बारिश की सीख
बारिश की सीख


'बारिश' ये शब्द सुनते ही मन खुशी से झूम उठता है। कोई बारिश में मयूर बनकर नाचने लगता है तो कोई चाय की चुस्कियों के साथ पकौड़े तलाशता है लेकिन कोई ऐसा भी होता है जिसे कोई फर्क नही पड़ता इन सबसे। एक लड़की 'शालिनी' जो कभी बहुत ही हँसमुख हुआ करती थी आजकल हँसना भूल गयी थी। कहने को तो बहुत समझदार है, हमेशा दूसरों का भला करती रहती है लेकिन उसके बुरे वक्त में उसका साथ किसी ने न दिया। उसने हमेशा खून के रिश्तों के साथ-2 दिल के रिश्ते भी निभाये। उस रात शालिनी सोच रही थी कि उसका साथ सब क्यों छोड़ देतें हैं, तभी अचानक एक आवाज से उसका ध्यान टूटा। उसने कमरे से बाहर झाँककर देखा तो भारी बारिश हो रही थी।
उसका मन आज कुछ ज्यादा ही उदास था। उसने ठान लिया था कि वो आज खुद को खत्म कर लेगी लेकिन पता नहीं क्यों उसका मन हुआ कि आखिरी बार अपने दोस्त से बात कर लूँ। उसने फोन उठाया और दोस्त को मैसेज किया और बोली कि मैं हमेशा के लिये जा रही हूँ। दोस्त को लगा मजाक कर रही है तो उसने बोल दिया जा। बड़ी देर बाद दोस्त को समझ आया कि शालिनी क्या कहने की कोशिश कर रही थी। उसने शालिनी को बहुत सारे मैसेज किये लेकिन तब तक शालिनी अपनी कोशिश कर चुकी थी।
बाहर तूफानी बारिश हो रही थी और शालिनी के मन में दर्द का सैलाब उठ रहा था। अपने दोस्त के मैसेज देखते-2 वो बेहोश हो गयी लेकिन थोड़ी देर बाद एक चमत्कार हुआ, शालिनी को एकदम से होश आया और उसे उल्टियाँ होने लगी जिससे उसके द्वारा खाया गया विशैला पदार्थ शरीर से बाहर निकल गया। वो वापस से बेहोश हो गयी और दूसरे दिन दोपहर बाद उसकी आँख खुली लेकिन उसके घरवालों को उसकी जरा सी भी सुध न हुई लेकिन शालिनी को आज इस बात की सीख मिल गयी थी कि मरना मुश्किलों का हल नहीं है। उसे समझ आ गया था कि भारी बारिश के बाद सतरंगी इन्द्रधनुश अवश्य निकलता है। उसने ठान लिया कि अब वो खुद के लिये जियेगी, उसने फोन उठाया और अपने दोस्त को मैसेज किया कि अब वो बिल्कुल ठीक है।