आईने का रहस्य भाग 11
आईने का रहस्य भाग 11
त्रिशाला उन्हे बताती हैं की 5 बुजुर्ग ,3 महिला ,6 जवान और 7 प्रौढ़ तांत्रिक एक साथ एक जगह जमा होंगे तो वह तिलिस्म खुद समझ जायेंगे और उसे तोड़ने का प्रयास करेंगे अगर नही तोड़ पाए तो जो सजा है वो भुगतेंगे, इसके पहले जो लोग भी आए हैं, उन्होंने यहां से निकलने के लिए प्रयास किया और अब सजा भुगत रहे हैं, दुर्गा और उसकी मां ने भी मना करने के बाद भी प्रयास किया और फिर जो होना था हुआ।
विशाल कहता है " वो हैं कहां ,और उनके चेहरे बदल गए तो हम उन्हे पहचानेंगे कैसे ।,"
त्रिशाला कहती है ," सुना है प्यार करने वाले तो आंखे बन्द कर भी अपनी प्रेमिका के धड़कनों को सुन लेते हैं और तुम सामने देख कर भी नही पहचान पाओगे , पर वह तो तुम्हे पहचान लेगी।"
विशाल कहता है " पर वह हैं कहां और कब मिल पाएंगे उस से।"
त्रिशाला मुस्कुराती है तो और भी भयानक लगती उसके आरी को तरह नुकिले दांत और सांप की तरह दो मुंह जीभ देखकर तो अच्छे अच्छे की पैंट गीली हो जाए, ?"
वह मुस्कराकर कहती है " इतनी जल्दी अब तक क्यों नहीं दिखाई थी ,पहले आ जाते तो कब का देख लेते थे , दिखावे का प्यार है! "
विशाल चिढ़ कर कहता है ," एक तो सबको जबरदस्ती उठा कर ले आ रही हो, और ऊपर से ताने मार रही हो।"
वह मुस्कराकर कहती है " गुस्सा नही करना है , यही गलती तो मेरे पिताश्री महाराज ने किया था, जिसकी सजा हम आज तक भुगत रहे हैं, तुम मत करो! ये सब संजोग हैं ,होनी को कोई नही टाल सकता ह,!"
जय करण कहते हैं " ये सब बेवजह की बाते छोड़ो अब आगे क्या करना है ये बताओ!"
त्रिशाला कहती है," हम अभी इसी वक्त चल रहे हैं।"
वह अपने कमांडो लड़कियों को देखती हैं तो वह घूम कर आगे बढ़ते हुए कहती हैं" आइए राजकुमारी जी!"
राजकुमारी त्रिशाला के साथ तीनों ही एक बड़े से हाल में पहुंचते हैं , वहां पर पहले से ही काफी लोग मौजूद थे,और कुछ लोग अलग खड़े थे , विशाल को देखते ही , दुर्गा उछल पड़ती हैं ,वह उसके इशारा करती है , तो विशाल की नजर उस पर पड़ती है तो वह भागती हुई आती है और उसके गले लग जाती हैं, विशाल तो पहले उसे देख कर डर जाता है फिर उसका बॉडी देख समझ जाता है की यह दुर्गा ही है, दुर्गा की मां भी आती हैं उसकी आंखो में आंसू है ,दुर्गा तो विशाल के गले लग कर रोने लगती है, !!
त्रिशाला कहती हैं ," अब हम आप सभी से कुछ निवेदन करने जा रहे हैं,सभी कृपा कर ध्यान से सुनें ,"!!
सब उसकी तरफ देखते हैं, और शांत होते हैं,!!
त्रिशाला कहती हैं " आज हमारे इंतजार की घड़ी समाप्त हुई, जिस चौरस कि चाल के तिलिस्म में हम कैद हैं उसको तोड़ने का समय आ गया है, हमारे पास वह 21 लोग इक्कठे हो गए हैं, जिनकी हमे जरूरत थी अब हम इन्ही 21 लोगो के भरोसे है, ये चाहे तो हमे इस तिलिस्मी मुसीबत से छुटकारा दिला सकते हैं, या फिर हमारी तरह ये भी यहां फसे रहेंगे ,पर इनका मिलना और समय पर मिलना यह जाहिर करता है की हम सब बहुत जल्दी मुक्त होने वाले हैं, ये सभी कल से अपने मुहिम में निकलेंगे ,और हम सभी को इनकी हर हालत में रक्षा करना है , और जैसे भी हो सके इनकी सहायता करनी है, और हमारी इन सभी लोगो से गुजारिश है कि इन्हें जो भी दुख हमारी वजह से हो रहा है उसके लिए क्षमा करें ,और हमारी सहायता करें, ,"!!!
जय करण कहते हैं " राजकुमारी त्रिशाला , हमे करना क्या है? "
त्रिशाला मुस्कुराती है तो विशाल कहता है " आप सभी से अनुरोध है कि आप लोग मुस्कराया मत करिए, हम डर जाते हैं।"
त्रिशाला कहती हैं '"आप फिर मेरे पिताश्री महाराज वाली गलती कर रहें हैं ,में आप लोगो से निवेदन करती हूं ,आप सब जिस कार्य में जा रहे हैं , वहां इस तरह की छोटी छोटी गलतियां बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है, आप सभी लोगो को अपने गुस्से, घृणा , और घमंड से दूर रहना होगा ,अन्यथा हम सफल नहीं हो पाएंगे, जितना आप सब नम्र रहेंगे उतना ही सफलता हमारे करीब होगी, आज आप 21 लोग साथ रहकर एक दूसरे को समझ लीजिए क्योंकि कल से आप लोगो को मिलकर काम करना है, बाकी लोग तो अब तक समझ गए हैं बस आप तीन लोग समझ लीजिए ,बाकी बाते मैं आप लोगो को कल सुबह निकलने से पहले ही बताऊंगी।! "
"वह सबको देखती है और अपने कमांडो के साथ वहा से जाती हैं!
दुर्गा और उसकी मां इन तीनों के साथ खड़ी है तभी भीमा आकर कहता है , " मालकिन हमको नहीं पहचाने हम भीमा।
सभी चौक कर उसके अजीब से चेहरे को देखती है, दुर्गा कहती है ," तुम कब आए ,"?? ""!!
आगे की कहानी अगले भाग में पढ़िए""!!

