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डाॅ.मधु कश्यप

Drama

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डाॅ.मधु कश्यप

Drama

अनोखा रिश्ता

अनोखा रिश्ता

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" पॉपकॉर्न कितने का दिया भाई ?"

 "पाँच रुपए पैकेट साहब ।"

"दो दे दो फिर ।"

"अभी दिया साहब ।"

"कुछ और भी करते हो या इसी से गुजारा हो जाता है ?"

"इसी से हो जाता है साहब और कुछ कर भी नहीं सकता।"

" क्यों ?"

"इतनी ठंड में इतने पैसे भी नहीं है कि गर्म स्वेटर ले लूँ। चौबीसों घंटे आग साथ रहता हूँ तो ठंड का एहसास भी नहीं होता।"

" मतलब.. मैं नहीं समझा ।"

"अरे साहब !इस मकई के दानों को जब कड़ाही में भूनकर पॉपकॉर्न बनाता हूँ तो दिन भर यही रहूँगा ना ।इस तरह मैं इन दानों को गर्म कर कमाता हूँ और यह आग मुझे गर्म कर स्वेटर की जरूरत महसूस नहीं होने देती।" मैं अवाक सा खड़ा उसका जवाब सुनकर दंग रह गया।


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