Omdeep Verma

Drama Romance


4.5  

Omdeep Verma

Drama Romance


बारिश और पहला प्यार

बारिश और पहला प्यार

4 mins 171 4 mins 171

"अरे बेटा छाता और रेनकोट तो लेते जाओ मौसम खराब है बारिश हो सकती है और यह क्या तुमने नाश्ता भी नहीं किया" मेरी मां ने मुझे घर से जल्दबाजी से निकलते देख कहा। नहीं मां मुझे भूख नहीं है और छाता व रेनकोट ऊपर वाले कमरे में पड़े उन्हें लेने जाऊंगा तो कॉलेज को लेट हो जाऊंगा आज बस एक घंटे की क्लास है मैं मिस नहीं करना चाहता कहते जल्दी से लगभग भागते हुए घर से को निकल गया। कॉलेज घर से ज्यादा दूर नहीं है तो मैं टाइम पर कॉलेज पहुंच गया। और एक घंटे बाद क्लास खत्म होते ही मैं जल्दी से घर के लिए निकल पड़ा क्योंकि बादल छाए हुए थे बारिश होने वाली थी जबकि बारिश मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है पूरे शरीर पर चिपचिपाहट और पूरे शहर की गंदगी लेकर घुटनों तक बहता पानी मुझे जरा भी नहीं अच्छा लगता। कॉलेज से निकल कर कुछ ही कदम चला कि एकदम से तेज बारिश शुरू हो गई जो कि मेरे लिए तो आफत सी ही खड़ी हो गई। प्रिया जिसको मैं मन ही मन चाहने लगा था, रोज छुप-छुप कर देखा करता था, एक-दो कहने भी कोशिश की मगर नाकामयाब रहा' मुझसे थोड़ी आगे चल रही थी बारिश के झोंके के से वो एकदम से पीछे मुड़ी और मुझे देखते ही आवाज दी "अरे शिवम तुम भीग रहे हो, छाते के नीचे आ जाओ" मैं एक बार तो थोड़ा रुक सा क्योंकि आजतक मैं प्रिया के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था बस उसे देखकर ही खुश हो जाया करता था। और आज उसके छाते के नीचे मतलब उसके एकदम करीब जाने में थोडा़ नर्वस सा हो रहा था। फिर ये सोचकर चला गया कि चलो इस बारिश से तो बचाव होगा।

आज बारिश तेज थी और सामने से तिरछी बूंदे गिर रही थी तो वह भी पूरी तरह से भीगी चुकी थी।हम सड़क किनारे लगभग सड़क के ऊपर ही खड़े हो गए थे। इतने में जोरदार सी कड़कड़ाहट के साथ कहीं बिजली गिरी। बिजली की कड़कड़ाहट के साथ ही प्रिया के हाथ से छाता छूटा और वो झट से मुझसे चिपक गई।मैं सकपका गया और मेरी सांसे रुक सी गई थी।जो लड़की आजतक कभी मेरे पास भी नहीं खड़ी होती थी आज मुझसे चिपकी हुई थी।

बारिश तेज थी एक और जोरदार सी बिजली कड़की और मेरी बांहों ने उसे जकड़ लिया। एक बार तो लगा जैसे सबकुछ ठहर सा गया हो, बारिश और आसपास का सब शोर शून्य सा हो गया था सुनाई दे रही थी तो बस उसकी धड़कनें। 

"रोमांस करने के लिए यही जगह मिली है क्या? कहते हुए एक कार वाले ने लगातार दो तीन बार तेज होर्न बजाए तो एकदम से हम दोनों का ध्यान टूटा एक दूसरे की बांहों से मुक्त हुए। उसने एक नजर मेरी तरफ देखा और पलकें झुका ली, और मेरी भी नजरें झुक गई। कुछ एक मिनट बाद सनाटे को तोड़ती हुई बोली तुम छाता क्यों नहीं लाए ? "दरअसल वो मैं" बोल ही रहा था कि उससे "अच्छा तो तुम्हें बारिश पसंद है? वैसे मुझे बारिश मुझे भी बहुत पसंद है, ये छाता तो मम्मी की जिद पे ले आई थी। बरसात में नहाना पसंद है और धरती पर गिरती बारिश की बूंदों के साथ नाचना मुझे पसंद है बस थोड़ा बिजली से डर लगता है इसलिए थोड़ा' कहते हुए मेरी तरफ देखा और नजरें झुका ली। "ईट्स ओके" बस इतना ही बोल पाया मैं। और हम दोनों घर की तरफ चल पड़े। मैं उसे कैसे बताता कि मुझे बारिश से नफरत है और बिजली से भी डर लगता है। उसने सीने से चिपककर दिल की तारें जो छेड़ दी थी। 

वो मुझसे थोड़ा सटकर चल रही थी और पता नहीं क्या बोले जा रही थी मैं तो बस उसके मुख पर बिखरी बालों की लटें और उस पर झरनों से बहते पानी को एकटक निहारे जा रहा था। बोलते वक्त उसके होंठों का आपस में हल्का सा स्पर्श और उन पर गिरती बारिश की बूँदे मेरे दिल में आग लगाए जा रही थी। आजतक जिस बारिश से मुझे नफरत थी उसके साथ से अच्छी लग रही थी। मेरे घर से दो गली पहले अपने घर की तरफ मुड़ते हुए "तुम्हारी धड़कनें कह रही है तुम्हारा दिल अभी खाली है मुझे थोड़ी जगह मिलेगी क्या? कहकर जल्दी से अपने घर की तरफ चली गई। सुनकर पैर धरती पर ना रहे, दिल सीने से निकलकर आसमां में उड़ने को आसुर हो रहा था। मैं पलभर में ही घर पहुँच गया और छत पर चढ़कर बांहें आसमान की तरफ खोलकर, जोर-जोर से शोर मचाकर भगवान को इस बरसात के लिए धन्यवाद कह रहा था। उसका एकदम से मुझसे चिपक जाना' बस एक ही एक नजारा आंखों के सामने घूम रहा था। मेरी माँ भी हैरान थी आज इसे क्या हो गया। मेरा दिल सातवें आसमान पर था आज मुझे मेरा प्यार मिल गया और बारिश से भी प्यार हो गया। ये बारिश मेरे लिए लकी चार्म निकली।


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