अचानक उसके व्यवहार मे अंतर आ गया, वह आजकल गुस्से मे रहने लगा, बात बात पर मां पर गुस्सा करता,

आज तो हद ही हो ग ई शीला के सामने इतनी जोर से क्यों क्या हुआ,शीला के अडोसी पडोसी इकट्ठा हो गये, जब बात सुनी तो शीला के साथ सभी चकित हो गये, हुआ यूं कि शीला के आसपास के लोग जनजाति मे आते थे, तो पढते वक्त भी शासन की मदद मिली और रोहित के साथ के मोहल्ले के तीन दोस्त की नौकरी भी लग ग ई, जबकि यह पढने मे होशियार तो भी भटक रहा तो इसका दिमाग इस बात मे डिप्रेशन मे आ गया कि अब मै क्या करूंगा, आज उसने अपनी मां से ऊंची आवाज मे कह दिया भूल जाना मेरी शादी की बाते, इतने वर्षो मे एक जमीन का टुकडा तक नही रखा कि मै वहां ही दुकानतक कर सकुं, आपने मेरे लिए कुछ नही किया, बस दो रोटी खाओ और पडे रहो घर में, शीला तो दंग रह ग ई उसकी इस तरह की बाते सुनकर,वह स्वयं शिक्षिका दुसरे बच्चो को सीखाती, आज खूद के बच्चे से हार ग ई, उसकी आंखो से अश्रु बहने लगे, वह बोली तु खूद काम तलाश कर तभी तो कोई काम मिलेगा,

वह बोला,हां अब मै मजदूर ही तो बनुंगा, और कुछ तो बन नही सकता, मेरे दोस्त सुटबुट मे घुमेंगे और मै, दाडकी करने जांऊंगा, मां ने कहां अपने घर की परिस्थिति समझ, तेरे पिता नही है,वरना वे सब करते, मैने भी तो एक अकेले औरत समाज से लडकर तुझे पालकर इतना पढाया लिखाया, जब मै नही हारी तो तु क्यो हारने लगा है, रोहित बोला, शासन को ऐसा करना चाहिए, जिसके माता पिता जिस जगह नौकरी करते है, उन्ही की जगह उनके बच्चो को रख लेना चाहिए, तो आज यह समस्या हल हो जाएं, शीला ने कहा ऐसा नही होता है, हर व्यक्ति के लिए शासन ही कब तक सोचे,स्वयं व्यक्ति को भी कुछ सोचना चाहिए, आज का दिन और रात बहुत टेन्शन मे रही शीला की पति सुरेश के जाने के बाद उसका एक ही लक्ष्य था कि वह बेटे को पढायेगी, और अच्छा बनायेगी,

और आज पढा लिखा बेटा ऐसा बेरोजगार घुम घुमकर ऐसी नकारात्मक बाते सोच रहा है, बहुत डर ग ई शीला, पर फिर उसने अपने बहते आंसू पौछै और उठ खडी हुई, आज उसने बैंक से कुछ रूपये निकाले और एक ठेलागाडी खरीदी, ऊसे बाजार के एक कोने मे जंजीर से बांध आ ई, और बाकि रूपयो से उसने पच्चीस से तीस किलो के अंदाज मे दो तरह के फल खरीदलिए और उसी ठेला गाडी मे रख लिए, रोहित को पता ही नही मां कहां ग ई है, जो लोग पहचान रहे थे,वे कह.रहे थे, मेम यह क्या कर रही हो, मेम ने कहा फल बेच रही हूं, रोहित ने बहुत देर तक मां के ना आने पर फोन लगाया, तो मां ने कहां काम पर हूं, तभी एक पड़ोसी ने आकर बताया कि रोहित आज तेरी मां मेडम होकर देख बाजार मे फल बेच रही है। रोहित भागा भागा गया,

मां यह क्या कर रही, मां ने कहा दिखता नही काम कर रही हूं, रोहित खीज रहा था, और मां उसकी बात ना सुनकर ग्राहको को फल बेच रही थी, दोपहर के चार बज गये, भुखी प्यासी शीला को चक्कर से आने लगे, तभी रोहित ने पानी पिलाया, और एक फल खाने को देते हुए, खुद ग्राहक को फल तोलकर देने लगा, इस तरह रोहित को देखकर शीला को थोडा सकुन मिला और वह मुस्कुरा दी, मां के गले लग गया रोहित, बोला मां सच, आप बहुत हिम्मत वाली है। किसी काम मे शर्म नही आती, मै आज से यही काम करूंगा, और संग मे पढाई, अब मुझे भी किसी बात की कोई टेन्शन नहीं, तभी शिला बोली बेटा जगह ही हो, नौकरी ही लगे, सुटबुट से ही घुमे, यह जरूरीनही, जरूरी होता है, काम, आज से तेरे हाथो मे रोजगार है, कभी अपने से ऊपर के लोगो को मत देखकर तुलना करो, अपने से हमेशा छोटे लोगों को देखो, रोहित ने मां के चरण छुएं,दोनो मां बेटे एक दूसरे को देखने लगे।


Rate this content
Log in

More hindi story from Anuja Manu

Similar hindi story from Abstract