आईने का रहस्य भाग 18
आईने का रहस्य भाग 18
सभी लोग खड़े होकर दुर्गा की मां मधु बेहोश हुई पड़ी थी, दुर्गा को रोना आ रहा था , वैसे एक वैध भी साथ हैं पर उनके पास दवा नही है, भीमा कहता है ,अगर किसी को एतराज ना हो तो मैं इन्हे ठीक कर सकता हुं,!!
दुर्गा कहती हैं ," भाई आप को जो करना है करिए और इनको होश में लाइए ,"!!
भीमा मधु के पास बैठता है, और पहले उनके तलवों को रगड़ने लगता है ,और फिर शरीर के कुछ पार्ट में वह उंगलियों से दबाता है , आदिवासियों में एक खासियत होती है , उन्हे रोगों को ठीक करने कि बहुत सारे तरीके पता होती हैं, !!
भीमा के ट्रीटमेंट करने से मधु के शरीर में हल्की हलचल होती है, तो सभी के चेहरे पर मुस्कान आती है, थोड़ी ही देर में मधु होश में आती है वह उठ कर बैठ गई , सभी खुश होते हैं, दुर्गा मधु के गले लग जाती हैं , सभी भीमा कि तारीफ करते हैं,!!
उसी समय आवाज़ आती है " अगर आप सब ठीक हैं तो आगे बढ़ा जाए, "!!
विशाल कहता है ," हम तैयार हैं , बस हमारी एक सदस्या की तबियत बिगड़ी हुई है , उन्हे थोड़ा आराम करना पड़ सकता है,"!!
तो वह कहता है," ठीक है वैसे भी समय बहुत हो चुका है आप लोग आज आराम करिए कल सुबह से अगला दरवाजा खोला जायेगा "!!
सभी खुश होते हैं, फिर आवाज़ आती है ," आप सब अपनी बाई तरफ चलिए आपको एक दरवाजा दिखेगा, उसके अंदर जाते ही आप लोगो को खाने रहने की व्यवस्था मिल जाएगी, *"!!
सभी बाई तरफ जाते हैं,वहां एक दरवाजा नजर आता है तो सब उसके अंदर जाते है तो दूसरी तरफ एक सुंदर सा फूलों से भरा एक बाग दिखाई देता है ,
सब बहुत खुश होते हैं , अचानक एक वृद्ध तांत्रिक जगत कहता है ," इन फूलों के पास मत जाना ये खतरनाक जहरीले हैं ,"!!
सभी चौक कर उसको देखते हैं, तभी जय भी बोलते हैं," सही कहा है जगत जी ने ये जहरीले हैं ,आप लोग देखिए इतने बड़े बैग में इतने फूल खिले हुए हैं पर एक भी भौरा या तितली नही दिखाई पड़ रही हैं और ना एक भी पक्षी इसका सीधा मतलब है कि यह जहरीला है, इसलिए इसके पास भी नहीं जाना , !!
उन्हे सामने एक छोटा सा कोठी दिखाई देता है , तो सब उस ओर जाते हैं , अंदर जाते ही उन्हे कई प्रकार के व्यंजन दिखाई देते हैं , जिन्हे देख सबके मुंह में पानी आ जाता है, तभी फिर से जय उन्हे रोकता है तो सब ध्यान से देख कर कह देते हैं अरे ये भी जहरीला है, !!
सब के चेहरे उतर जाते हैं, उन्हे सच में बहुत भूख लगी थी, क्योंकि इतनी भाग दौड़ में काफी समय भी लग गया था, विशाल कहते ," आगे बढ़ते हैं ,शायद कुछ और मिल जाए, "!!
सब एक दूसरे को देखते हैं और फिर जय की तरफ देखते हैं, जय आगे बढ़ जाता है, सब उसके पीछे जाते हैं, वह लोग कोठी के दूसरी तरफ जाते हैं, तो वहां पर भी सारी व्यवस्था थी और वहा लड़कियां भी सेवा के लिए खड़ी थी वह उन्हे प्यार से कहती हैं , "आप लोगो का स्वागत है, आईए भोजन प्राप्त करिए , "!!
सभी जाकर बैठते हैं ,और लड़कियां भोजन देना शुरू करती हैं , सभी पेट भर खाते हैं और फिर पूछते हैं ,की आराम कहा किया जायेगा तभी लड़कियां कहती हैं कि आप सबके आराम की व्यवस्था इसके आगे वाले दरवाजे के अंदर है ,!!
वह महिला तांत्रिक यमुना कहती हैं " हम और कितने दरवाजे पार करेंगे, " !!
जय चौकता है, क्योंकि इस तरफ किसी का ध्यान ही नही गया था , उन्होंने तो चौथा दरवाजा तो यूं ही पार कर लिया था जिसका किसी को पता ही नही चला अब पांचवा दरवाजे में जा रहे थे , पर वह अभी किसी से कुछ नहीं कहते हैं , चुप चाप पांचवें दरवाजे में जाते हैं, !!
उसके अंदर जाते ही उन्हे वहा बहुत सुंदर बाग फिर दिखाई देता है , जिसमे रंग बिरंगे खूबसूरत फूल खिले थे और उनमें से बहुत बढ़िया सुगंध भी आ रहा था , वहा भौंरे भी थे और तितलियों के साथ साथ रंग बिरंगे पंछी भी थे, !!
भीमा एक फूल को देख कहता है " अरे यह तो अद्वितीय फूल है इसको पास रखने से अपनी शक्ति दूनी हो जाती है ,सभी को एक एक फूल तोड़कर अपने पास रखने को कहता है , !!
सभी फूल तोड़ने के लिए आगे बढ़ते हैं, तो दुर्गा कहती हैं ," सब लोग एक एक फूल तोड़ेंगे उस से अधिक नही और किसी दूसरे फूल को हम नही तोड़ेंगे, सभी लोग एक एक फूल तोड़ते हैं और अपने पास रखते हैं , !!
उसके बाद लोग आराम गाह कि ओर जाते हैं वहा उनके सामने बेड तो दिखाई देता पर वह हवा में लटके हुए हैं , सभी परेशान होते हैं,""!!
आगे कि कहानी अगले भाग में पढ़िए,"!!

