आफरीन..
आफरीन..
कश्मीर में,
क्या बात कर रहे हैं? ज़ुबैर भाई!! ऐसा नहीं हो सकता, मेरा एख़लाक देशद्रोही नहीं हो सकता.....
याह..अल्लाह!! ये सुनने से पहले मैं मर क्यों ना गई।।
लेकिन आफ़रीन यही सच है, कल खुफिया विभाग से मुझे ये ख़बर मिली, पता है रात भर सो ना सका कि मैं एक पुलिस वाला होकर, कैसे अभी तक एख़लाक को ना पहचान सका, ज़ुबैर ने आफ़रीन से कहा।।
लेकिन भाईजान, हमारे निकाह को पांच साल हो चुके हैं और एख़लाक मुझसे बहुत मुहब्बत करते हैं, हमारी एक बेटी भी है, मुझे आपकी बातों में अब भी यक़ीन नहीं होता,आफ़रीन बोली।।
लेकिन आफ़रीन यक़ीन करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं, मुझे जैसे ही कल पता लगा तो कल शाम तक मैंने सारे सुबूत जुटाए और सारे सुबूतों में एख़लाक गुनाहगार साबित हो रहा है और मैं सुबूत की एक कॉपी तुम्हारे लिए भी लाया हूं, ज़ुबैर ने आफ़रीन से कहा।।
इसका मतलब है ज़ुबैर ने मुझे धोखा दिया, वो सच में देशद्रोही है, आफ़रीन इतना कहकर फूट-फूटकर रो पड़ी।।
तुम अपना ख्याल रखना क्योंकि उसका अब कुछ भी भरोसा नहीं है, अभी मैं जा रहा हूं और अगर तुम्हें कुछ भी शक हो तो फौरन फोन करना, अल्ल्लाह तुम्हें सलामत रखे, इतना कहकर ज़ुबैर भाई जान चले गए...!!
रात को एख़लाक के आने पर आफ़रीन ने सबका मनपसंद खाना बनाया।
क्या बात है? आफ़रीन!! आज कुछ ख़ास है जो इतनी शानदार दावत दी जा रही है, एख़लाक बोला।।
आफ़रीन बोली, ऐसा ही कुछ समझ लीजिए।।
सबने रात को हंसी खुशी खाना खाया ।।
सुबह आफ़रीन के घर में पुलिस पहुंची।।
ज़ुबैर भी आफ़रीन के घर पहुंचा, तब तक तीनों लाशें पोस्टमार्टम के लिए जा चुकी थीं।
ज़ुबैर की आंखों से आंसू बह निकले और उसने मन में कहा जब तक तुम जैसी बेटी इस देश में रहेगी, यूं ही कश्मीर की वादियों में शांति और अमन बरसता रहेगा।।
