अधूरा इश्क 4
अधूरा इश्क 4
अदा पार्थ और अनु, तीनों नाइट आऊट के लिए घर से कुछ दूर मार्केट के तरफ़ पैदल जा रहे थे!
अनु और पार्थ दोनों मज़ाक में इधर उधर की बातें कर हंसे जा रहे थे, वो ही उन दोनों के बीच फंसी अदा उनके सस्ते जोक पर मुंह बनाई हुई थी।
"क्या यार दी, जीजू देखो कितने कूल हैं और एक आप!", अनु ने कहा।
"मैं क्या!", अदा ने भौंहें सिकोड़ते हुए कहा।
"तुम हॉट।", पार्थ ने अदा के कान के पास कहा, और उसको देख आंख मार दिया।
"तुम दिल्ली आकर कुछ ज्यादा ही...!", अदा ने धीरे से पार्थ को कहा कि तभी अनु जो उन दोनों से थोड़ा आगे चल रही थी उसने उसके बात को बीच में काट खुशी से उछलते हुए बोली, "देखो वो कॉटन कैंडी मेको चाहिए।"
"चलो फिर,,,।", पार्थ ने कहा, तीनों वहाँ पहुंचे, "वैसे साली साहिबा,, इसको अपने भाषा में बुढ़िया के बाल कहते है।"
"हा सेम टू सेम दी के बाल जैसा।", अनु ने हँसते हुए अदा को चिढ़ाते हुए कहा।
"सस्ते जोक्स हूह...।", अदा ने कहा, और दुकान वाले से अपना हाथ फैला कर इशारा करते हुए कहा, "भैया, इतना सारा देना।
"चलो मेरी तारीफ करो, तो इसका पेमेंट मैं करूंगी।", अदा ने आगे कहा।
"हाँ मेरी समझदार दी, आप बहुत अच्छे हो, आपके जैसी बहन किसी को न दे भगवान !", अनु ने उसका ऑफर सुना की बटर लगाते हुए कहा।
पार्थ ने हैरानी से अनु को देखा तो उसने आगे कहा, "अरे ये एंटीक पीस है न, सबके पास हो तो क्या फायदा।",
"हाहहा बस बस, तारीफ करने भी आती तुम को।", अदा ने कहा।
इतने देर में दुकान वाले ने अदा के कहे गए मुताबिक, दो स्टिक में बहुत सारा कॉटन कैंडी दिया।
"कितना हुआ भाई।", पार्थ ने कहा, और अपना वॉलेट निकाल कर पैसे निकालते हुए कहा।
अदा ने स्वैग के साथ कहा, "रुको मैं दे रही हूं,,।"
पार्थ और अनु दोनो ने उसके तरफ हैरानी से देखा, "दो सौ रुपए।" दुकान वाले ने कहा।
अदा ने कार्ड निकाला और वहाँ मशीन से पे कर दिया।
"ये तो मेरा कार्ड है।", पार्थ ने हैरानी से कहा।
अनु दोनों का एक्सप्रेशन देख हंस पड़ी, पे करके तीनों बाहर आए।
अदा ने भाव खाते हुए पार्थ से कहा, "अब तुम तेरा मेरा कर रहे है?"
"ओहो अभी से वाइफगिरी!", पार्थ ने कहा, तो अदा ने अदा दिखाते हुए अपने बाल झटक दिया, उसके अदा पर तो पार्थ ने अपना हाथ दिल पर रख लिया।
अनु ने कहा, "आप तो बहुत तेज़ निकले दी! तो स्कोर हुए,,,
दी -1
जीजू - 2"
"ये कायका स्कोर।", अदा ने कंफ्यूज होकर कहा।"
"अदा दी जीजू आपके अदा से पिघल गए न।", अनु ने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा।
"बदमाश, "अदा उसके पीछे दौड़ी, लेकिन अनु भाग निकली क्योंकि रात का समय था इसीलिए गाड़ियां भी एक आध ही थे और अधिकतर दुकान बंद हो चुके थे। दोनों को हँसता खेलता देख मुस्करा रहा था।
थोड़ी देर मस्ती के बाद अनु और अदा ने आइस क्रीम लिया, पार्थ सीरियस डाइट पर था तो उसने नहीं लिया।
दोनों खा ही रही थी, की पार्थ का कोई उर्गेंट कॉल आया वो थोड़ा साइड चला गया।
वो बात कर रहा लेकिन उसकी नजर अदा पर थी, वो पता नहीं कही और देख कर इतना खो गई थी की उसका आइस क्रीम पिघल कर नीचे गिर गया।
"हम्मम ओके, अल सी यू टुमॉरो।", पार्थ ने कहा और फोन कट कर अदा के पास गया।
"क्या हुआ?", उसने बिना कुछ बोले इशारे से पुछा। अदा ने झूठी मुस्कान के साथ न में सर हिला दिया, तो पार्थ ने उसका सर सहलाते हुए मुस्कुरा दिया।
और उस तरफ देखने लगा जिस तरफ देख वो परेशान सी दिख रही थीं।
वहा उसको थोड़ा सी परछाई सी दिखी जिसको देख पार्थ का खून खौल उठा, वो नहीं जानता था की वहाँ कौन है लेकिन अगर उसके वजह से अदा को नुकसान हुआ तो उससे बुरा कोई नहीं होगा।
घर पहुंचते ही, तीनों हॉल में था, जहां अजय जी और आरती जी सो चुके थे वो ही ये तीनों बैठे खुसुर फुसुर कर रहे थे। बातों बातों में पार्थ ने कहा, "मेरी कल की फ्लाइट है लखनऊ के लिए।"
अनु और अदा ने हैरानी से एक साथ कहा,"क्यूं!!"
"वहा एक फेमस क्लोधींग ब्रांड है हाई-फेम, उसके एडवर्टाइज के लिए शूटिंग करना है।", पार्थ ने कहा।
"ओह बेस्ट ऑफ लक जीजू!", अनु ने कहा।
"तुम कब तक आओगे फिर।", अदा ने कहा।
"बस दो दिन में।",पार्थ ने कहा।
"पार्थ एक्चुअली मेरी फ्रेंड कशिश परसो ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हो रही, और मैंने सोचा था की हम दोनों उससे मिल लेंगे।", अदा ने कहा।
"और जीजू कल मेरा मैच है मैंने सोचा था की आप दोनों वहाँ आओगे!", अनु ने कहा
"ओह सो सॉरी, रुको मैं मैनेज करता हूँ फिर।", पार्थ ने कहा और कॉल करने के लिए फोन निकालने लगा।
"नो नो नो”, दोनों ने एक साथ कहा, "अरे बाबा तुम जाओ, बाद में मिलेंगे कभी।", अदा बोली।
"हाँ जीजू, कल के बाद मेरा एक और मैच है , तब चल लेना।", अनु ने कहा।
पार्थ ने हाँ में सर हिलाया, ऐड, दो रात की शूट थी इसीलिए उसकी फ्लाइट अगले दिन 6 बजे शाम की थी।
अगले दिन,
क्युकी अनु का मैच शाम के 8 बजे से शुरू होना था इसीलिए वो जल्दी निकल गई थीं।
अदा पार्थ दोनों एयरपोर्ट के तरफ जा रहे थे, अदा ड्राइविंग कर रही थी वो ही पार्थ कोई बूक रीड कर रहा था।
"ओह हाँ पार्थ, मैं यहां से सीधा कशिश के घर के लिए निकल जाऊंगी!", अदा ने कहा।
"ओके लेकिन आराम से हाँ।", पार्थ ने कहा।
"हाँ बाबा!", अदा मुस्कुराते हुए बोली।
एयरपोर्ट आते ही अदा ने पार्थ को हग कर बाय किया, और पार्थ ने उसके फोरहेड पर किस करके कहा, "कोई प्रोब्लम हो तो जस्ट कॉल मि ओके।"
पार्थ के सीने से लगे लगे ही अदा ने हाँ किया।
पार्थ ने अदा को अपने दोस्त से जाके मिलने कहा, क्युकी थोड़ी देर में रात होने वाली थी इसीलिए पार्थ ने उसे जाने को कहा।
कशिश से मिलने के बाद अदा अपने घर के लिए निकल गई थी, अंधेरा हो चुका, अभी सबके ऑफिस का ऑफ टाइम था इसीलिए जाम लगा हुआ था, इसीलिए अदा ने दूसरा रास्ता ले लिया, हालाँकि वो रास्ता थोड़ा अगल था लेकिन उतना भी सुनसान नहीं था स्ट्रीट लाइट भी थी और ट्रैफिक फ्री भी।वो तेजी से आगे बढ़ ही रही थीं की अचानक से उसकी से उसकी कार रुक रुक कर चलने लगी और , कार में कोई दिक्कत भी नहीं थी, और उसका फ्यूल भी फुल था।
अदा साइड ने अपनी कार साइड में रोकी तो दुबारा से स्टार्ट नही हो रही थी, वो बाहर निकली, उसने बोनट उठाया पर सब सही था ऐसे में किसी ने पीछे से आके उसको हग करना चाहा लेकिन अदा को एहसास होते ही पीछे हो गई।
और पीछे मुड़ कर देखी तो उसकी आंखें चौड़ी हो गई, "तुम...!"
वो इतना ही बोल पाई, की उसकी आवाज वो ही अटक गई और आंखें लाल हो गई।
"स्वीटहार्ट, प्लीज़ मेरी बात सुन लो।", अदा के सामने खड़े लड़के ने कहा।
"शट द।", अदा बोली की वो उसके गले जा लगा।
अदा ने खुद से उसको दूर ढकेला और जोर से चीखी," दूर चले जाओ तुम!"
.....
(क्रमश:)

