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Shruti Sharma

Drama Romance Crime

4  

Shruti Sharma

Drama Romance Crime

अधूरा इश्क 3

अधूरा इश्क 3

7 mins
394

"अनु,चलो मैं तुम्हे कॉलेज ड्रॉप कर दूंगा।" पार्थ ने कहा।

आज अदा और पार्थ दोनो शॉपिंग के लिए मॉल जानें वाले थे, अनु के भी कॉलेज का टाइम हो रहा तो पार्थ ने उसे साथ चलने को कहा लेकिन वो दोनों को डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी इसलिए उसने,मना करते हुए कहा,'नहीं नहीं जीजू आप दोनो आराम से जाओ मुझे दोस्त पिक करने आ रहे हैं।"

पार्थ ने हां में सर हिलाया अदा के साथ निकल गया। 

अदा को अपने लिए एक ब्रेसलेट खरीदनी थी, इसीलिए वह दोनों ज्वेलरी शॉप की तरफ जाने लगे क्योंकि ज्वेलरी शॉप फर्स्ट फ्लोर पर था इसीलिए दोनों एस्केलेटर से ऊपर जा रहे थे वाही नीचे उतरने वाले एस्केलेटर पर एक व्यक्ति की नजर जैसे ही अदा और पार्थ पर पड़ी उसकी आंखें चौड़ी हो गई, वो जल्दी से नीचे उतरने लगा।

दोनों फर्स्ट फ्लोर पर आए ज्वेलरी शॉप के अंदर जाते हुए पार्थ ने अदा का हाथ पकड़ा हुआ था और नीचे खड़ा वह व्यक्ति दोनों को देख ही रहा था और जैसे ही वो वापस दोनों के पास जाने लगा बीच में एक लड़की ने आकर उसका रास्ता रोक दिया और मुस्कुराते हुए उसका बाजू पकड़ लिया और मॉल के बाहर ले गई वह व्यक्ति जाते हुए दोनो को पिछे मुड़कर देखा, दोनो किसी बात पर एक दुसरे को देख मुस्कुरा रहे थे। 

अदा ने खुद के लिए एक ब्रेसलेट लिया पार्थ ने पेमेंट किया और दोनों बाहर आ गए, वही उसी मॉल के ओपन रेस्टोरेंट मैं दोनों ने लांच किया और बाकी की शॉपिंग कर दोनों घर आ गए।

वही मॉल वाला व्यक्ति कार ड्राइव कर रहा था उसके बगल में बैठी लड़की उसका बाजू पकड़ कर अपना सर रखी हुई थी और बोली," क्या हुआ इतना परेशान क्यों हो।" उस व्यक्ति की उम्र लगभग 29-30 होगी और वो लड़की उसकी वाइफ थी। उसने उसके जवाब में कुछ नहीं कहा बस ना में सर हिला दिया। 

उसने पहले तो लड़की को उसके घर ड्रॉप किया और बोला,"एक इंपोर्टेंट काम है मैं आता हूं थोड़ी देर में।", लड़की ने हा में सर हिलाते हुए कहा,"ओके जल्दी आना बाय।"

वो व्यक्ति वापिस मॉल वाले रास्ते को निकल गया, उसने अपनी कार की रफ्तार बढ़ाई और 20 मिनट का सफर 10 मिनट में तय कर लिया उसकी आंखों में एक डर था और माथे पर चिंता की लकीरें। वह मॉल पहुंचते ही पागलों की तरह अदा को ढूंढता रहा लेकिन वह दोनों कहीं नहीं उसने सिक्योरिटी कैमरा से उसका पता लगाना चाहा लेकिन उसको परमिशन नहीं मिला। पछतावे के साथ वह अपने कार के पास गया और अपना सर टीका कर वहीं खड़ा हो गया शायद आज उसको बहुत अफसोस हो रहा था वह अदा उसके सामने थी फिर भी उसे मिल नहीं पाया....उसने गुस्से से अपने ही पैर से अपने ही कार को मारा और तब तक मारते रहा जब तक उसका गुस्सा शांत न हुआ।

तभी उसका फोन रिंग हुआ हुआ उठाते ही उधर से आवाज आई," जल्दी से ऑफिस आओ, और कोई इधर उधर का काम किया तो तुम्हारी फैमिली ....।"

"मैं आता हूं...", उसने उसके बात खत्म होने से पहले ही कहा और फोन कट कर के रख दिया।

"अगर अपनी फैमिली प्यारी है तो अदा को कुछ मत बताना, जो जहा जिस हालत में है उसको वैसे ही रहने दो।", उसके अंदर से आवाज आई, लेकिन फिर उसके दिल ने कहा,"अदा को वो बात जानने का हक है,,,और गलत के आगे शांत रहना कायरता की निशानी है।"

"तुम उसकी बात पर ध्यान मत दो, ये कलयुग है...!”, वो अंदर ही अंदर सही और गलत के बिच फसा हुआ था उसने अपना सर एक बार फिर कार के रूफ से टिका लिया।

"बस करो,,, आई चूज माय फैमिली।", उसने मन में हताशा से कहा और वापिस कार में आकर बैठ गया। 

"क्या हुआ हनी।" पार्थ ने अदा से पुछा, वो पार्थ के कमरे में थी, और उसके लिए कॉफी बना कर लाई थी।

"किसको !”, अदा ने अनजान बनते हुए कहा, वो जानती थी वह चाहे लाख कोशिश कर ले अपनी परेशानियां छुपाने की पर पार्थ उसके चेहरे को देखकर पकड़ लेता था।

वह उठ के उसके अदा के पास गया और उसके चेहरे को पकड़ के प्यार से पूछा," क्या कोई बात तुम्हें परेशान कर रही है।"

अदा ने ना में अपना सर हिला दिया और बोली,"तुम्हारे होते मैं क्यों परेशान होउंगी।"

"तुम मेरे से कुछ नहीं छुपाओगी ओके।", पार्थ ने अदा के आंखो को देख बात जानने की कोशिश की।

अदा ने बड़ी ही मासूमियत से अपना सर हा में हिलाया और बोली," आई जस्ट वांट आ टाइट हग।"

"बस इत्तू सी बात ?" पार्थ ने कहते हुए उसको अपने बाहों में भर लिया, और उसके सर को प्यार से सहलाने लगा। 

" दीईईईई,,जीजूऊऊऊ, ,,,!", अनु मस्ती में आवाज लगाते हुए कमरे के तरफ बढ़ रही थी।

"आ गई मेरी खतरनाक शुभचिंतक।", पार्थ अगर अदा धीरे से थोड़े दूर हुए। तो अदा उसके बातों पर हस दी। 

"जीजू अंदर हो क्या?", अनु ने बोला और बिना जवाब सुने अंदर आ गई। उसको मालूम था अदा भी वही है इसमें बड़ी सी स्माइल करते हुए का बोली,"आप दोनों को डिस्टर्ब तो नहीं कर दिया।" और अदा के बगल में आके बैठ गई।

"अरे नहीं साली साहिबा बैठो”, पार्थ ने मुस्कुराते हुए कहा। अनु अदा के बगल मे बैठ गई, और बोली

"एक आप ही स्वीट हो जीजू ये देखो दी को कैसे घुर रही जैसे की मैने 'डिस्टर्ब' कर दिया हो।"

पार्थ इस बात पर हस पड़ा,"अरे नही साली साहिबा ! अपना हाथ देखो।",

अनु ने पार्थ के कहने पर अपना हाथ देखा तो उसको पता चला की उनसे फ्लो फ्लो में अदा का कॉफी उठा के आधी पी ली थी। "ओह शी,,।", अनु ने अदा को देख मुस्कुराने की कोशिश की।

"आहम्म हम्मम।", पार्थ ने अदा को इशारा किया और अपनी कॉफी सरका दी। 

अदा बिना कुछ बोले उठा के पी ली और मंद मंद मुस्कुरा पड़ी। अनु ने नोटिस किया तो पर हर बार दोनो को डिस्टर्ब करना ठिक नही समझा इसीलिए कुछ नहीं बोली। 

"अरे हा मैं ये कहने आई थी की चलो न मुझे आइस क्रीम खानी है!", अनु ने बिल्कुल बच्चों के तरह कहा।

"नही मेरा मन नही।", अदा ने कहा।

"क्या यार दी चलो न!”,अनु ने कहा।

"चलते है,, लेकिन डिनर करने के बाद!", पार्थ ने कहा।

"ग्रेट आइडिया जीजू मैं जाती हू जल्दी से डिनर लगाने।", अनु ने खुशी के कहा और न आगे का सुनी न पीछे कूदते हुए नीचे चली गई।

अदा ने मुंह बना के कहा,"तुम आजकल उसकी हर ज़िद्द पूरी नही कर रहे?"

"इकलौता जीजू हु न।", पार्थ ने कहा ही था की अनु वापिस आते हुए फोन उठाई और जाते हुए बोली,"और मैं इकलौती साली साहिबा।" पार्थ मुस्कुरा दिया और अदा से इशारे में कहा,"समझी।"

अदा ने उन दोनो की बात पर हुह किया और टीवी ऑन कर दी।

"तो अब बताओ तुम्हारी ज़िद्द क्या है!", पार्थ ने उसके आंखो मे देखा और दूर लॉक कर दिया। जिससे उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था और वो कुछ बोलती उससे पहले टीवी पर चल रहे म्यूजिक चैनल पर गाना शुरू हुआ, जिससे पार्थ उसके पास गया और एक झटके में उसको खुद के करीब कर लिया, उसके हाथ को अपने कंधे पर रख उसने उसके कमर पर पर हाथ रख लिया। 

पी लूं तेरे नीले-नीले नैनों से शबनम

पी लूं तेरे गीले-गीले होंठों की सरगम

पी लूं है पीने का मौसम

(अदा को पलट उसको पीठ के तरफ से उसको गले लगाते हुए)

तेरे संग इश्क तारी है

तेरे संग इक खुमारी है

(अदा को गोल घुमाते हुए)

तेरे संग चैन भी मुझको

तेरे संग बेकरारी है..

और आखिर लाइन पर उसके कमर पर हाथ रख उसके फोरहेड पर किस कर दिया।

इन लम्हों दोनो कभी एक दूसरे को देख प्यारी सी स्माइल कर रहे थे, तो कभी कमरे में उन दोनो की हसी गूंज रही थी जैसे की लम्हा भी ठहर गया हों, दोनो बस एक दुसरे के बाहों।

"प्रॉमिस करो यूंही मुस्कुराती रहोगी नही तो?।", पार्थ ने उसको धीरे से अलग किया और बोला।

"नही तो ? अदा ने कहा।

"तुम्हारी मुस्कान के लिए अगर किसी की जान भी लेनी पड़े तो ले लूंगा,,एंड यू नो आई मीन इट।", पार्थ ने अचानक से भावहीन होकर से कहा, वो ये सब किस लिए और किसके लिए बोल रहा था अदा ये भली भांति जानती थी, और वो ये भी जानती थी कि पार्थ एक खुशमिजाज इंसान है लेकिन बहुत खरारनक भी...

अदा में धीरे से हा में सर हिला दिया,"प्रॉमिस!" 

(क्रमश:)

फर्स्ट और सेकंड पार्ट हमारे प्रोफाइल में मिल जायेगा, आगे के पार्ट्स पढ़ने के लिए बने रहे हमारे साथ।


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