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Archna Goyal

Drama

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Archna Goyal

Drama

अजंता हस्पताल

अजंता हस्पताल

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      रायपुर से दादी आने वाली है , मुझे जल्दी से स्टेशन जाना होगा उनको लेने,वरना दादी गुस्सा हो जाएगी लेट होने पर। उनको इंतजार पसंद नही है और अशोक को मालुम हुआ कि मैं लेट पहुँची तो दादी के साथ सारा घर सर पर उठा लेगे वो भी ।घड़ी की ओर देख कोमल जल्दी जल्दी हाथ पैर चलाने लगी

मैं स्टेशन से दादी को लेकर आई फिर चाय नास्ता दिया । फिर हम दोनो ने मिल कर ढ़ेर सारी बात की 

     बातो बातो में दादी ने बताया वो यहाँ अपना चेकअप भी करवाएँगी। तब मैने बताया उनको कि कैसे कैसे इस हस्पताल में ये घटना घटी जिसमें वो हमेंशा से जाती आई है

कभी शहर के बड़े और अच्छे हस्पतालो मे गिने जाने वाला अजंता सिटी हस्पताल ( काल्पनिक नाम) आज खणडर सा हो चुका है । कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हस्पताल में 24 बच्चो की मौत हो गई । आक्सीजन की आपूर्ति के कारण । वहाँ के जो कर्मचारी को इस काम का जिम्मा दिया था , उसने पैसो का घोटाला किया , समय पर जहाँ से आक्सीजन सैलेंडर आते थे, उस कंम्पनी को समय पर पेमेंट नहीं करी गई तो कंम्पनी ने माल भी सप्लाई नही किया और हस्पताल में आक्सीजन की कमी हुई और जिन जिन मरीज को इसकी जरुरत थी , इसके न मिलने पर मौत की चपेट में आ गए ।

  इसमें बच्चो की संख्या जादा थी। प्रशासन में अफरा तफरी मच गई । पुलिस केस हुआ मुकदमा चला । पर जो नुकसान जान का हुआ वो नही पुरा हो सकता था। डाक्टर्स और कुछ कर्मचारी जेल में है । लेकिन हस्पताल तो बंद हो चुका है ,अब कोई नहीं जा के झाकँता है । खण्डर सा लगता है वो ।

  अब तो उस हस्पताल के आगे से भी गुजरो तो ऐसा लगता है जैसे बच्चो की रूहों आवाज लगा रही हो , क्या कसुर था हमारा क्या बिगाड़ा था हमने जो हमें ये सजा मिली ।

खैर वर्षो बाद भी वहाँ कोई नही आकर संभालता हैं।

    काश अब कभी ऐसा ना हो किसी भी हस्पतालो में ।ना तो मरीजो का तो विश्वाश ही उठ जाएगा हस्पतालो पर से ।

   हाँ बहू तू ठीक कह रही है फिर कभी ऐसा ना हो। मैं तो ये सोच कर आई थी कि इसी हस्पताल में ही वर्षो से इलाज करवाते आए है तो अब भी यही करवाऊँगी। अब मै तो बुढ़ी हो चली हूँ , मुझे कहाँ दिन दुनिया की खबर है। और घर पर भी बच्चो ने ऐसा कोई ज़िक्र नहीं किया था , वैसे भी मैं उन्हे ये बता कर नहीं आई थी कि मैं डागडर के भी जाऊँगी

हाँ दादी जी अब ये हस्पताल पुरी तरह से खत्म हो गया है । कुछ दिनो में नामोनिशान भी मिट जाएगा।

इतने बच्चो की एक साथ मौत की सुन कर दादी को भी बहुत दुख हुआ।



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