अंजू , चाय दो न
अंजू , चाय दो न
मैं वहां किराये पे रहता था । एक दो-मंजिला मकान , मैं नीचे के माले में रहता था , ऊपर में वो रहते थे अपने परिवार के साथ । कुछ दिनों से उनका तबियत कुछ ठीक नहीं थी । उनका छोटा बेटा रायपुर में नौकरी करता था , बड़ा बेटा बहू और नाती उनके साथ रहते थे । यही कोई तीन महीना पहले रायपुर में एम्स में दिखाने के बाद वो कुछ ठीक हो चुके थे , लेकिन पिसाब का समस्या उनका ठीक हो नहीं पा रहा था , कभी कभी बाथ रुम जाते जाते कपड़े में पिसाब हो जाता था । उनकी पत्नी बहुत खयाल रखती थी उनका । अक्सर रात को बिस्तर गीला कर देते थे । उनकी पत्नी चिढ़ती तो थी मगर सेवा भी बहुत करती थी । कभी कभी मैं उनका हाल चाल पूछने पहुंच जाता । मेरे पहुंचते ही वो आवाज लगाते अंजू ! चाय बनाओ न , दीक्षित भैया आये हैं । कुछ ही देर में भाभी चाय बना कर ला देती थी । चाय पीते पीते इधर उधर की बातें होती । एक दिन में उनको सुझाव दिया कि रात में अलार्म लगाके अगर दो तीन बार बाथरुम हो आते शायद बिस्तर गीला होने का नौबत नहीं आएगा । इस बात पर अमल करने से उनका वह समस्या कुछ तो कम हुई मगर एक और समस्या पैदा हो गयी । रात को जब जब पिसाब करने के लिए उठते तब तब उनका चाय की फरमाइश से भाभी परेशान होने लगी । बाथ रूम से आते ही सोफा में बैठ कर चाय की फरमाइश करते हुए बोलेंगे अंजू ! चाय दो ना , और भाभी मना करेगी । थोड़े ही देर में वो भी शो जाते और एक अलार्म तक । उस दिन भी ऐसे हुआ । सुबह के पांच बजे होंगे वो बाथरूम गए , आते ही सोफे पर बैठ गए और बोले अंजू , चाय दो ना । भाभी बिस्तर पर शोते शोते बोली रुको ना , अभी तो पांच ही बजे हैं , थोड़े देर बाद बनाती हूँ । इतना बोल कर और थोड़ी देर शोने की कोशिश किए मगर नींद नहीं पड़ी तो उठ कर चाय बनाने चल दिए । कप में चाय ले कर आये और बोले लो चाय पी लो , मैं नहाने जाती हूँ । लेकिन कुछ प्रतिक्रिया नहीं आई उनके तरफ से तो लगा शायद सोफे में बैठे बैठे शो गए हैं । उठाने के लिये थोड़ा सा हिला दिए तो उनका होश उड़ गया , हल्के से लुढ़क गए वो सोफ़े में ही , लेकिं देख रहे थे एकटक अपनी पत्नी अंजू की तरफ । चाय का कप हाथ से छूट कर बिखर गया । आनन फानन में डॉक्टर के पास ले गए । डॉक्टर कोशिश करते रहे , मगर उनकी मर्जी के आगे इनकी चलती कहाँ ? एक घंटा पहले जो चाय मांग रहै थे वो बिन पिए चलदिए । .........अब भी रात को पांच बजते ही उनकी नींद खुल जाती , सोचती बिस्तर में पड़े पड़े ; काश कोई बोलता अंजू ! चाय दो न .....
