अधूरा इश्क
अधूरा इश्क
बरसाती रात बिजलिया जोरो से कड़क रही थी। उस एरिया के किसी घर में दो लोगों की जोर जोर से बहस की आवाज आ रही थी वह लिटरली चिल्ला चिल्ला कर एक दूसरे से झगड़ा कर रहे थे। डिम लाइट के वजह से दोनो के चेहरे नजर नही आ रहे थे।
लड़की लगभग गुस्से से चिल्लाई ,"मैं अब और तुम्हारे इस झूठ भरे रिश्ते में नहीं रह सकती,,, मैं घर छोड़ कर जा रही हूं,,,इस रिलेशन से अब मुझे सफोकेशन हो रहा है ,मैने खुद को बहुत समझा लिया और तुम्हे बहुत समझ भी लिया।"
लड़का ने उसके पास जाने की कोशिश कर कहा," पर क्यों बिना रीजन के और आधी रात होने आई है तुम ऐसी बात क्यों कर रही हो,,हम सुबह आराम से बात करते है न,,,??"
लड़की ने उसे दूर ढकेला और बोली," दूर रहो,,, हुह ,,आरम से बात,,,पिछले कुछ महीने से यही तो कर रही हूं अब,, थक गई हूं यार रोज-रोज के इस झमेले से देर रात तक घर से बाहर रहते हो कभी कुछ बताते नहीं और जो बताते हैं वह झूठ ही होता है।"
लड़का ने फिर भी आराम से कहा,"आई स्वेर जान मैंने कभी तुमसे कोई बात नहीं छुपाई !।" उसकी आवाज लड़खड़ा रही थी, जैसे वो नशे में हो।
लड़की ने जबरदस्ती मुस्कुराते,"अच्छा,,” और उसके मुंह पर फोटोग्राफ मारते हुए बोली," तो यह क्या है।" इस बार उसके अंदर आक्रोश के साथ दिल टूटने की भी आवाज आ रही थी, अबतक रोके हुए आसू बह गए।
लड़का फोटो देखकर हड़बड़ा गया और फोटोज बार पर पलटकर देखने लगा,"आई स्वेर मुझे फंसा रहा है कोई,,,मैं इसी चक्कर में देर रात घर आता हूं,,मैं जानना चाहता था कि मेरे पीछे कौन पड़ा है इसीलिए मैं पब में गया था और वहां मुझे किसी ने पिला दी मुझे कुछ भी याद नहीं,,,,,साजिश हो रही है मेरे खिलाफ सच में इस लड़की और मेरे बीच कुछ भी नहीं है।"
इस बार लड़की ने लड़के को थप्पड़ मार कर चीखते हुए कहा," इनफ इज इनफ,,,"
वो सोफे के पास रखे सेंटर टेबल पर रखे शादी के कार्ड्स उठाई और उसको फाड़ दिया और रोते हुए बोली," माय ट्रस्ट, माय हार्ट एवरीथिंग इस ब्रोकन नाउ, और ये शादी के कार्ड अब किसी काम के नही..मैं इस रिलेशनशिप में रह कर और नही रोना चाहती,,,इसीलिए तुम मेरे पीछे मत आना,, एवरीथिंग इस ओवर नाउ।"
"डार्लिंग,, प्लीज़,,,,,।",लड़के ने उसे पीछे से हग करने की कोशिश करते हुए कहा पर उसने खुद से दूर कर दिया और बिखरे हुए फोटोस पर उसके लड़खाते हुए कदम पड़े, पर बिना परवाह किए वो आगे बढ़ गई, उसके आंखो से लगातार आसू बहे जा रहे थे, एक एक कदम पर उसका भरोसा, उम्मीद उसका साथ छोड़ते जा रही थी। उसने उसकी कलाई पकड़ बार-बार उसको मनाने की कोशिश कर रहा था पर जैसे कि आज उसने ठान लिया था उसने पीछे मुड़कर एक भी बार नहीं देखा और घर के बाहर निकल गई।
मौसम भी जैसे की उस मौहोल के हिसाब से बरस रहे थे, भरी बारिश में उसने कार के पिछले सीट पर समान रखा और भींगी हुई खुद ड्राइविंग सीट पर बैठने से पहले एक बार उस लड़के को देखी, आंखो में पछतावा देख एक बार को उसका दिल पिघलना चाहा, पर फिर से वो फोटोज उसके जहन में घूमने लगे,
वो बोलना चाहती थी चीखना चाहती थी लड़ना चाहती थी खुद को रोकना चाहती थी पर कुछ देर में उसका पूरा घर उजड़ गया, वो आज हारी हुई थी इश्क में। सारे जज्बात समेटे वो ड्राइविंग सीट पर बैठी और निकल गई।
रूखे कदमों से वो अंदर आया और, कांपते हाथों वो बिखरे हुए फोटोज को उठाया।
फोटो में वो किसी और लड़की के साथ बहुत नजदीक नजर आ रहा था।
"हम कैसे सहे दर्द जुदाई का,
आज तो हम उससे ही जुदा हो गए
जिसमें हम बसे थे।"
मुंबई सपनो का शहर ...
अदा पूरे घर में इधर-उधर चक्कर लगाती हुई अपने आप से बात करे जा रही थी,"यह पार्थ का बच्चा कभी टाइम पर नहीं आएगा । 11:00 बजे की फ्लाइट है 9:00 बज गए है,,,, ये लेटलतीफ कभी सुधरेगा नहीं। मझे अब फोन ही करना पड़ेगा। पिकअप द फोन पिक अप द फोन,,,,पार्थ इस बार तूमने फोन नहीं उठाया और टाइम पर नहीं आए ना तो,,,,!"
तभी उसके डोर पर नॉक हुआ, "लगता है आ गया....... 1 घंटे से तुम्हारी राह देख रही हूं अब आ रहे हो 10:00 बजे की फ्लाइट है यार कभी तो तुम जल्दी आया करो.... ऊपर से फोन भी रिसीव नहीं कर रहे...।", अदा गुस्से से गेट खोली और सामने खड़े उसके ऊपर भड़कते हुए बोली।
पार्थ ने गुस्से में खड़ी अदा को हग किया,"मेरी जान,,, ड्राइविंग कर रहा था और तुम्हें मुंबई का ट्राफिक पता है ना कितना होता है.. अब चलो जल्दी,,, बाद में डांट लगा देना। "
अदा का गुस्सा उसके एक बार गले लगने से पिघला तो लेकिन अभी मुंह फूला था,"अब तुम्हें जल्दी है मैं तैयार हूं..... मां पापा को तुमसे मिलाने के लिए कितनी मिन्नते करनी पड़ी है पता है,,, 1 साल से अम्मा पापा को मना रही हो तब जाके तुम्हें मिलने से तैयार हुए हैं,,, ।"
पार्थ ने उसके चीक्स पर किस किया और बोला," सॉरी बाबा सॉरी ,,,, मेरी जान मैने भी कोई कम पापड नहीं बेले,,, पिछले 2 साल से पीछे पड़ा हूं तब मानी हो,,,,!"
अदा ने कहा," हां तो मेरा प्यार पाना भी कोई आसान काम थोड़ी ना था,,,,,!"
यह थे पार्थ और अदा, पिछले दो साल से रिलेशनशिप में थे और फाइनली अदा शादी के लिए मान गई थी इसलिए वह दिल्ली पार्थ को अपने मां पापा को मिलाने के लिए ले जा रहे थी।
पार्थ की फैमिली में पार्थ के अलावा कोई नहीं था, लेकिन अदा के मिलने के बाद वोही उसकी सब कुछ थी, वो अदा को इतने महफूज से रखता था जैसे की वो फुल हो भले ही पार्थ ये भी जानता था की वो फूल नहीं शेरनी है।
वो दोनों प्लेन में बैठ गए थे और दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे।
दिल्ली शर्मा हाउस__
अदा आज पूरे चार साल बाद अपने घर आई थी, धीरे धीरे वो अपने घर के तरफ बढ़ रही थी और पुरानी यादें उसके आजू बाजू किसी फिल्म की तरह चल रही थी।
अदा के सामने उसकी मां आरती जी खड़ी थी, और उसके स्वागत कर रही थी," मम्मा क्या कर रही हो,,, मैं तो शादी करके नहीं आई हुं,,,,"
आरती जी उसके बात पर मुस्कुराते हुए बोली,"पता है शादी करके नहीं आई पूरे चार साल बाद आई है मेरी बेटी,,, होने वाले दामाद को लेकर तो आरती तो उतारनी पड़ेगी ना। "
तभी आरती जी के पीछे से एक लड़की उछली और बोली,"हेल्लो जीजू।" अचानक उसके इस पॉप अप से पार्थ डर के पीछे उछल पड़ा ।
अदा और आरती जी दोनो की हसी छूट गई वोही पार्थ अपने दिल पर हाथ रखे खड़ा शॉक में खड़ा था, और अनु को देखते ही घबराहट वाली स्माइल करते हुए बोला,"हेल्लो, साली, आह साहिबा।"
अनु शरारत से हस दी,"मम्मा चलो आप की आरती हो गई हो तो मुझे दीदी को गले लगाने।" आरती जी थोड़ी सी साइड हटी की वो उछल के अदा के गले लग कर बोली," आई लव यू एंड आई मिस यू दी मैंने आपको बहुत मिस किया।"
अदा ने कुछ कहना चाहा पर अनु बिना रुके बोली," पर आपने मुझे एक भी बार नहीं किया,,,अगर किया होता तो आप मुझे एक बार तो मिलने आते ।"
अब आरती जी ने कुछ बोलना चाहा की वो फिर अपने रफ्तार के बोली ,"और कंग्राटुलेशन दी क्या हैंडसम जीजु ढूंढे है आपने,,,,,।"
पार्थ ने कहा," क्या मुझे आप बाहर से ही भगाने वाले हो,,,?"
अनु ने मासूम शक्ल बना के कहा,"नहीं तो ऐसा क्यों पूछा आपने?।"
पार्थ सर खुजाते हुए कहा,"क्योंकि मेरे पैर दर्द कर रहे है और आप लोग मुझे अंदर बुला ही नही रहे,,,,।" इस बात पर अदा उसकी मां और अनू तीनों हंस पड़े।
पार्थ के साथ साथ सब घर के अंदर गए, आरती जी अनु को बोल के किचन में चली गई।
"जीजू आप जाके फ्रेश हो जाओ, आपका रूम दी के बगल वाला ही है।",अनु ने कहा।
"क्या बगल वाला।", पार्थ ने धीरे बोलते हुए बीच के शब्द पर इतना जोर दिया की अनु और अदा दोनो आंख फाड़े उसी को देखने लगे।
"आह मेरा मतलब, अदा का कमरा कहा है।", पार्थ ने बात को संभाला तो अदा ने ऊपर इशारा करके कमरा दिखाते हुए कहा,"वो वाला।"
अनु न जाने किस बात पर मुस्कुरा दी, तो अदा ने घूरा। "दी जीजू आप दोनों अपने अपने कमरे में जाओ और जल्दी से फ्रेश होकर आओ।"
उसने "अपने अपने" शब्द पर इतना ज़ोर दिया की अदा चिढ़ गई और पार्थ एंबेरेस हो गया।
(क्रमश:)

