jeet mallick

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अपनी किस्मत की लकीर

अपनी किस्मत की लकीर

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जुलाई का महीना था मानसून आ चुका था बारिश खुशियां बनके इस धरती पर बरस रही थी और गोवा के इन सड़कों पर बारिश के वक्त चलना कितना मुश्किल होता है। जहां मैं रहता हूं, मेरे मोहल्ले से 2 किलोमीटर पर ही बीच था। जहां ऐसी बारिशों में वहां का नजारा बहुत है दृश्य मयी लगता है क्योंकि इसी समय कई जोड़ियां बनती भी है और टूटती भी दिखाई दिया करता था वहां। लोग अक्सर भूल जाते हैं की दिल टूटने के बाद जब दिल जवाब देना बंद कर दे फिर आप अकेले पंछी की तरह जिसको किसी ने पिंजरे में कैद कर दिया हो।

अगले दिन मैं अकेले उस बीच के पास गया और वहां लोगों को बारिश में झूमते, नाचते और गाते दिख रहे थे सब बहुत खुश है सब बहुत खुश थे और समुंदर भी लहर बन बन के झूम रही थी उसे भी पता था कि यहां पर आशिकों का मेला लगा है जिसमें एक लड़का और एक लड़की दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल के अपनी जिंदगी कह डालते हैं, मैं बहुत अकेला था वहां उस भीड़ में लेकिन खुश था की जिंदगी में कुछ खोने के बाद ही तो अच्छा होता है।

फिर मैं रेस्टोरेंट के अंदर जाकर बैठा फिर मैंने कुछ खाने के लिए आर्डर किया और कोल्ड ड्रिंक्स मंगवाई। मैं वह अकेले बैठा था मेरे सामने वाला टेबल बिल्कुल खाली था। पर छोड़ो यह सब बातें, कुछ खाते हैं। तूफान की लहर और तेज हो रही है समुंदर अब झूमने के बजाय तांडव कर रही थी। वहां से सब लोग धीरे-धीरे कुछ लोग रेस्टोरेंट की तरफ आ रहे थे और कुछ लोग गाड़ी से अपनी मंजिल की तरफ जा रहे थे लेकिन कुछ ज्यादा ही भीड़ थी शायद रेस्टोरेंट के अंदर जो उमड़ पड़ी थी। उसी भीड़ ने मुझे मेरे टेबल के दोनों साइड से ब्लॉक कर दिया था मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था कि क्या कर रहे हैं सब फिर मैं कोल्ड ड्रिंक पीने लगा अचानक उसी भीड़ में मेरे टेबल के सामने गीले कपड़ों में भागी भागी आकर वहां बैठ गई।

मैं उसकी तरफ देख रहा था उसने जब अपने सर नीचे कर अपने बाल को बिखेरा तो मैं थोड़ा सा खामोश हो गया। जिसकी याद भुलाई नहीं जाती उसको याद करने के सौ बहाने मिल जाते हैं शायद मेरी जिंदगी में ऐसा ही कुछ हो रहा था। मैंने शॉल उसकी तरफ बढ़ाया उसने मेरी आंखों में देखा और उस शॉल को लिया । तभी जिस रेस्टोरेंट में हम बैठे थे वहां एक सिंगर बहुत ही सुंदर गाना गा रहा था। "प्यार दीवाना होता है अफसाना होता है" यह धुन सुन के मैं उसकी तरफ देखने लगा वह भी थोड़ी शर्मा के मेरी तरफ देखती। कुछ देर में बारिश रुक गई थी। सब लोग बाहर की तरफ जा रहे थे। वह लड़की भी जा रही थी पता नहीं कहां मैं खड़े होकर उसे देखने लगा उसे अपने गाड़ी के पास जाकर बैठने से पहले एक बार मुझे देखा होता आगे सोचते कि क्या करना है।

वह लड़की गाड़ी के पास पहुंचकर रुक गई तभी हवा की तेज धार मेरे कानों में कुछ कहने लगी शायद वह उस लड़की के बारे में हो । लड़की पीछे मुड़ के देखती है लड़का अपनी आंखें बंद कर ले लड़की कुछ ठीक से देख नहीं पाते लड़का आंखें खोलता है तब तक लड़की वहां से जा चुकी होती। कहां पता नहीं।

अगले दिन मैं पंजिम गया मुझे कुछ काम था वहां वह मार्केट से कुछ सामान लेना तो मुझे लेना था मुझे, सामान लेने में दुकान के अंदर गया मैंने अपने लिए एक शर्ट देखा फिर मैं शर्ट ट्रायल करने ट्रायल रूम में गया अंदर शर्ट बदला बाहर आया अपने आपको आईने में देखा हीरो लग रहा था। तभी दूसरे ट्रायल रूम से वह लड़की निकल रही थी मैं उसे देखने लगा कुछ देर बाद उसने भी मुझे देखना अपनी मम्मी के साथ थी और मैं अपनी तन्हाई के साथ बहुत तगड़ा वाला। फिर एक सेल्समैन आकर मुझे मुझे कहता सर शर्ट बैक कर दो आप अच्छी दिख रही है। मैं थोड़ी देर रुक आ रहा उसकी तरफ देख रहा था वह भी शायद देख रही थी मन की आंखों से ऐसा मुझे लगा।

फिर वह लड़की उसकी मम्मी के साथ वहां से जाने लगी फिर उसने पीछे मुड़ा और मुझे एक इशारा किया उंगलियों से शायद कह रही थी कि इस शर्ट पर तुम बहुत अच्छे लग रहे हो। और मैं उसकी तरफ देख, सर हिला रहा था। कुछ दिन बाद हर साल की तरह इस साल में हमारे घर में काली पूजा का आयोजन किया जा रहा था हरसाना में धूमधाम से मनाते हैं। शायद मैंने आप लोगों को अपना नाम नहीं बताया तो मेरा नाम है, राहुल नाम तो सुना ही होगा। तो पूजा का दिन था घर में सब व्यस्त थे मैं भी था। शाम को पंडित जी आए उन्होंने मंदिर के पास सारी सामग्री चेक करते हुए याद करने के लिए सामान मंगवा है और सबको मंदिर के पास आने को कहा। अभी पूजा स्टार्ट होने वाली थी।

सब मंदिर के सामने खड़े थे पंडित जी और मेरे दादाजी काली मैया को तिलक लगा रहे थे, और फूलों की माला चढ़ा है फिर प्रसाद चढ़ा है अब यज्ञ होने वाला था सब यज्ञ के सामने बैठ गए पंडित जी ने अग्निकुंड घी डालते जा रहे थे और मंत्र पढ़े जा रहे थे और हम हर मंतर पर एक फूल कुछ चावल के दाने अग्नि कुंड में डाल रहे थे। अब पूजा का सबसे लास्ट मंत्र पढ़ा जा रहा था इसके बाद हम सब फ्री हो सकते हैं। सबने खूब मजाकिया और ढोल नगाड़े बजे बहुत अच्छा लग रहा था साल में एक ही बार तो होता है ऐसा जब सारे घर वाले साथ होते हैं। और उसे साथ में शामिल होने के लिए कुछ प्रिय जन भी आते हैं।

तभी कुछ लोग घर के सामने गाड़ी से उतर रहे थे कुछ दूर के मेहमान थे शायद 5 लोग उतरे और फिर दूसरी तरफ से एक गेट खुला और छठवां भी निकल गया जब मैंने उसको देखा यह तो वही लड़की थी जिसको मैंने उस दिन बीच पर देखा था और उस शॉपिंग कंपलेक्स पे। कुछ गजब से पॉजिटिव एनर्जी का एहसास हो रहा था। राहुल के पापा उसको उन सभी का सामान लेकर कमरे में ले जाने को कहते हैं और उस लड़की को साथ ले जाने को कहते हैं। लड़की और लड़के दोनों एक दूसरे की मदद करते हुए सामान कमरे तक ले जाते हैं और उसी बीच मैंने उसका नाम सुना उसकी मम्मी चिल्ला रही थी चीकू चीकू कहां है तू इधर आ देख मस्त पकौड़े चले गए हैं गरमा गरम है।

मैंने नाम सुना हंसी तो आई अपने आप को रोक लिया फिर लड़की ने मेरी तरफ देखा और कहा कि मुझे चार्जिंग करना चार्जिंग पॉइंट कहां है तो फिर मैंने कहा यह तो गेस्ट हाउस है यहां तो सिर्फ एक ही चार्जिंग पॉइंट है दूसरा तो होगा नहीं तो फिर मैंने उसे अपने कमरे पर ले गया। चीकू अंदर आई उसने मेरा कमरा देखो दीवार पर पोस्टर देखें। एक दीवार पर जॉन सेना का पोस्टर था और दूसरे में शाहिद कपूर का मैं इन दोनों का काम था, और फिर उसने रखी मेरी किताबों को देखा। उसने कुछ गीत किताबें देखनी चाहिए । चीकू उधर किताब देख रही थी और मैं उसे और मुझे बहन ने देख लिया।

चीकू बोलती है, तुम यह सब भी पढ़ते हो, नेचर लॉ चीकू को भी अच्छा लगता है ऐसी किताबें पढ़ना तो शायद थोड़ी-थोड़ी इंप्रेस हो रही थी, लेकीन मुझ से नहीं किताबों से, सोच भी मेरी ही तरह थी हम दोनों में फिर इस टॉपिक पर रोज बात होता था आज तो बहुत अच्छा लग रहा था कल ने बोरियत कर दिया। क्योंकि हम इसके आगे बड़े ही नहीं रहे थे। मैंने फैसला किया अब तो मुझे इस बात को उसको बोलना कि अब बस इतना नहीं, मैं उसके घर गया, होनी चाहिए पर मैंने उससे बात करनी चाहिए मैं कहना ही वाला था की उसके घर के सामने कोई गाड़ी आकर रुकी। चिकन की मम्मी जाकर देखने गई। गाड़ी से उनके दूर के रिश्तेदार आए थे और वह भी लखनऊ से बड़े नवाब फैमिली से लग रहे थे मुझे क्या करना मैं तो अपना काम करने आया था, मुझे क्या पता था अपनी किस्मत लखनऊ से आया हुआ वह लौंडा ले जाएगा।

मैं ऐसा इसलिए कह रहा था कि मुझे पता चल चुका था की रस्सी पर बल देने से वैसे भी टूटेगी और हम भी गिरेंगे। इससे अच्छा है यह थोड़ी देर के लिए खामोश हो जाएं और आपके सामने क्या हो रहा है उसको समझे तभी कुछ हो सकता है जिंदगी तो मैं वहां खड़े होकर समझ रहा था कि अभी क्या हो रहा है और क्या होने वाला है चीकू मेरे पास खड़ी थी अब उसके पास थी मुझे उसका चेहरा दिखाई नहीं दिया क्योंकि उसका पेट दिख रहा था लेकिन दिखने में तो ठीक दिख रहा था चश्मे लगाए हुए थे उसने जलन तो होगी मुझे और होनी भी चाहिए और हुई थी मुझे।

वह लड़का का नाम देव था, देव नाम मैंने भी सुना था कहीं कुछ साल पहले खैर छोड़ो आगे की और फोकस करते हैं देव के पापा, चीकू की मम्मी से और पापा से भी कुछ कह रहे थे कि जल्दी हो जाना चाहिए क्योंकि वक्त का कोई भरोसा नहीं है, वहां सतयुग का भारत मिलाप हो रहा था।लोग इतना इमोशनल किए जा रहे थे कि अपनी बेटी के चाचा तो अपनी पत्नी को भी दे दे। फिर चीकू के पापा ने कहा चिंता मत कीजिए आप जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा। चीकू मुस्कुरा तो रही थी मगर क्यों मुस्कुरा रही थी उस, मुस्कुराना नहीं था। 

चीकू के आंखों में कुछ चला गया था शायद उसने दुपट्टे के पल्लू से अपनी आंखों को साफ करने लगी। फिर सब अंदर आए मिठाई मिठाई खिलाने लगे अब संबंधी जो बनने वाले थे। आप लोग को लग रहा होगा कि मुझे कुछ समझ में आ रहा है कि नहीं, अरे क्यों नहीं आएगा इतना क्लीयरली तो बात हो रहा है चीकू के पापा जोर जोर से चिल्ला रहे थे दामाद जी को लड्डू खिलाओ दामाजी के लड्डू खिलाओ तुम मुझे पता चलेगा ही ना किसी के पापा उसे अपना दामाद बनाना चाहते हैं और मैं यहां बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बना रहा हूं। अरे मारो मुझको मार दो क्या करूं जी के क्रेडिट कार्ड में क्रेडिट नहीं है और डेबिट में क्रेडिट हो गया है।

अब सब एक दूसरे को लड्डू खिला चुके थे मैं उन्हें दूर से देख रहा था करीबन 4 मीटर की दूरी से उतना मेरे लिए युग के बराबर था। चीकू के पापा आए लड्डू मेरे मुंह में ठूंस दिए और मुझे कहने लगे बधाई हो, आज बेटी की शादी तय हुई हैं। मैं मन ही मन सोच रहा था मैं क्यों बधाई मना मेरी बेटी की शादी थोड़ी फिक्स हुई हैं। लेकिन मन की बात बाहर आ ही चुकी थी की चीकू ने मुझे रोक लिया और कहा चलो हमें एक बुक स्टॉल पर जाना है, कह के हम दोनों वहां से निकल गए मैं स्कूटी चला रहा था वह मेरे पीछे बैठे थे धीरे-धीरे वह मेरे करीब आ रही थी जिंदगी में नहीं स्कूटी के पीछे सीट में पानी जम गया था तो ओ मेरे पास फिसल के आ रही थी। 

फिर हम एक अकेले शांत भरी जगह के पास जाकर मैंने उसकी तरफ देखा उसने अपनी आंखें झुका दी थी, मेरी आंखों की एक कशिश देखकर मैं समझ चुका था कि उसके दिल में भी कुछ है तभी तो मुझे वहां से यहां ले आए। चीकू ने सॉरी कहा और उसने कहा कि उसे पता नहीं था और उसने कहा कि उसे पता नहीं था। की ओ लोग लखनऊ से आने वाले हैं। चीकू ने कहा तुमको हजीब लग रहा था इसमें मैंने तुमको यहां ले आई, मैंने भी थोड़ा ताओ से और गुस्से में पूछा आज मुझे बहुत बुरा लगा मेरे दिल को ठेस पहुंची।

लेकिन लेकिन यह क्या उसको पता ही नहीं कि मैं गुस्सा क्यों और बुरा क्यों लग रहा है और उसे यह भी नहीं पता। कि मैं उससे प्यार करता हूं और मुझे आज सच में अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था। चीकू ने कहा उसकी शादी तय हो रही हैं। वैसे उसने कहा तुम वह मेरे बहुत अच्छे दोस्तों तुमने मेरी बहुत अच्छी मदद की हमने साथ वक्त बहुत अच्छा बिताया। कहकर वहां से चली गई, अब यह क्या मदद महीने की अच्छा वक्त मेरे साथ बिताए। और जा किसी और के साथ रही है ऐसा हरगिज़ नहीं हो सकता मैं कृष्ण जी की अनुमति से सौगंध खाता की मैं उसको यकीन दिलाना है कि मैं उससे कितना प्यार करता हूं। 

दो-तीन दिन से ना राहुल ने चीकू से बात किया और ना चीकू ने राहुल से फिर भी दोनों के बीच कुछ कनेक्शन था। राहुल मिलना नहीं चाह रहा था और चीकू मिल नहीं पा रही थी, हम सब इंगेजमेंट के लिए मडगांव जा रहे थे। हमारी और बैग की फैमिली। देव के साथ में मैं बैठी थी और देव ने मुझे कुछ दिखाया एक अंगूठी था और एक हॉलीडे टिकट प्लान था मलेशिया का मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैंने हां कह दिया। अब मुझे समझ में आ रहा था की अंगूठी की रिंग और मलेशिया ट्रिप मेरे जज्बातों को नहीं बदल सकती। क्योंकि इतने दिन हो गए हैं कभी उसने देव से ढंग से बात ही नहीं की और ना ही वह उसके बारे में जानती है क्योंकि चीकू तो राहुल के बारे में जानती है राहुल से बातें करती है राहुल की दोस्त है। ऐसा सोचते सोचते हैं रात हो गया सब वहां गेस्ट हाउस में पहुंच गया अपने अपने कमरे में सोने चले गए।

आधी रात को 1:00 बजे मडगांव में सेकंड फ्लोर पर बालकनी के ऊपर नीचे पाइप से चड़के मुंह में मोबाइल का टॉर्च रखें ऊपर चढ़ रहा था। राहुल बालकनी में पहुंच चुका था अंदर चीकू सो रही थी, मेरे मुंह से मोबाइल छोटा नीचे जमीन पर गिरा। चीकू चिल्लाई गेस्ट हाउस का मैनेजर वहां आकर देखने लगा, राहुल ने कहा कि मैं हूं मुझे अंदर आने दो मुझे तुमसे कुछ बातें करनी है, चीकू बालकनी का दरवाजा खोलती है उसको अंदर बुलाती है बाहर मैनेजर पूछता है कि कोई परेशानी तो नहीं, चीकू ने जवाब दिया नहीं ऐसे ही प्यास लगी थी।

चीकू गुस्सा सुंदर जाती है राहुल को गुस्से से डाटा लगती है और उसके इन हरकतों पर उनको बहुत सुनाती है और पहली बार ना जाने क्यों उसने मुझसे आप करके बात की कि आपको यहां आना नहीं चाहिए था, कोई देख लेता तो अभी मेरी शादी होने वाली है घरवाले क्या सोचते, राहुल ने कहा यह तुमने मुझे आप देना कब से शुरू कर दिया तुम तो मुझे कहती थी कि तुम कहने से दोस्ती बरकरार रहती है, तुम को हो क्या गया बताओ कि मुझे, "गुस्से से मैंने पूछा" चीकू ने धीमी आवाज आवाज में कुछ कहा। तुम कहने से सिर्फ दोस्ती बरकरार रहती है और आप कहने से जिंदगी बन जाती है यह तुम नहीं समझोगे। 

राहुल कहता है अगर मैं नहीं समझता तो यहां आता नहीं आया हूं तो तुमसे सच सुन कर जाऊंगा, फिर कोई कमरा नॉक करता है, और क्योंकि मम्मी बाहर चिल्लाती है कि सब ठीक है ना बेटा कोई दिक्कत तो नहीं है आइसक्रीम खाना है तुझे वेनेला वाला भी है, और चॉकलेट भी है, राहुल मन ही मन सोच रहा कि इनको आधी रात को आइसक्रीम खानी चॉकलेट यह क्या नशा। तुम्हारी मम्मी को नशा करती है क्या मैंने कहा, अब चीकू ने मुझे जाने को कहा था, अब जाने को सच में कहा था, मतलब गुस्से में कहा था उसने अपने पैर से मेरे प्यार को रोंग दिया था मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था फिर मैं जाने लगा तो नीचे फर्श से फिसल के मैं उसके ऊपर गिरा । मैंने उसके बाल को उसकी आंखों से हटाया। और उसे कहने लगा। देव जितनी भी कोशिश कर ले मुझसे मेरी चीकू को छीन नहीं सकता कहता है और वहां से चला जाता है। 

चीकू बालकनी में खड़े होकर राहुल को रास्ते पर जाते हुए देख रही थी और राहुल होंठो से कोई मधुर सी धुन बजा रहा था शायद यह हमारी प्यार की जीत की पहली निशानी हो सकती है, मुझे भी तुमसे प्यार है चीकू को ऐसा लगता था लेकिन कह नहीं पाई, कुछ कदम हम उठा नहीं पाते, कुछ रिश्तो को हम बदनाम नहीं कर पाते क्योंकि कभी-कभी जिंदगी के कुछ फैसले दूसरों के हक से भी लेना चाहिए नहीं तो रिश्ते बदनाम होने में देर नहीं लगती ऐसा चीकू सोचने लगी क्योंकि राधा ने भी कृष्ण से प्यार किया था पर रिश्तो को बदनाम नहीं होने दिया, राधा ने किसी और से शादी कर लो और कृष्ण वृंदावन छोड़कर चलेंगे, कुछ त्याग हमारे जिंदगी में बदलाव लाते हैं और नई सीख के साथ हम अपनी जिंदगी की शुरुआत करते हैं। क्या पता हमारी जिंदगी में कहीं ऐसा मोड़ ना आ जाए, की रिश्तो और प्यार में रिश्ते निभाने ना पड़ जाए। बस इतनी सी थी यह कहानी !


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