अधूरा इश्क 2
अधूरा इश्क 2
पार्थ और अदा दोनों फ्रेश हो रेडी हो चुके थे पार्थ अपने कमरे से बाहर आया तो उसने देखा कि अदा अभी अपने कमरे में है और हेयर ड्रायर से बाल सुखा रही हैं वह बिना नॉक किए अंदर गया और उस उसको पीछे से हग कर लिया।
पार्थ की गरम सांसें अदा की बैचेनी बढ़ा रही थी।
"क्या कर रहे हो?", अदा ने कहा। "इतने दिनो में एक बार भी तुमने.....।"
पार्थ ने इतना कहा ही था कि पीछे से अनु आवाज लगाते हुए आई," दी रेडी हो गई आप।" उसकी आवाज सुनते ही पार्थ झट से पिछे हटा और अपना फ़ोन निकाल कर ड्रेसिंग टेबल के बगल में बेड पर बैठ गया।
अनु अंदर आई तो देखा की पार्थ भी है, "क्या जीजू, इतनी सुंदर लड़की सामने बैठी है, और आप फोन चला रहे।"
पार्थ मुस्कुरा दिया और मन मन खुद से बोला," मेरी सबसे खतरनाक शुभचिंतक!!" अदा ने अनु को डाटते हुए कहा,"बहुत बिगड़ गई है।"
"मैं सुधरी कब थी ?" अनु ने सोचते हुए कहा,"ये सब छोड़ो, आप दोनो नीचे चलो।"
अनु मटकते हुए वापिस नीचे चली गई,और इससे पहले पार्थ अदा के करीब जाता वो पहले ही उठ गई और नीचे चलने को बोली।
दोनो साथ नीचे आए तो अनु डाइनिंग टेबल पर खाना लगाते हुए बोली,"जीजू आप यही बैठो मैने आपके लिए कुछ बनाया है।"
पार्थ के बगल में अदा बैठी और बोली,"सारी खातिरदारी सिर्फ पार्थ के लिए होगी या मेरे लिए भी है कुछ।"
अनु ने अपना बाल झटकते हुए कहा," हा हा जीजू के लिए बना रहीं थी तो सोचा आपके लिए बना देती हुं।
अदा ने एक बोहे चढ़ा कर कहा," अच्छा जी,,,।"
"तुम्हे क्यू जलन हो रही है।, पार्थ ने भाव खाते हुए अपने कन्धे झाड़ते हुए कहा।
अदा ने पार्थ को पंच मार कर कहा," तुम चुप रहो, नही तो,,। "अनु ने पार्थ की साइड लेते हुए कहा,"आप मेरे जीजू को ऐसे नही मार सकती।"
अदा ने कहा,"तो कैसे मार सकती हूं,, बैट से या बेलन से।"
पार्थ ने कहा,"अगर तुमने मारा न मेरे को तो ,,,मैं ,,,।"
"क्या तो मैं ?" अदा ने कहा कि पार्थ ने उसे खुद के करीब कर उसके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा,"तो मैं सबके सामने तुम्हे किस कर दूंगा।"
अदा की आंखे फैल गई तो आंख दिखाते हुए कहा,"हा,,,इतनी हिम्मत ही नहीं हैं।"
पार्थ ने आस पास नजर घुमाई तो वहा सिर्फ अनु ही थी, पार्थ अदा के करीब गया और उसके चीक्स पर किस कर दिया।
अदा फटे आंख पार्थ को कभी अनु को देख रही थी।
अनु ने शरारत भरे मुस्कान के साथ कहा,"मैने कुछ नही देखा पिंकी प्रॉमिस।"
पार्थ ने अदा को आंख मार दी।
अनु कूदते हुए किचन ने जाते हुए बोली,"मैं अभी आई,,आप दोनो कंटिन्यू।"
अनु के जाते ही, अदा ने एक बार पार्थ को देखा और पूरे घर में नजर घुमाई तो साइड में लकड़ी का बैट दिखा जो अनु का था उसको क्रिकेट बहुत पसंद था, और आज भी वो अपने कॉलेज के फीमेल क्रिकेट टीम में है।
अदा उठी और पार्थ के पीछे बैट लेकर दौड़ पड़ी। " अरे सॉरी न,,,।", पार्थ ने भागते हुए कहा।
"रुका जा पार्थ के बच्चे आज तेरी खैर नहीं।"
"सॉरी सॉरी, मैं कोई बॉल थोड़ी हूं।"
"बॉल नहीं,, लेकीन फिर भी आज मैं चौका लगा कर रहूंगी।"
अनु ने शोर सुना तो किचन से बाहर आई,और नजारा देख कर उछलते चीयर करते हुए बोली," जीजू ,,,जीजू।" पार्थ ने बचते बचाते कहा,"अनु की बच्ची बचाएगी भी या मैच देखने आई है।"
"जी... जु।", अनु बोलने ही जा रही थी की पार्थ जो अदा के आगे था वो अचानक से पीछे मुड़ा जिससे वो उसके सीने से टकरा गई।
पार्थ ने एक हाथ से उसका बैट साइड में फेंका और उसके कमर को पकड़ते हुए बोला,"तो साली साहिबा क्या सजा दी जाए इनको?"
अदा बोलती की पार्थ ने उसके कमर पर पकड़ मजबूत कर ली और कान में बोला," अब बोलो।"
"म,, म मैं,, छोड़ो।", अदा ने कहना चाहा पर खुद को पार्थ के इतने करीब देख घबरा गई थी।
तभी मेन गेट पर नॉक हुआ, अदा मौका पाके भागी और बोली,"मैं देखती हु।"
अनु पार्थ दोनो हाई फाइव कर हस पड़े।
"जीजू - 1,दी - 0", अनु ने स्कोर जोड़ते हुए कहा।
"आह आह,,2", पार्थ ने गला साफ करते हुए कहा, तो अनु ने हस्ते हुए कहा,"हा 2 हिहिहिहिहि ।"
गेट पर अदा के पापा अजय जी खड़े थे, "पापा,,", अदा देखते ही उछल पड़ी और गले जा लगी।
अजय जी अदा को देख बहुत खुश हुए, पार्थ भी आगे गया और अजय जी के पैर छू लिए।
"पापा,, ये पार्थ,, म मैं,,मैने।", अदा ने थोड़ा शरमाते हुए कहा।
अजय जी ने नजर भर पार्थ को देखा, और बोले,"हम्म्म,,।" पार्थ का दिल घबराहट के मारे मानो बाहर ही कूदने वाला था।
"कैसे हो बेटा।", अजय जी ने थोड़ा सा मुस्कुराते हुए कहा।
"म म में,,मैं।", वो बोलने की पुरी ताकत लगा रहा था, "बकरा जैसा।", अदा ने कहा तो अजय जी हसी दबा लिए लेकिन अनु और अदा उसकी हालत देख हस पड़े।
"चलो आओ बैठो।", अजय जी दोनो को बैठने का इशारा किए और खुद हाथ धोने चले गए।
पार्थ अभी अपने सीने पर हाथ रखे लंबी लंबी सांसे भर रहा था, "ये लड़की के पापा लोग माफिया जैसे क्यूं होते है।",मन ही मन में बुदबुदाया।
आरती जी और अनु दोनो ने मिलकर डाइनिंग पर खाना लगाया, तब तक अजय जी भी आ चूक थे। खाना खाते हुए अजय जी और पार्थ में कुछ औपचारिक बातें हुई। ये वो अच्छे से जानते थे की पार्थ एक अच्छा लड़का है फिर भी एक बाप होने के तौर पर उन्होंने खुद को सख्त रखा।
"तुम अदा के अतीत के बारे में तो जानते होगे!?",अजय जी ने सीधे तौर से कहा।
"जी, हम किसी के अतीत से उसको परख नही सकते, अदा एक समझदार लड़की है, जो सही और गलत को अच्छे से जानती है, उसका ।", पार्थ ने सहजता से कहा।
अदा ने पार्थ के आंखो में देखा उसके जहन में तो बस एक हि बात घूम रही थी ,"कोई इतना अच्छा कैसे हो सकता है!"
बातों बातों में सबने अपना खाना खत्म किया।
अजय जी अपने कमरे में बैठे थे, थोड़ी देर बाद आरती जी आई और उनके बगल में बैठी वो जानती थी की वो क्या सोच रहे है।
"अदा पार्थ के बारे में सोच रहे?", आरती जी न धीरे से कहा।
"हम्म,,पार्थ एक अच्छा होनहार लड़का है, और उसके जैसे लड़के आजकल कहीं नहीं मिलेंगे, लेकिन अच्छा तो समर भी था!", अजय जी के माथे पर चिंता की लकीरें साफ साफ दिख रही थी।
"आपकी चिंता जायज है, लेकिन आपने देखा न अदा के चेहरे की खुशी, पार्थ ने उसे इन चार सालों मे उसके अतीत से बिलकुल बाहर निकाल दिया हैं।",आरती जी बोली।
"जानता हु, अदा के बताने के बाद मैने पार्थ के बारे में पता लगाया वो अच्छा है,,लेकिन।"अजय जी ने कहा।
"जानती हु बाप हो इसीलिए चिंता तो लगी रहेगी। लेकिन बच्चों की खुशी मे हमारी खुशी है।", आरती जी बोली।
"हम्मम और अदा पर मुझे पुरा भरोसा है।", अजय जी बोले इस बार उनका मन हल्का हो गया।
अदा का अपने कमरे में मन नहीं लग रहा तो पार्थ के कमरे में आ गई, वो सो रहा था, सफर की थकावट उसके चेहरे पर साफ दिख रही थीं। अदा उसके बगल मे बैठ गई और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया।
"वादा करो कि हाथ तुम कभी नही छोड़ोगी!", पार्थ ने एक आंख खोल झट से उसे अपने तरफ खींच लिया, जिससे वो सीधे उसके ऊपर आ गिरी!
"क्या कर रहे हो!", अदा ने उठना चाहा पर वो जितना उठती पार्थ की पकड़ उतनी मजबूत होते जा रही थी।
"अब क्यूं भाग रही!", पार्थ ने धीरे से उसके कान के पास कहा जिससे उसके पुरे शरीर में सिहरन सी दौड़ पड़ी ।
"म में मैं,,!", अदा आगे बोलती की पार्थ ने उसके चहरे को अपने हाथ में लिया और आगे बढ़ने लगा, अदा घबराहट के मारे अपना आंख मूंद ली लेकिन अगले ही पल पार्थ ने उसके फोरहेड पर किस कर दिया।
और बोला,"तुमने क्या सोचा हा ?"
अलदा ने झट से आखें खोली और दूर हो गई, और गुस्से में मुंडी झटक दी। वो उठी और जाते हुए बोली,"तुम्हे तो मैं बाद में देखती हूं,, हुंह।"
पार्थ ने एक सॉफ्ट स्माइल पास की, और उसकी कलाई पकड़ कर वापिस अपने बगल में बैठा लिया, और खुद के बाहों में उसे महफूज कर लिया।
(क्रमश:)

