बदला

बदला

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तुम मुझे मार तो नहीं डालोगे ?

नेहा ने पवन को गहरी नजरों से देखते हुए पूछा !

कैसी बातें कर रही हो ?

पवन अवाक होकर नेहा की ओर देखने लगा।

आज शाम को एक आन्टी आई थी, कह रही थी कि तुमने उनकी बेटी को जलाकर मार डाला है ----!

नेहा ये तुम क्या बकवास किये जा रही हो ?

मैं तो तुम्हें पहले ही बता चुका हूँ कि कमला की मृत्यु गैस सिलेंडर फटने की वजह से जलकर हुई थी ---।

तुम भी न ऽ ऽ अनजाने लोगों की कही बातों को दिल पे लगा लेती हो !

कौन आन्टी यहाँ आई थी ?

नेहा ने नरम होते हुए कहा, कल शाम को जब तुम काम पर निकल गये थे, मैं बाहर खड़ी थी, इतने में एक आन्टी यहाँ आई और मुझे तुमसे सावधान रहने को कहकर चली गई।

नेहा ऽ ऽ बेकार की इन बातों से मेरा दिमाग खराब मत करो, मैं बार-बार अपनी सफाई नहीं दूँगा !

नेहा पवन की ओर देखते हुए गहरी सोच में डूब गई। वैसे पवन उसे खुश रखने का लाखों जतन करता।

चलो आज मेरी छुट्टी है, "कैंडल लाइट डिनर पर चलते हैं।"

ठीक है,

आज मैं ड्यूटी से जल्दी लौट आऊँगी। नेहा अस्पताल में फिजिकल ट्रेनर का कार्य करती थी जबकि पवन एक मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत था।

दोनों ने लव मैरिज किया था। पवन के परिवार मे केवल एक चाचा जी थे, जिनसे नेहा की कभी भेंट नहीं हुई थी।

नेहा ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर, घर से भाग कर शादी की थी। शादी के बाद दोनों एक किराए के फ्लैट में आकर रहने लगे थे। शादी के छह महीने हँसी- खुशी से बीत गए।

एक दिन सुबह- सुबह पवन ने कहा "नेहा विदेश से एक बहुत अच्छा जाॅब आफर आया है, अब तुम भी जाने की तैयारी करो।

मैं तुम्हारे बिना जा न सकूँगा !

ठीक है, फिर आज मैं सर से बात करती हूँ ।

अच्छा सुनो तुम्हारे अकाउंट में कितने रूपयें है ? तीस के आसपास ----क्यों ?

तुम अपने अकाउंट का डिटेल मुझे शेयर करना-----। वीजा बनाते समय जरूरत पड़ती है- --।

मगर ऽऽ---

अगर -मगर क्यों ?

तुम मेरी पत्नी हो ! लो इन कागजात पर साइन करों ---।

अरे ऽऽ मुझे कुछ सोचने का मौका तो दो !

इसमें सोचना क्या है ?

लो साइन करो !

नहीं ऽ ऽ अभी मैं साइन नहीं करूँगी !

च टा कऽऽ एक जोरदार तमाचा नेहा के गालों पर पड़ा।

चाँटा इतना जोरों का था कि नेहा लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़ीं। पवन, नेहा को खींच कर रसोई में ले गया, उसके मुँह और हाथों को बाँध कर गैस सिलेंडर खोल दिया। बाहर से दरवाजा लगा कर चिल्लाकर बोला-

"लो अब कमला की तरह तुम भी मरो।"

एक माचिस जलाकर अंदर फेंक कर खुद बाहर निकल गया।

एक जोरदार विस्फोट की आवाज-

कमरे से आग----और धुआँ- ----

अस्पताल में पवन रो रहा था ----।

"आपकी पहली पत्नी भी जलकर मरी ने थी ?

पुलिस ने पूछा"

पता नहीं भगवान मुझसे क्या " खेल " खेल रहे हैं ! मैं तो शहर से बाहर था।

चलिए, पत्नी को देख लिजिए ! वैसे पहचानना मुश्किल है ! अस्सी प्रतिशत जल चुकी है ! बार्ड बाॅय ने अंदर आकर कहा।

बिल्कुल सपाट चेहरा लिए पवन पोस्टमार्टम हाउस में प्रवेश किया- --

लाश पर से कपड़ा हटाया गया- ---

बिलकुल काला ---

चेहरा जल कर काला काठ के समान हो गया था- -- पाषाण की तरह कठोर दोनों हाथ ऊपर की ओर उठे हुए थे------

पलक झपकते ही दोनों हाथ पवन के गले को कसने लगे------

कमला ऽऽऽऽ तुम तो मर चुकी थी- ---

अभी तो मैंने नेहा को ज-लाया- --

पवन गिर पड़ा- --- पुलिस उसे उठाकर ले गई।

बाहर नेहा डॉक्टर संग बैठी थी।

सर मुझे उस पर पहले ही संदेह हो गया था।

मैंने रसोई की खिड़की पर से ग्रिल हटाकर रख दिया था इसलिए मैं खिड़की से बाहर निकल गई थी।

मगर आपने "डमी" के दोनों हाथ ऊपर कैसे किया ?

डॉक्टर साहब ने भावहीन चेहरा लिए कहा- ---

मैंने वहां कोई " डमी" रखी ही नहीं थी---

मुझे याद है एक साल पहले- ----

कमला का शरीर जल कर कठोर हो गया था और उसके हाथ ऊपर उठे हुए थे।

ऐसी कुछ घटनाएँ पोस्टमार्टम हाउस में होते रहती है, जिसका जिक्र करना हम जरूरी नहीं समझते।

नेहा के पिता उसे लेने आए थे। आन्टी ने उसे गले से लगाते हुए कहा "बेटी तुमने कमला का "बदला "ले लिया है।


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