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Akanksha Gupta (Vedantika)

Tragedy


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Akanksha Gupta (Vedantika)

Tragedy


अगर ऐसा होता तो

अगर ऐसा होता तो

1 min 138 1 min 138

पटरी पर रुकती हुई ट्रेन से उतर कर देवदास पार्वती के घर के सामने तो पहुंच जाता है लेकिन चंद्रमुखी का निस्वार्थ प्रेम उसके कदम वहीं रोक लेता है। अपनी जेब से वो अधूरी माला और अधूरे पत्र निकाल गुलमोहर के पेड़ के नीचे रख वापस चल देता है चंद्रमुखी को समाज में उसका स्थान देने के लिए और पार्वती के प्रेम को सम्मान देने के लिए।


लेकिन क्या वाकई ऐसा होता अगर देवदास उस गुलमोहर के वृक्ष के नीचे पार्वती को आखिरी बार देखने की ख़्वाहिश को लिए यूँ ही नहीं मर जाता और पार्वती दरवाजा बंद होने से पहले ही उस तक पहुंच कर उसे जीने की उम्मीद दे देती?


नही, शायद कभी नहीं.....


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