रोहित वर्मा

Inspirational others inspirational abstract

3.0  

रोहित वर्मा

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आज की सीख

आज की सीख

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क्या एक के पीछे पूरी ज़िन्दगी चलना सही या गलत. देखा जाए तो गलत क्योंकि आप पूरी ज़िन्दगी एक ही पर कुर्बान करे सही नहीं क्योंकि घमंड का पैर कब फिसल जाए पता नहीं चलता . बात करने वाले समय देते हैं और बात न करने वाले दूर होते हैं जो वक्त दे उसकी कदर करे. साइकिल में भी दो पहिए रहते है तो ज़िन्दगी एक पहिए से चल सकती है नहीं. बात उसी से करो जिस से बात करके दिल खुश हो और दिमाग शांत हो. आज आपको कोई और पसंद कल कोई और ऐसे ही ज़िन्दगी चलती रहती है. दिल एक बार आता है एक ही बार में टूट जाता है फिर वह बदल जाता है. जिस्मानी होने से प्रेम की हवा रुक जाती है. आप चल सकते हो लेकिन अगर आपके पैरो में काटे हो क्या आप चल पाएंगे नहीं. अकेले जीना भी गलत नहीं खुद की पहचान अकेले रहने से होती है पर इतना भी नहीं कि इस गढ़े में गिर जाओ. हर किसी को चंद खुशियां चाहिए. रिश्ता वहीं सही चलता जहां बराबर का हाथ पैर चलता है .      


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