अंतिम समय में सही फैसला
अंतिम समय में सही फैसला
रोहन और सोनिया ने मां-बाप की इच्छा के विरुद्ध जाकर के शादी करी थी।इससे मां-बाप काफी नाराज थे। और उन्होंने घर रोहन को घर से बेदखल कर दिया था।
रोहन सोनिया रोहन की मम्मी जया जी के साथ रहने लगे। एक समय की बात है दोनों आराम से मस्ती से बातें कर रहे थे। बातें करते करते एकदम से सोनिया के सिर में जोर से दर्द होने लगा।दर्द काफी ज्यादा था वह सिर दर्द से तड़पने लगी। जया जी काफी हिम्मत वाली महिला थी। ऐसे जल्दी से घबरा नहीं जाती थी। मगर आज तो बेटी का दर्द देख कर काफी घबरा गई। रोहन तो एकदम रो ही पड़ा। अब क्या करें मां कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
जया जी ने अपनी घबराहट उसको नहीं दिखाई और बोला इसको कार में डालो, और हॉस्पिटल चलो। वह लोग सिटी हॉस्पिटल पहुंचे डॉक्टर ने चेक करके सारे टेस्ट वगैरह करवाए। MRI. करवाया और बोला इसको तो ब्रेन ट्यूमर है। जो काफी बढ़ गया है। हम कोशिश कर सकते हैं कि ऑपरेशन के बाद में ट्यूमर निकाला जाए। मगर 90,10 की गारंटी है। मतलब 90 परसेंट तो केस गया हुआ ही है। 10 परसेंट कोई चमत्कार हो जाए तो ट्यूमर अच्छी तरह निकल जाए तो हो सकता है। हम थोड़ी आशा रख सकते हैं कि यह ठीक हो जाए। मगर ट्यूमर काफी बड़ा है। जया जी ने रोहन के ऊपर छोड़ा कि वह क्या चाहता है। उसने बोला 10 परसेंट की आशा है तो भी आप ऑपरेशन कर दो। इधर सोनिया को लग रहा था कि उसकी जान अब नहीं बचेगी मगर उसने हिम्मत नहीं हारी उसने अपने मां और पति रोहन को बोला मैं ऑपरेशन करवाने को एक शर्त पर तैयार हूं, अगर मैं ठीक हो गई तो तो अच्छी बात है।
मगर अगर मुझे कुछ हो जाता तो आप मुझसे वादा करो कि मेरे शरीर के अंग आंख और किडनी सब डोनेट कर दोगे। पहले तो मानने को तैयार नहीं हुआ रोहन। क्योंकि वह तो सोच ही नहीं सकता था कि उसकी प्यारी सोनिया इतनी जल्दी उसका साथ छोड़ जाएगी। मगर जब सोनिया ने कसम दिलाई अपने प्यार की तो उसने हां भर दी दुखी मन से। उसको पूरी आशा थी की ऑपरेशन से सब ठीक हो जाएगा। बहुत कहने पर डॉक्टर ने ऑपरेशन करना स्वीकार किया।
ऑपरेशन थिएटर में लेकर गए सोनिया की तबीयत बिगड़ती जा रही थी। तो भी ऑपरेशन की तैयारी कर ली थी। रोहन बाहर ऑपरेशन की लाल लाइट देखकर ज्यादा समय बीत रहा था तो परेशान परेशान होकर रोए जा रहा था। जयाबेन उसको संभाल रही थी।
तभी उनके दिमाग में आया अगर बेटी को कुछ हो जाता है तो मैं खुद भी टूट जाऊंगी, तो इसको कैसे संभालूंगी। उनके दिमाग में आता है मुझे हिम्मत तो रखनी चाहिए। और रोहन के पिता को फोन कर देती है। वे भी इतने कठोर दिल नहीं होते हैं कि बहू की बीमारी का सीरियस का सुन कर ना आवे।
दौड़े-दौड़े मां-बाप दोनों आते हैं। बेटे की हालत देखते हैं उसको संभालते हैं ।सांत्वना देते हैं की बहू को कुछ नहीं होगा। मगर दिल में तो सब जानते हैं कि बहुत सीरियस है, कुछ भी हो सकता है। 3 घंटे तक ऑपरेशन चलने के बाद भी जब कोई बाहर नहीं आता तो मन में थोड़ा खटका लगता है।
तभी एक नर्स बाहर निकलती है और वह बताती है कि सोनिया जी नहीं रही। सभी जोर जोर से रोने लगते हैं ।
तभी रोहन बोलता है जल्दी से डॉक्टरसाहब को बुलाओ मुझे बात करनी है ।और डॉक्टर को बुला कर सोनिया की अंतिम इच्छा के बारे में बताता है। सारी फॉर्मेलिटी पूरी करके उसकी आंखें और किडनी डोनेट कर देते हैं। दो जनों को आंखें देते हैं, और दो जनों को किडनी इस तरह से सोनिया जाते-जाते भी चार जनों को जीवनदान दी गई। दोनों आंखों की रोशनी दे गई ,और 2 को जिंदगी दे गई और रोहन पापा मम्मी जया देवी को इसी बात का सुकून था की जाते-जाते भी सोनिया आप बहुत अच्छा काम कर गयी। मन में दुख तो बहुत था। फिर अपने मन को समझाया उन्होंने कि शायद इतना ही साथ था भगवान को यही मंजूर था। मगर जाते-जाते भी सद्बुद्धि से अच्छा कर गई। भगवान सबको ऐसी सद्बुद्धि दे और प्रिय जनों को अंतिम इच्छा को पूर्ण करने की शक्ति दे। नहीं तो उसने तो बोला था मगर रोहन अगर नहीं चाहता तो कुछ नहीं हो सकता था।
उसके पिता रोहन को गले लगा लेते हैं। और बहुत आशीर्वाद देते हुए बोलते हैं बेटा तुमने बहुत अच्छा काम किया। अब तुझे अकेले रहने की जरूरत नहीं है घर चलो और जया जी को भी अपने साथ घर लेकर जाते हैं । पूरे सम्मान के साथ सोनिया का अंतिम संस्कार किया जाता है ।
भले वह दुनिया से चली गई मगर अपने अच्छे कामों के कारण लोगों के दिलों में जिंदा रही।
