Priya Kanaujia

Inspirational


4.8  

Priya Kanaujia

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अपनी ही धुन में

अपनी ही धुन में

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सबको ख़ुशी होती है जब उसे वो चीज मिल जाती है जिसके लिए उसने दिन-रात मेहनत की हो। लवली का भी आज यहीं हाल था। लवली का बचपन से क्रिकेट टीम में शामिल होनें का सपना था और आज वह सपना पूरा हो गया था। लवली को अपना सपना पूरा करने के लिए कई लड़ाइयां लड़नी पड़ी। जब भी वह अपने घर में क्रिकेट खेलने की बात करती थी मानों घर में भूचाल आ जाता था। लवली एक कट्टरपंथी रुढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां पर क्रिकेट खेलना तो दूर लड़कियों के लिए स्कूल जाने तक की मनाही थी। लवली को स्कूल भेजने के लिए उसकी मां ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी थी घरवालों से तब जाकर लवली स्कूल जा पाई।

स्कूल में लड़कों को क्रिकेट खेलते हुए देखकर लवली का बहुत मन होता था खेलने का मगर जब भी वो लड़कों से अपने साथ खिलवाने के लिए बोलती थी तो सारे लड़के ये कहकर उसकी हंसी उड़ाते थे कि क्रिकेट लड़कियों के खेलनें की चीज नहीं है। लवली को इन बातों से जरा सी भी फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि वह जानती थी कि खेल किसी एक के लिए नहीं होता। लवली ने ठान लिया था कि उसे रुकना नहीं है और उसने अपने स्कूल में उन लड़कियों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया जिनमें क्रिकेट का जुनून था। अब वह रोज दोपहर की छुट्टी के समय अपनी टीम को प्रशिक्षण देने लगी। लवली अपनी पूरी जान लगा रही थी क्योंकि उसका सपना देश के लिए खेलनें का था।

लवली को अपनीं पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देना पड़ता था क्योंकि उसके पापा ने उस से यह शर्त रखी थी कि अगर इस साल हाईस्कूल में अच्छे नंबर नहीं आये तो उसकी शादी कर देंगे। एक दिन जब लवली अपनी टीम के साथ खेल रही थी तो वहां एक आदमी आया और उसने बोला कि मैं गेंदबाजी करता हूं और तुम मेरे साथ खेल कर दिखाओ। लवली ने उस आदमी की हर एक गेंद पर धड़ाधड़ चौके और छक्के लगाए। वह आदमी कोई और नहीं बल्कि भारतीय टीम के प्रशिद्ध कोच थे और उन्होंने लवली और उसकी टीम को भारतीय महिला क्रिकेट टीम में शामिल होनें का प्रस्ताव दिया। लवली के तो मानों पंख लग गए थे । उसने कोच से कहा कि उसकी परीक्षा तक रूक सकते हैं तो कोच ने हामी भर दी। लवली के अरमानों पर उस दिन पानी फिर गया जिस दिन उसके ताऊजी ने उसे क्रिकेट खेलते देख कर घर में हंगामा मचा दिया। शाम को घर में पंचायत हुई और ये फैसला हुआ कि लवली कल से स्कूल नहीं जायेंगी । लवली आज कुछ भी माननें के लिए तैयार नहीं थी।

उसने घरवालों से बोला आज मैं आपलोगों से करुंगी 'सीधी बात' , मेरी एक शर्त है कि आप लोग एक बार मेरा क्रिकेट का मैच देख लीजिए और अगर मुझसे कोई भी गलती हो गई खेल के दौरान तो मैं सबकुछ छोड़कर आप लोगों का कहा मान लूंगी। उसके इस फैसले में उसकी मां ने उसका पूरा साथ दिया । सबने उसे खुद को साबित करने का एक मौका देना उचित समझा और लवली की टीम का मुकाबला लड़कों की टीम के साथ रखा गया। लवली और उसकी टीम की आज अग्नि परीक्षा थी मगर वह खुश थी कि किस्मत ने उसे खुद को साबित करने का एक मौका दिया और फिर उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी मां उसके साथ थी। लवली ने अपनी टीम से कहा कि आज हमें सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि हर उस लड़की के लिए खेलना है जिसके पैरों में आड़म्बर की बेड़ियां हैं। सामने की टीम के लड़के लवली की टीम पर हंस रहे थे और लवली की टीम का मनोबल गिर रहा था मगर जैसे ही लवली ने रन बटोरने शुरू किये सबकी बोलती बंद हो गई।

लवली ने चौके और छक्के जड़नें शुरू कर दिये थे और लवली की टीम ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। आखिर में जब लवली की टीम विजेता बनी तो लवली के पापा का सीना गर्व से चौड़ा हो गया । उन्होंने लवली को गले से लगा लिया और बोले बेटा तेरी सीधी बात तो आज कमाल कर गयी , आज से तुम्हें जो अच्छा लगे वो करो। कुछ दिन बाद लवली का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ और उसने बहुत अच्छे नंबरों से परीक्षा उत्तीर्ण की थी। अब लवली के पापा खुद उसे कोच के पास लेकर गये और उसे देश के लिए खेलने की बधाई दी । यहीं से शुरू हो गई लवली के सपनों की उड़ान। आज लवली को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के कारण भारतीय महिला क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया है और यहीं वो वजह है कि आज उसका मन खुशी से झूम उठा है। लवली मन ही मन सोचने लगी कि एक सीधी बात कितना कुछ बदलाव ला देती है ज़िन्दगी में।


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