आईने का रहस्य भाग 19
आईने का रहस्य भाग 19
सभी लोग यह देख हैरान होते हैं कि बेड हवा में लटके हुए थे, अब उस पर कैसे चढ़ा जाए यह एक समस्या थी , तभी एक बुजुर्ग तांत्रिक महतो ध्यान देते हैं तो सभी बेड कि परछाई फर्श पर पड़ रही थी, !!
वह कुछ विचार कर कहते हैं ," हम सभी बेड पर नही उसकी परछाई में सोएंगे,"!!
मधु और दूसरी औरत भी कहती हैं कि *"वह जमीन पर सो नही सकते हैं, एक आदमी पूछता ही की ऊपर बेड पर क्या प्रोब्लम है, *"!!
जय कहते हैं " कोई एक बड़ा सा पत्थर उठा कर लाओ,"!!
एक आदमी बाहर से लाता है !!
, जय विशाल से कहते हैं ," विशाल जरा इस पत्थर को एक बेड पर उछालो ,"!!
विशाल उसे सामने वाले बेड पर उछालता है जैसे ही बेड पर पत्थर पड़ता है तो बेड उसे ऊपर उछलता है तो वह पत्थर उड़कर छत तोड़ता हुआ निकल जाता है और कहां जाकर गिरता है किसी को नहीं पता , सभी एक दूसरे का मुंह देखने लगते हैं ,अगर गलती से भी कोई चढ़ जाता तो उसकी मृत्यु निश्चित तौर पर थी, अब वह बुजुर्ग महतो जी बेड के परछाई पर सोते हैं तो नीचे से एक सुंदर सा मखमली बेड बाहर आता है और महतो जी उस पर लेटे हुए थे और कुछ सेकंड में वह सो भी गए सभी धड़ाधड़ परछाई पर लेटते है और सबका बेड बाहर आता है और सभी तुरंत सो जाते हैं, !!
जब सबकी नींद खुलती हैं तो सभी एकदम फ्रेश और तरो ताज़ा लग रहे थे, वह लोग फटाफट फ्रेश होते हैं तभी सेविकाएं आकर कहती है ,*" आप सभी का अल्पाहार तैयार हैं ,आप सब ग्रहण कर सकते हैं ,*"!!
सभी ब्रेक फास्ट के लिए जाते हैं , वहा विभिन्न प्रकार के व्यंजन दिखाई देते हैं, सभी दबा कर ब्रेक फास्ट करते हैं ,तभी वह महिला साधक यमुना कहती है " मेरे ख्याल से कुछ मिठाई हमे रख लेनी चाहिए ,"!!
सभी एक दूसरे को देखते हैं और सबकी हामी आंखो ही आंखों में हो जाती है कुछ तो मिठाई के लालची भी थे ,मिठाई व्यंजन ही ऐसा है की मन में लालच आ ही जाता है, वह लोग थोड़ा अधिक रखते हैं, सभी वहां से बाहर आते हैं ,दरअसल इस तिलिस्मी नगरी में दिन रात का पता ही नही चल रहा था , उसी समय आवाज़ आती है " उम्मीद है कि आप लोग एकदम तरो ताज़ा हो गए होंगे ,तो फिर हम आगे बढ़ते हैं ,आप लोगो को पता है की आपने कितने दरवाजे पार किए ,"!!!
विशाल कहता है ," 5 दरवाजे ,"!!!
आवाज़ कहती है ," बहुत सही , यदि आप तीन कहते तो फिर दो दरवाजे अपने आप नए आ जाते ,आप लोग समझदार हो, "!!
दुर्गा पूछती है " ये तिलिस्म आपने बनाया है , "!!
आवाज़ कहता है , " जी नहीं इसे बनाया तो एक बड़े तांत्रिक जादूगरनी ने है ,जिसका इरादा इस पूरे दुनिया को तिलिस्म में क़ैद करने की है ,पर अब वह ख़ुद अपनी ही जाल में फंसकर खतम हो गई, पर पता नही कितने लोग इसमें फंसे हैं ,में भी उन्ही में से एक हुं पर मुझे उसने अदृश्य कर रखा है , मैं देख सब सकता हूं , पर कुछ कर नहीं सकता हूं ,मेरा काम सिर्फ यहां की व्यवस्था करनी है, यहां जो भी है सब उसीकेे जादू के अधीन है , जैसे ही वह मणि मिलेगी हम सब मुक्त हो जायेंगे, अब आप लोग आगे बढ़ो, सामने छठा दरवाजा है, "!!
सभी देखते हैं तो सामने एक दरवाजा दिखता है उसके फ्रेम में नक्काशी की गई है जो आइने के फ्रेम में था, जय उस को ध्यान से देखता है ,*"दुर्गा कहती है यह भाषा समझ नही आ रही है ,मैने कई किताबे देख ली , पुरातन भाषाओं को भी खंगाल लिया ,पर कुछ नहीं मिला,*"!!
एक प्रौढ़ तांत्रिक देवा कहता है " यह केवल भ्रम पैदा करने के लिए है ,यह कोई भाषा नही है, मैने यहां भी पूछा था,पर किसी को नही पता, " !!!
तभी आवाज़ आती हैं ," यह एक अलग भाषा है जो कहीं नहीं मिलेगी , उस जादूगरनी ने अपने राज्य के लिए नई भाषा का आविष्कार किया था पर वह उसके साथ ही चला गया, "!!
सभी दरवाजे को पार करने लगते हैं दरवाजा पार कर के वह दूसरी तरफ पहुंचते हैं , तो आश्चर्य चकित रह जाते हैं सामने बड़ा ही सुन्दर पहाड़ियों का शहर था , प्रकृति की अदभुत झलकियां दिखाई पड़ रही थी , रंग बिरंगे फूल ,फल और पंछी दिखाई पड़ रहें थे , यह सब देख सब खुश होते हैं, !!
तभी आवाज आती है, " आप सभी को आज दिन भर में ये पहाड़ी पर कर सातवें दरवाजे तक पहुंचना है , " !!!
अब सबकी हालत खराब होती है, बुजुर्ग लोग कहते हैं हम कैसे चढ़ेंगे इतनी चढ़ाई , एक कहता है " जो इतने भूत प्रेत साध रखे हों उनका उपयोग क्यों नहीं करते हो ,"!!
वह कहता है , " कोशिश करते हैं ,पर मुझे नही लगता की यहां पर वह तंत्र मंत्र काम करेगा , अब तक हमे यहां कोई भूत प्रेत नजर ही नहीं आया, "!!
वह कोशिश करता है पर उसका कोई उपयोग नहीं हो पाया, एक और व्यक्ति कहता है की "अभी हमने पहले दरवाजे में तो मंत्रो के उपयोग से ही तो उन मगरमच्छों को रोका था, अब क्या हो गया, ,"!!!
आगे की कहानी अगले भाग में पढ़िए""

