असली मजा सबके साथ आता है
असली मजा सबके साथ आता है
रात के 9:00 बजे खाना बनाते बनाते अचानक निधि दौड़ते हुए अपने सास के कमरे में गई जो कि उस समय अपनी बहन के साथ बैठकर गप्पे लड़ा रही थी। दरअसल निधि की सास सरला जी की बड़ी बहन शांति जी कुछ दिनों के लिए उनके पास आए हुईं है।
"मम्मी जी कल ताऊजी और ताईजी की शादी की 50वीं सालगिरह है......... मुझे अभी अभी ध्यान आया। यहां तक की उनके परिवार में भी शायद किसी को ध्यान ही नहीं है तो क्यों ना हम एक सरप्राइज पार्टी प्लान करें...?"
"अरे बहू आइडिया तो बहुत अच्छा है......... बड़े भाई साहब और भाभी बहुत खुश हो जाएंगे और इसी बहाने मेल मुलाकात भी हो जाएगी सबकी......... पूरा परिवार एक साथ हो तो मजा ही कुछ अलग आता है।"
"अरे सरला रुक.......... इतनी भी जल्दी क्या है कल ही सालगिरह है और आज रात को ही याद आया है। इतना जल्दी सारा इंतजाम कैसे होगा........ और वैसे भी जरूरत ही क्या है इतना सब कुछ करने की जब उनके अपने बच्चों को याद ही नहीं है।" मौसी जी ने मुंह चिढ़ाते हुए कहा।
"तो क्या हुआ मौसी जी........... हम भी तो उनके बच्चे हैं ना......... और हम यहां पर पार्टी करेंगे तो सबको बहुत अच्छा लगेगा और आप चिंता मत कीजिए सब कुछ मैनेज हो जाएगा।" निधि ने अपनी बात रखी।
"अच्छा तो बहू सुन....... लगभग कितने लोग होंगे.....? देख, देवर जी का परिवार......... बड़े भैया का परिवार और चार उनकी बेटियां.......... चार हमारी बेटियां और उनके परिवार............ लगभग 50 लोग हो जाएंगे।" सरला जी ने अंदाजा लगाते हुए कहां और उनकी बात सुनकर मौसी जी की त्यौरियां चढ़ गई।
"ठीक है मम्मी जी.......... आप सब को फोन कर दीजिए और मैं बाकी के इंतजाम देखती हूं।" इतना कहकर निधि वापस रसोई में चली गई और शांति जी ने सबको फोन करने शुरू कर दिये। सुबह होते ही निधि ने अपना काम फटाफट शुरू कर दिया। सास सरला जी भी अपने हिसाब से मदद कर रही थी लेकिन मौसी जी कि मन में यह बात चल रही थी कि न जाने क्यों उनकी बहन और निधि मिलकर यह सरप्राइज पार्टी प्लान कर रहे हैं। इतने लोगों के लिए खाना पीना सब कुछ इंतजाम करना कोई मामूली बात नहीं है और फालतू में इतनी बड़ी जिम्मेदारी अपने सर पर ले ली है।
वहीं दूसरी तरफ निधि ने सबसे पहले तो सुबह उठकर पोहे और पुलाव बना दिया साथ ही छाछ और सलाद काट दिया ताकि उसे दोपहर के खाने और नाश्ते की चिंता ना हो। फिर मार्केट जाकर जरूरी सामान सब्जियां वगैरह ले आई। 12:00 बजे के लगभग घर की बेटियो का आगमन शुरू हो गया और देखते ही देखते सभी ने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली। झाड़ू पोंछा तो कामवाली रमा करके ही गई थी लेकिन सजावट का काम अभी बाकी था। निधि की दो ननंदे सजावट में लग गई तो दो ननंदे स्टोररूम से जरूरी सामान बड़े बर्तन आदि निकालने में लग गई। कोई सब्जी काटने लग गई तो कोई पुरियो के लिए आटा गूंथने लग गई। किसी ने चाय बनाई तो किसी ने नाश्ते का इंतजाम किया। देखते ही देखते 4:00 बजे तक सारी तैयारियां हो गई और और तो और सबकी खाने के बर्तन का ढेर भी 15 मिनट के अंदर चारों बहनों ने मिलकर साफ कर दिया। निधि ने बर्तन खाली किए ही थे कि ननंदे रसोई में आ गई। एक ने बर्तन धोए तो दूसरी ने मांजे तीसरी ने फटाफट सूखे कपड़े से पोंछकर सेट भी कर दिए। काम कैसे हुआ पता ही नहीं चला फिर सबने बैठकर आराम से चाय का लुफ्त उठाया और गपशप भी की। लगभग 7:00 बजे ताऊ जी और ताई जी को यह कहकर निधि के घर लाया गया कि उन्हें किसी पार्टी में जाना है और जब वह लोग यहां पर पहुंचे तो उन्हें पूरे परिवार ने एक साथ शुभकामनाएं दी। यह दृश्य देखकर दोनों की आंखें भीग गई फिर फटाफट से केक काटा गया और सभी ने डांस भी किया गेम्स भी खेलें, खाना खाया और मिलकर किचन भी साफ किया। लगभग 11:00 बजे सभी अपने अपने घर चले गए।
आज मौसी जी सोच रही थी की यह दृश्य कितना मनोरम था। लेकिन उनके परिवार में कभी ऐसा नहीं होता है क्योंकि पहले वहां पर घर की बहू होने के नाते सारा काम का बोज उन पर आ जाता था इसीलिए उन्होंने इस तरीके के मेल मिलाप को कभी पसंद नहीं किया और फिर उनकी बहू के आने के बाद भी सारी जिम्मेदारीयां बहू पर आ गई तो वह भी सब कुछ नहीं कर पाती थी इसीलिए ऐसा मनोरम दृश्य उनके घर में नहीं होता।
लेकिन अब वह समझ चुकी थी कि अकेले बहू पर जिम्मेदारी डालने से काम नहीं चलेगा। परिवार का तो मतलब ही साथ देना होता है तो फिर परिवार के फंक्शन की जिम्मेदारी सिर्फ बहू की क्यों हो। अब उन्होंने भी ठान लिया था कि ऐसा फंक्शन वह भी अपने घर में करेंगी और उससे पहले अपनी बेटियों को समझाएंगी की परिवार क्या होता है और कैसे मिलकर जुलकर साथ काम करके हंसी खुशी से हर फंक्शन को इंजॉय करते हैं। जो दृश्य आज उन्होंने अपनी बहन के घर पर देखा था वही दृश्य वह अपनी बेटियों को भी बताएंगी और समझाएंगी ताकि ऐसी मेल मिलाप और हंसी खुशी वाली पार्टियां उनके घर पर भी हो उनके घर पर भी बेटी और बहू के ठहाको की आवाज गूंजे।
दोस्तों सच ही कहा है किसी ने अगर परिवार का साथ हो तो हम कुछ भी कर सकते हैं जैसे निधि ने एक इतने बड़े फंक्शन की तैयारियां एक ही रात में कर ली क्योंकि वह जानती थी कि उसका पूरा परिवार उसका साथ देगा और वह हुआ भी। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मैं भी ऐसे ही एक परिवार का हिस्सा हूं जहां पर मिलजुल कर काम भी किया जाता है और फंक्शन को इंजॉय भी किया जाता है क्योंकि असली मजा सबके साथ ही आता है।
