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harsh kumar

Abstract


4.5  

harsh kumar

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बातें जो पूरी ना हो सकी

बातें जो पूरी ना हो सकी

7 mins 178 7 mins 178

अप्रैल का माह था। स्कूल में नामांकन चालू था।1 दिन स्कूल में एक लड़की अपना नामांकन करवाने आई थी।

 नामांकन करवाने के अगले दिन वह स्कूल आई उसका नाम अदिति था। जब वह स्कूल आई तो उसकी क्लास कौन सी तरफ है यह उसे पता नहीं था। तब मैंने उससे पूछा इधर - उधर क्या ढूंढ रही हो ? वह बोली मुझे मेरी क्लास नहीं मिल रही है। मैंने पूछा कौन से क्लास में हो तुम? वह बोली मैं क्लास 8 में हूँ। मैं मन ही मन खुश हो रहा था क्योंकि मैं भी क्लास 8 में था। क्लास 8 में लड़के लड़कियाँ एक साथ बैठते हैं तो मुझे एक दोस्त मिल जाती।फिर मैं उसे बोला मैं भी क्लास 8 में हूँ। वह बोली सच में !मैंने बोला हाँ उसके बाद मैं उसे क्लास ले गया। वह बोली दोस्ती करोगे मैंने बोला हाँ। वह पढ़ने में बहुत ज्यादा तेज थी और मैं बहुत ज्यादा कमजोर था। मुझे तो मुझे उससे से डर लगने लगा कि वह मुझसे कुछ पूछना ले। एक दिन जिसका डर था वही हुआ। उसने मुझे ट्रिग्नोमेट्री का एक सवाल बनाने दे दिया। जो कि प्राइवेट स्कूल में क्लास 8 से ही शुरू हो जाती है। मैं कुछ देर तक बहाना बनाकर बचता रहा फिर उसे पता चली गया कि मैं बहुत कमजोर हूं। गणित के मामले में। वह कुछ देर तक मुझसे बात नहीं की और जब टिफिन का समय हुआ तो वह मुस्कुरा कर बोली तुम घबराओ मत मैं तुम्हें गणित सिखा दूंगी। उस वक्त मैंने उसे कुछ नहीं बोला और छुट्टी के बाद सीधे अपने घर चला गया।अगले दिन जब स्कूल गया तो मैंने देखा वह मुझसे भी पहले से स्कूल आ गई है। वह बोली इतना लेट मैंने बोला जब स्कूल का समय होगा तभी आऊंगा ना। वह वाली आज से हम लोग जल्दी आएंगे और तुम्हारी गणित को सही करेंगे।हम लोग करीबन 3 से 4 महीने जल्दी जल्दी आए और मजे की बात तो यह थी कि पूरे क्लास में सबसे ज्यादा गणित में मेरा ही नंबर था। उस दिन के बाद हमारे बीच काफी गहरी मित्रता हो गई। कुछ दिनों बाद अदिति ने बोला मैं जा रही हूँ अपने पापा के साथ। मैंने पूछा क्यों ? तब वह बोली मेरे पापा का ट्रांसफर हो गया है। उस वक्त हम लोग कुछ नहीं बोले बस अपने कुछ बीते पल को याद करने लगे कि किस तरह हमने पढ़ाई की। उसने मुझसे मेरा नंबर मांगा मैंने उसे अपना नंबर दे दिया और वह भी मुझे अपना नंबर दे दी और वह अगले दिन चले गई। फिर मैंने कुछ दिनों बाद उसे कॉल किया !तो उसके पापा ने फोन रिसीव किया था। मैंने बोला अंकल आदिति है क्या तो उन्होंने पूछा कौन हो तुम मैंने बोला मैं उसका स्कूल फ्रेंड हूँ। वह बोले ओ मैंने पूछा क्या अदिति से बात हो सकती है। वह बोले हां रुको मैं दे रहा हूं पर हमारी बात नहीं हो सकी।

फिर मैंने कुछ दिनों बाद कॉल किया और उस दिनआदिति ने ही कॉल रिसीव की थी। मैंने बोला हेलो वह बोलि कौन? मैं बोला हर्ष बोल रहा हूं। किशनगंज से वह बोली अो कैसे हो मैंने बोला ठीक। तुम कैसी हो? वह बोली ठीक है। मैंने पूछा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है।वह बोली ठीक चल रही है।उसने पूछा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है मैंने बोला बहुत खराब मन नहीं लगता पढ़ने में अब। मैंने पूछा वैसे कब आ रही हो? वह बोली पता नहीं वैसे पापा से मैंने पूछा है उन्होंने बोला है अगले महीने जाएंगे किशनगंज। मैं बोला ठीक है इंतजार करूंगा। मैंने बोला ठीक है बाद में बात करते हैं। वह बोली ठीक है पर ना मैं कॉल कट कर रहा था ना वह कॉल कट कर रही थी। हम लोग करीबन डेढ़ घंटे तक बिना बात किए लाइन पर ही बने थे और फिर मेरा फोन ऑफ हो गया। वह अक्टूबर महीने में आने वाली थी और जिस पल का इंतजार था वह घड़ी आ गई थी। उसने मुझे कॉल किया और बोली कहाँ हो मैंने बोला घर पर हूँ। वह बोली मैं आ गई हूं किशनगंज मिलोगे। मैंने बोला हाँ आता हूँ। मैं तुरंत तैयार होकर उससे मिलने गया और वहां से हम लोग अपने स्कूल के तरफ घूमने चले गए। स्कूल के सामने कुछ दूर पर एक पार्क था हम लोग वहां जाके बहुत मस्ती किए और जब मैं अगले दिन उसके घर गया तो वह कहीं जा रही थी। मैंने पूछा कहां जा रही हो वह बोली मैं वापस जा रही हूं। अब अपने पापा के साथ। फिर मैंने उसे एक छोटा सा गिफ्ट देने की कोशिश की। मैंने उसे एक बड़ा वाला सेलिब्रेशन का पैकेट दिया और बोला यह मेरी तरफ से है रख लो। वह मुझे एक पेपर दी और बोली जब मैं चली जाऊं तो इसे खोल कर पढ़ना मैंने बोला ठीक और फिर वह चली गई। ऐसा लगा जैसे कोई अपना चला गया हो। मैंने जब अगले दिन पेपर पढ़ा तो उसमें....

हमारी अब तक की सारी बातें लिखी हुई थी। उसके पिताजी सीआरपीएफ में नौकरी करते थे।उनका पोस्टिंग श्रीनगर में था।और 1 साल बाद वे किशनगंज आने वाले थे।और अदिति ने इन सभी बातों को लिखने के बाद अपने दिल की बातों को लिखी थी और मुझसे उसका जवाब मांगी थी।वह बोली थी मुझे कॉल करके इसका जवाब देना। जब मैंने कुछ दिनों बाद कॉल किया तो उस दिन अदिति ने कॉल रिसीव कर के बोली कैसे हो मैंने बोला ठीक हूं। वह बोली मैंने जो पेपर दिया था तुमने उसे पढ़ा। मैंने बोला ओ हां वह पेपर शायद कहीं गुम हो गया। वह बोली नहीं तुम झूठ बोल रहे हो मैंने बोला नहीं सच बोल रहा हूं वह बुरा मान गई फिर मैंने सच बता दिया। मैंने पेपर पढ़ लिया पूरा फिर उसने मुझसे उसका उत्तर मांगा मैंने उसे उत्तर नहीं दिया। और बोला जब समय आएगा तब तुम्हें इसका उत्तर मिल जाएगा। और फिर हमने थोड़ी देर तक बातें की जब बात हो गई तो मैंने कॉल कट कर दिया।मैंने उसे मैसेज किया कि अब कब आओगी किशनगंज। वह बोली 1 साल बाद। मैंने बोला ठीक। और इसी तरह हमारी बातें होती रहती थी। 1 साल बाद वह आ रही थी।मैं बहुत ही ज्यादा खुश था उस दिन मैं पूरे अच्छे से तैयार होकर मिलने को बेताब था जब वह आई उस दिन मैं उससे नहीं मिल सका। क्योंकि उस दिन उसे आने में काफी ज्यादा रात हो गई थी। अगले दिन मैं सुबह के 6:00 बजे ही मिलने चला गया। और हम लोग मिलकर एक दूसरे से बहुत खुश हुए। जिस दिन वह आई उसके अगले 4 दिन बाद आदिति का जन्मदिन था। मैंने उसके लिए गुलाब का फूल लेकर उसके घर गया। और उसके जन्मदिन की बधाई देते हुए उसे वह फूल दे दिया। वह बहुत खुश हो गई।और उसी दिन मैंने उसे उसके प्रश्न का उत्तर दिया था।उसी दिन मैंने उसे प्रपोज भी किया था।और उस दिन हम लोग सिर्फ एक दूसरे को देख कर चिढ़ाते थे।सबसे खास बात तो यह थी कि हम लोग हमेशा एक दोस्त की तरह ही एक दूसरे के साथ व्यवहार करते थे। हमारे बीच आज तक कभी कोई भी झगड़ा नहीं हुआ। कब दोस्ती प्यार में बदल गई यह पता ही नहीं चला। हम लोग जिस तरह दोस्त बने थे आज भी उसी तरह से दोस्त ही है।जनवरी 2020 में उसके पिताजी का ट्रांसफर जम्मू कश्मीर में हो गया। इस बात से हमें काफी दुख हुआ।और उसके जाने के बाद हमारी बातें सिर्फ फोन कॉल से ही होती थी हम लोग 3 साल से बात करते आ रहे हैं। 3 साल में एक बार भी नहीं मिल सके शायद अब मिलना एक सपना ही होगा क्योंकि उसके पिताजी का ट्रांसफर जो हो गया है। क्या पता अब कभी मिल पाएंगे या नहीं। 

कुछ दिन पहले की बात है। जब मैं और अदिति बात कर रहे थे तो उस वक्त अदिति के पापा न जाने किस बात पर हमे बहुत ही ज्यदा गुस्से से डाट रहे थे तभी हमने काल कट कर लिया और फ़िर जब अगले दिन अदिति का काल आया तो उस दिन अदिति काफ़ी उदास लग रही थी।

मैने जब उससे पुछा क्या हुआ तो अदिति ने काल कट कर ली।मैने जब दुबारा काल किया तो अदिति का नम्बर बिजी आ रहा था। तो मैने फ़िर काल नही किया।उसी दिन अदिति का एक मैसेज आया।(अब हमारी बात नही होगी)मैने पुछा क्यू तो अदिति ने बोली पापा ने मना किया है। फ़िर अदिति ने मुझे सौरी बोलकर ब्लॉक कर दी। शायद कोई बात होगी या उसकी कोई मजबूरी होगी और फिर उस दिन से हमारी बातें ना हो सकी इस कारण हमारी बातें एक कहानी की तरह बन कर रह गई जिस कारण से मेरी कहानी का नाम बातें जो पूरी ना हो सकी रखा गया है।


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