स्कूल वाला लव 1
स्कूल वाला लव 1
पार्ट 1 ऑफ 5
"उस दिन मेरे स्कूल का आखिरी दिन था, क्युकी हमारे लिए स्कूल के हमारे जूनियर ने फेयरवेल पार्टी रखी थी, तो मैं बन ठन के तैयार हो रहा था। आपको तो पता ही होगा की लड़के अपने बाल को लेकर सबसे ज्यादा पजेसिव होते है तो मैं भी बस आज जेल वेल लगा कर बाल सेट कर रहा था, तभी मेरी इकलौती हिटलर दोस्त इशानी जिसको मैं प्यार से इशू बुलाता था उसका फोन आया, मेरे फोन उठाते ही उसने मुझपर चिल्लाना शुरू कर दिया क्युकी मैं थोड़ा लेट था, हा हा जनता हूँ गलती मेरी ही थी लेकिन फिर भी वो मुझे मेरे छोटे छोटे गलती पर डांट देती थी। उसने कहा," ओए, इहान कहा रह गया तू....जल्दी आ कबसे वेट कर रही हु।" इतना कह कर उसने फोन काट दिया, अरे भाई हमारे टाइम फोन कॉल्स महंगे हुआ करते थें न इसीलिए, तो मैं चेक करने बालकनी पर गया, पता है क्यू ?....क्योंकि मुझे पक्का पता था की वो वेट करने का बहाना बना रही है। उसकी आदत थी, जब साथ इंस्टीट्यूट जाने के लिए वो मेरे घर पहूँ चने को होती थी तो दस मिनट पहले ही फोन कर देती थी की मै तेरा कबसे वेट कर रही हूँ । लेकिन उस वक्त वो नीचे ही खड़ी थी और मुझे इशारे में धमाका रही थी भले ही मैं अपने अपार्टमेंट के ऐटथ फ्लोर पर था पर तभी मुझे उसके गुस्से भरे इशारे से ये तो समझ आ हीं रहा था की वो कहना चाह रही हो की नीचे आ वरना कूट दूंगी।
मैं उसको देखते ही दोगुनी स्पीड से तैयार हुआ और नीचे आ गया।
नीचे आते ही उसने एक चपत से मेरे बाल बिगड़ दिए, अब मैं तो लड़का था एक लड़की के ऊपर हाथ कैसे उठता, अरे आप गलत समझ रहे है लड़का लड़की गया भाड़ में मैंने भी उसके खुले बाल बिगड़ दिए। बस फिर क्या रास्ते भर महाभारत का युद्ध हुआ और के गेट के पास पहूँ चते ही हमने अपने बाल ठीक किए, उस वक्त वो मेरी मिरर थी मैं इशू का मिरर था, एक दूसरे के भरोसे से बाल ठीक किए,,,अगर आप ऐसा सोच रहे तो आप बिलकुल गलत सोच रहे है। हमे एक दूसरे पर इत्तू सा भरोसा नहीं था, तो हमने पास खड़े कार के मिरर में देख कर बाल ठीक किए और स्कूल के अंदर चले गए।
हम दोनों स्कूल के ग्राउंड से होते हुए हॉल में जा रहे थे जहां प्रोग्राम था, तभी बीच के खड़े दूसरे सेक्शन के लड़की लड़को के ग्रुप ने हमारे ऊपर कमेंट पास किया," आज स्कूल का लास्ट डे है अब तो दोनों मान लो की तुम दोनों मे कुछ है।"
मैं तो टहरा सो कॉल्ड इंट्रोवर्ट इसीलिए इग्नोर करना ही ठीक समझा, क्योंकि ये कोई नई बात नही थी हमारे लिए, लेकिन मेरे बगल में खड़ी मेरी एटॉम बॉम्ब बस फटने वाली थी, लेकिन इशू ने मुस्कुराते हुए कहा," हम दोनों में वो है जो तुम सब में नही है।" मैं भी उन सब के तरह हैरानी और असमझ की स्तिथि में इशू को देखने लगा तो उसने एकदम से अपने चेहरे के भाव बदल कर सीरियस टोन में कहा,"दिमाग।" मेरी तो हसी छूट गई ,लेकिन उन सब का मूड खराब हो गया, इससे पहले यहां वर्ल्ड वॉर थर्ड शुरू होता मै इशू को पकड़ कर हॉल ले गया।
प्रोग्राम शुरू हो चुका था, घंटों के स्पीच के जब हम मुक्त हुए तो हमारी कुछ फोटोज ली गई, आज इशू अपने मॉम का फोन लेकर आई थी तो मैंने भी उसके साथ फोटो ली और उसको मेरे डैड के फोन पर सेंड करने को कह दिया था। वहां खाने पीने का भी काफी अच्छा बंदोबस्त हुआ था, पर वहा मौजूद किसी भी स्टूडेंट का मन नहीं था सबकी आंखे नम थी बस मेरे और इशू को छोड़ कर। हम दोनों एक अलग ही प्राणी थे जिनको स्कूल से कोई मोह माया नहीं था, क्युकी तब हम दोनों ही अपने सपनो के पीछे भाग रहे थे। दोनों के पास पीसीएमबी था लेकिन इशू डॉक्टर और मैं इंजीनियर बनना चाहता था। क्लास में हम दोनों ज्यादा किसी से मतलब नही रखते थे। हम दोनों की मुलाकात इलेवंथ में हुई थी जब इशू नई नई इस शहर में शिफ्ट हुई थी , तबसे लेकर अभी तक हम दोनों एक दूसरे के अलावा किसी से उतना घुल मिल नहीं पाए। खैर ये सब पुरानी बातें हो गई। प्रोग्राम खत्म हुआ और सबने भीगी आंखों से एक दूसरे से अलविदा लिया कोई अपने आगे का रास्ता नहीं जानता था। उस वक्त इशू और मैं ही बस नॉर्मल थे क्योंकि हमें पता था, एंट्रेंस एग्जाम तक तो हम इंस्टीट्यूट के बहाने मिलने वाले ही थे , क्यूं पहले से ही अपना मूड ऑफ करना।
सब अपने घर जा चुके थे। मैं और इशू साथ घर जा रहे थे, मेरा घर पहले पड़ता था फिर भी मैं आज उसको उसके घर तक छोड़ने गया था।
उसके बाद तो स्कूल जाना नहीं था, फिर भी हम इंस्टीट्यूट के बहाने मिल लेते थे, लेकिन जैसा हमने सोचा था उस दिन के बाद हम दोनों का साथ रहना थोड़ा कम हो गया था, क्युकी एंट्रेंस एग्जाम नजदीक था और इंस्टीट्यूट में भी टाइमिंग अलग हो गया था उसका एमबीबीएस के लिए एंट्रेंस एक्जाम का बैच था मेरा आईआईटी एग्जाम का बैच था। हम दोनों भी खुद के सपनो को बुनने में व्यस्त हो गए। हमारा मिलना लगभग बंद ही हो चुका था, और कभी कभी बस फोन पर बात हो जाती ही वो भी थोड़े समय के लिए।
एंट्रेंस एक्जाम के दिन नजदीक थे, पहले एग्जाम इशू का होना था, फिर मेरा, और खुशी की बात ये थी की दोनों ने ही एक बार में एक्जाम क्लियर कर लिया था।
मुझे अब एहसास होता है की जिस स्कूल से मैं बिलकुल मोह माया नही रखता था वो ही मेरे और इशू का मिलने का जरिया था।
आज पूरे दस साल हो चुके है, इशू का ना मेरे पास फोन नंबर है ना ही कोई कांटेक्ट क्युकी उस वक्त हम दोनों के पास खुद का सेल फोन नहीं था और अपने पेरेंट्स के फोन से ही काम चलाते थे, हालाकि मेरे पास उसके पापा मम्मी दोनों के नंबर मौजूद है पर वो अब बंद हो चुके है। इशू ने अपनी डिग्री भटिंडा से की क्युकी उसके पापा जो इंडियन आर्मी में थे उनका इशू का एंट्रेंस देर ही ट्रांसफर हो गया था और वो अपने फैमिली के साथ भटिंडा शिफ्ट हो गए। शायद इशू भी अब वोही हो। इशू के बाद कोई लड़की मेरे इतने करीब नही आई और शायद मैंने आने भी नहीं दिया। भगवान से प्राथना करता हूँ की इशू मुझसे एक बार और मिल ले भले ही मुझे उसको उसके पति के साथ ही क्यों ना देखना पड़े....लेकिन इशू मैं तेरे से बहुत नाराज हूं, तूने कभी मेरे को कांटेक्ट करने की भी कोशिश नहीं की।"
इहान रात के अंधेरे में स्टडी टेबल पर रखे लैंप की रोशनी में अपने डायरी में लिख रहा था और लिखते ही मुस्कुराते हुए उसने डायरी बंद करके अपने वॉर्डरोब के कोने में छुपा कर रख दी। लैंप को ऑफ किया और बालकनी में चला गया, क्युकी पूर्णिमा की रात थी तो चांद की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसके चेहरे पर एक इंतजार की लकीर थी, दिखने में क्यूट इहान को कोई नहीं कह सकता था की वो शर्मीले किस्म का व्यत्ति है,मेटल एविएटर फ्रेम से वो और भी ज्यादा क्यूट लग रहा था, उसकी छोटी सी आंखें जो मुकुराते ही चांद बन जाती थी। । कुछ देर यूंही चांद को निहारने के बाद वो बेड पर आकर लेट जाता है।
आज उसके आंखो से नींद गायब थी क्युकी कल उसके लिए बहुत स्पेशल डे था।इन दस साल में बहुत कुछ हासिल कर चुका था, वो एक इंटरनेशनल टेक कंपनी में जॉब करता था। बस वो अब कैसे भी करके इशू से मिलना चाहता था।
अगली सुबह,
इहान आज फॉर्मल कपड़े पहन कर तैयार था,और अपने फैमिली के साथ ब्रेकफास्ट कर रहा था। उसके फैमिली में उसके डैड मिस्टर सुभोजित खुराना और मॉम मीना खुराना वोही इहान की पूरी दुनिया थे।
इहान आज बहुत खुश नजर आ रहा था, उसकी मॉम ने मुस्कुराते हुए इहान से पूछा," क्या बात है ....,जिस स्कूल से तू भागता था वहा जाने के लिए इतना उतावला हो रहा है।"
इहान मुस्कुराए बिना न रह सका और बोला," स्कूल लाइफ की कीमत कहा पता थी उस वक्त मुझे।"
" ये बात सही बोला तुमने बेटा, स्कूल लाइफ, सबसे यादगार पल होते है पूरे जिंदगी में।" सुभोजीत जी ने कहा।
आज इहान को अपने स्कूल जाना था, उसको स्पेशल गेस्ट के तौर पर एनुअल फंक्शन में इनवाइट किया गया था। इहान ने बहुत मेहनत कर के इंटरनेशनल कंपनी में जॉब हासिल की थी जिससे उसके स्कूल का नाम रोशन हुआ था।
इहान एक उम्मीद से स्कूल जा रहा था, जिस स्कूल ने बारह साल पहले उसको इशू से मिलवाया शायद आज भी वोही स्कूल दुबारा इशू से मिलवा दे।
इहान स्कूल जाने के लिए घर से निकल गया था। वो जितना स्कूल के करीब पहूँ च रहा था उतना ही उसके दिल जोर-जोर से धड़कने लगे थे। बस उसको इंतजार था इशू का की कब वो उसके पीछे से आवाज लगाएगी और बोलेगी ओए सुन। अक्सर इशू इहान को ऐसे ही बुलाती थी।
उसकी कार स्कूल के गेट के पास आकर रुकी और वह पार करके ऑडिटोरियम के तरफ बढ़ने लगा स्कूल के एक-एक कदम पर उसको इशू के साथ बिताया हुआ हर एक पल याद आ रहा था उसकी आंखें नम हो गई थी इसलिए उसने काला चश्मा लगा लिया क्युकी आज उसने अपने पावर वाले चश्मे के बजाए आंखो में लेंस लगा रखे थे।
उसके स्वागत के लिए अलरेडी बहुत सारे स्टाफ मौजूद थे क्योंकि,आज उसके और भी बच्चे भी इनवाइट्ड थे जिन्होंने सफलता हासिल की हो। इसीलिए उसको भी उम्मीद थी की इशू भी जरूर आएगी।
एनुअल डे फंक्शन स्टार्ट हो चुका था सब अपने सीट पर बैठे थे । इहान आज अपने बैच के एक क्लासमेट से मिला जो आज डॉक्टर था और भी दूसरे बैच और सेक्शन के स्टूडेंट जो आज इनवाइटेड थे,बस एक सीट खाली थी, वह सीट इशू की ही थी वह नहीं आई थी।
(क्रमश:)

