अपना कौन(फिर भी मै पराई हूँ)
अपना कौन(फिर भी मै पराई हूँ)
दिव्या अपनी भाभी के साथ रसोईघर में बतियाती हुई काम में उनका हाथ बटा रही थी तभी उसकी माँ गीता आई और बोली "अरे बहू इस बेचारी से क्यों काम करवा रही है ये तो पराई है दो-चार दिन को आई है।"
बहू स्वाति कुछ कहे इससे पहले ही दिव्या बोली"मां भाभी मुझे कहाँ कुछ करने देती है वो तो मैं ही जबरदस्ती सब्जी काटने लगी थी और इस तरह इनसे बात भी हो रही थी चलो कट गई सब्जी।"
दोनों मां -बेटी ड्राइंग रूम में आकर बैठ गई।गीता बोली"आजकल मेरे सिर में बहुत दर्द रहता है तू आई है तो अपन डॉक्टर को दिखा आते है।"
दिव्या बोली"मैं आई हूँ से क्या मतलब है मां आप भाभी को लेकर चली जाती जब तकलीफ थी तो।"
गीता बोली"अरे वह पराये घर से आई लड़की मेरा दर्द क्या समझे तू मेरी अपनी बेटी है तू ही चल।"
तभी वहीं बैठे गीता के पति नीलेश मुस्कुराते हुए बोले"चली जाना डॉक्टर के पास पहले ये तो डिसाइड कर लो कि तुम्हारा अपना कौन है और परा या कौन?"
