Priya Kanaujia

Fantasy


5.0  

Priya Kanaujia

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अनोखी खुशी

अनोखी खुशी

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आज पूनम की रात थी और पियू जंगल के रास्ते से घर जा रही थी। चाँद अपने पूरे उफान पर था लेकिन पियू डरी हुई थी क्योंकि उसने सुना था कि उस जंगल में एक जीव रहता है जो पूनम के चाँद में दिखाई पड़ता है। पियू ये सब सोच ही रही थी कि एक आवाज़ से उसका ध्यान टूटा।वो देखने के लिये आगे बढ़ी तो उसका पैर फिसला और वो खाई में जा गिरी।

उसने ज़ोर से चीख कर अपनी आँखें बंद कर ली लेकिन उसने महसूस किया कि वो किसी की बाहों में है। उसने चाँद की रौशनी में उस चाँद से चेहरे को देखा, उसकी बड़ी-बड़ी आँखें किसी गहरे राज़ की निशानी लग रहीं थीं। पता नहीं क्यों लेकिन पियू बहुत अच्छा और सुरक्षित महसूस कर रही थी। पियू ने उस अजनबी का शुक्रिया अदा किया और पूछा कि उसका नाम क्या है और वो जंगल में क्या कर रहा। उसने पियू की बात को अनसुना कर उसे जंगल के बाहर छोड़कर खुद वापस जंगल चला गया।

पियू आज बहुत खुश थी क्योंकि ऐसी अनोखी खुशी उसे पहली बार मिली थी। पियू को बचपन से माँ, बाप, भाई, बहन किसी का प्यार नहीं मिला था। कुछ दिन बाद उसने एक रात उस अजनबी को उसी जंगल के आस-पास देखा तो वो उसके बारे में जानने को और उत्सुक हो गई। काफी शोध के बाद उसे जो मिला उससे उसे एक बड़ा झटका लगा, जिस अजनबी से वो प्यार करने लगी थी वो वहीं जीव था जिसके बारे में उसने लोगों से सुन रखा था। अगले पूनम की रात वो फिर से अपने चाँद को देखने चली गयी। इस बार वो अजनबी पहले से ही उसके सामने खड़ा था, उसने पियू को अपनी असलियत दिखाई और पूछा कि क्या वो अब भी उससे प्यार करती है। पियू ने बोला उसके पास खोने के लिये कुछ नहीं है और उसने उसके दयालु दिल से प्यार किया है न कि उसके चेहरे से और ये कहते हुए वह उसके गले लगकर रोने लगी। अब दोनों ने एक -दूसरे का हाथ थाम लिया और चाँद को निहारकर चल दिये अपनी अनोखी खुशी के रास्ते पर।


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