अनकहे ये रिश्ते
अनकहे ये रिश्ते
इंजीनियर के पद पर कार्यरत सोनल सोसायटी के पार्क की बैंच पर बैठी हुई बच्चों को खेलते हुए देख रही थी। दुर्गा पार्क में घुसी तो सामने सोनल बैठी दिखाई दी।वह भी उस और चलदी
सोनल क्या बात है तुम कुछ उदास लग रही हो ?
हाँ ! दुर्गा काम का बोझ अधिक होने से सीसीटीवी चैक नहीं कर पाई रात में ही समय मिलते ही फुटेज चेक किया तो मेरी बच्ची को नौकरानी पीटती हुई दिखाई दी।मेरे होश उड़ गए निकाल दिया उसे।
लेकिन बेबी को रखने की समस्या वहीं की वहीं
दुर्गा तुम्हें तो पता है हम दोनों में से किसी के भी पेरेंट जीवित नहीं है। बच्ची को संस्कारित देखना चाहती हूँ।
दुर्गा क्या एक दादी कहीं से गोद मिल सकती है।
सोनल तुम चाहो तो वृद्धाश्रम चलो वहां की संचालिका मेरी परिचित हैं।
ठीक है मैं घर में कुनाल को फोन पर बता देती हूँ
हेलो कुनाल !
तुम बेबी का ध्यान रखना में दुर्गा के साथ वृद्धाश्रम जा रही हूं लौटने पर विस्तार से बताती हूं। सोनल पार्क से निकल कर दुर्गा की गाड़ी में बैठ गई। दुर्गा ने गाड़ी स्टार्ट की और दोनों वृद्धाश्रम की ओर चल दी।
वहां पहुंच कर गाड़ी पार्किंग में खड़ी कर दोनों आफिस में पहुँची। संचालिका ने कहा आईये दुर्गा मेडम बैठिए और बताएं मुझसे क्या काम है।
सोनल एक वृद्धा को एडाप्ट करना चाहती हैं।
क्या ये संभव है ?
हां जरुर एडाप्ट कर सकती है।
नीलू ने रूपल को भेज कर अंदर से एक वृद्धा को बुलाया और सोनल से मिलवाया।
माँजी आप मेरे बच्चे की दादी बनेगी।
वृद्धा की आँखों में आंसू आ गए गला रुध गया बेटी तुम ने मेरे मानसिक और शारीरिक कष्टों का समाधान कर दिया।
