Pawan Gupta

Drama Horror Tragedy


4.2  

Pawan Gupta

Drama Horror Tragedy


10th क्लास के जोकर्स

10th क्लास के जोकर्स

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इस बार लोकडाउन में सब घर पर बोर हो रहे थे, शोभा भी अपने बीते दिनों को याद करती और खुश होती पर कभी पास्ट लौट के कहा आता है, बस यादें ही रह जाते है। पहले उन यादों में जाकर खुश होते है फिर दुखी होते है की काश वो जिंदगी फिर से जी ले, यही तो सोभा के साथ भी हो रहा था कि अचानक उसको एक आइडिया आया कि आज कल तो सब सोशल मिडिया पर होते है।


शोभा को अपने 10th के दोस्तों की ज्यादा याद आती थी क्योंकि 10th क्लास था ही सबका केंद्र,सारी मस्ती सारी पढ़ाई हंगामा पिटाई सब तो था 10th क्लास में। टीचर एक विरुद्ध प्रोटेस्ट करना शिकायत करना सब तो था, शायद इसलिए शोभा को इतने सब में सिर्फ 10th क्लास ही याद आया।

फिर उसके मन में आया की सबके बच्चे हो गए होंगे क्या कोई किसी को पहचानेगा, किसी के पास इतना टाइम होगा की कोई किसी से बात करे पर यादें होती ही है जालिम ...

सारे सवालों को दरकिनार कर शोभा ने अपना फेसबुक अकाउंट बना ही लिया और सबको फेसबुक पर ढूंढने लगी।

फेसबुक पर उसे प्रीती रजनी इन्दु पवन अमित और आशीष मिल गए,पर बहुत कोशिशों के बाद भी रश्मि और अंजलि नहीं मिली।


 खैर जो मिले उनसे मिलने की ख़ुशी कम न थी,शोभा ने फटाफट सबको फ्रेंड रिक्वेस्ट सेंड किया कुछ के रिप्लाई तुरंत आ गया और कुछ का एक दिन बाद पर आखिरकार सब लोग मिल गए। सोभा ने एक ग्रुप क्रिएट किया 10th क्लास के जोकर्स के नाम से और सबको ऐड किया, अब इस लोकडाउन में सबको एक काम मिल गया था,अब सबको सबके बारे में पता था सब इतने खुश थे की बस पूछो मत सबकी अलग अलग लाइफ।


प्रीती हाउस वाइफ थी और उसका तीन साल का बेबी था,हसबैंड एन आर आई थे।इन्दु जॉब करती थी किसी लैब में उसके दो बच्चे थे और उसके हसबैंड मिलिट्री में थे। रजनी भी हाउस वाइफ थी वो बहुत बिजी रहती थी उसके भी २ बच्चे थे उसके हसबैंड ऍम एन सी कंपनी में अच्छे पोस्ट पर जॉब करते थे।

शोभा टिकटोक लवर हाउस वाइफ दोनों थी, उसके हसबैंड भी गवर्नमेंट जॉब करते थे, अमित की अभी एक साल शादी के हुए थे और वो दिल्ली में एकाउंट्स डिपार्टमेंट में जॉब करता था,आशीष अमेज़न में स्टोर मैनेजर था उसकी भी एक प्यारी बेटी थी। पवन का अपना वर्कशॉप था साथ में पवन लेखक भी था पर पवन अब तक कुंवारा था। इस ग्रुप का सबसे चाहिता सदस्य पवन ही था।


अब ग्रुप में खूब बातें होती थी लोकडाउन में सबका काम खत्म हो जाता, ऑफिस जाने की कोई चिंता नहीं होती। सब अपनी अपनी क्वालिटी को एक दूसरे के सामने रखते,प्रीती मिमक्री करती शोभा और इन्दु टिकटोक पर वीडियो बनती रजनी होर्रर स्टोरी पढ़ती सुनाती और हमें सजेस्ट भी करती,आशीष अमित को मूवीज का सौक था तो वो लोग मूवी के बारे में बताते,और पवन अपनी कहानियो के बारे में ....


 सब बहुत खुश थे आज 15 सालों बाद फिर से सब बच्चे बन गए थे, सब कहते है कि पास्ट लौट के नहीं आता पर इस ग्रुप का तो पास्ट ही प्रजेंट बन गया था, वही बचपना लड़ाई बदमाशियां सब चालु हो गई थी सब एक दूसरे को कम्मेंट करते शोभा वीडियो बनाकर बोलती पवन देख तेरे लिए और फिर सब हँसते यही सब नौटंकी चलती रही सब अब छोटे हो गए थे।

जहाँ इस लोकडाउन में लोगो को खाने की पैसे की टेंशन थी वही ये लोग टेंशन से कोसो दूर थे,जिनको लोकडाउन से डिप्रेशन था वो भी खुश थे,लाइफ बहुत मस्ती में बीत रहा था कि पता चला लोकडाउन अब खत्म होने वाला है जॉब शुरू होने वाली है ...   


एक दिन शोभा ने लोकडाउन खत्म होने से पहले सबसे कहा कि लोकडाउन के हटने के बाद हम सब मिलकर हिल स्टेशन चलेंगे,सब राजी हो गए आखिर सबको एक दूसरे से मिलने का मन था। अब सब तय था लोकडाउन हटा उसके पांच दिन बाद शोभा ने कही घूमने का प्लान करने को कहा,पवन ने सबको सजेस्ट किया की,हिमाचल प्रदेश में स्थित हिल स्टेशन डलहौजी चलते है।


डलहौजी धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित एक बहुत की खूबसूरत पर्यटक स्थल है। पांच पहाड़ों (कठलौंग, पोट्रेन, तेहरा, बकरोटा और बलुन) पर स्थित यह पर्वतीय स्थल हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले का हिस्सा है। अंग्रेजों ने 1854 में इसे बसाया और विकसित किया तथा तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डलहौजी के नाम पर इस जगह का नाम डलहौजी रखा गया। अंग्रेज सैनिक और नौकरशाह यहां अपनी गर्मी की छुट्टियां बिताने आते थे। मनमोहक वादियों और पहाड़ों के अलावा यहां के अन्य आकर्षण प्राचीन मंदिर, चंबा और पांगी घाटी हैं।


ये सब सुन कर सब डलहौजी जाने को तैयार हो गए हम सबने मिलकर एक ७ सीटर कैब बुक की,वो कैब दिल्ली से डलहौजी होटल तक जाने के लिए बुक थी उसके बाद हमें अपने हिसाब से घूमना था। हम जिस होटल में रुके वो ख़ाली ख़ाली सा ही था, दो रूम हमने बुक किया था, रूम नम्बर 16 और रूम नम्बर 13। 16 रूम नम्बर लड़कियों का और 13 रूम नम्बर लड़कों का अलग। पर रात को नींद नहीं आ रही थी तो सब एक ही रूम रूम नम्बर 13 में बैठ कर टाइम पास के लिए कुछ खेलना शुरू किया। इस गेम में हम सबको एक गोल घेरा बनाकर बैठना था,और एक बोतल को एक आदमी घुमायेगा , बोतल का अगला हिस्सा जिसकी तरफ रुकेगा उसे एक टास्क करना होगा वो भी उसी के मर्जी का।


सब इस गेम के लिए तैयार हो गए, पवन ने बोतल घूमा कर गेम को शुरू किया बोतल का अगला सिरा शोभा पर जाकर रुका,

प्रीती - अब बता शोभा क्या करेगी।

इन्दु - चल जल्दी बोल चल डांस क़र दे।

रजनी - नहीं तू कोई गाना सुना रोमंटिक ...

 शोभा ने कहा रुको मैं एक्टिंग के साथ गाना गाती हु ...


सब मिलकर शोर मचने लगे शोभा ...शोभा..शोभा..ये ....

शोभा ने एक्टिंग और हलके डांस के बाद गाना शुरु किया। किताबें बहुत सी पढ़ी होगी तुमने मगर कोई चेहरा भी तुमने पढ़ा है ...पढ़ा है मेरी जान नज़र से पढ़ा है प्रीती ने पीछे से सोभा का साथ दिया, तभी रजनी बोली बता मेरे चेहरे पे क्या क्या लिखा है ...

और सब खिलखिला के हँस पड़े, उसके बाद बोतल शोभा ने घुमाया, इस बार बोतल इन्दु पर रुका,

 शोभा - अब बोल इन्दु तू क्या करेगी।

 रजनी - कुछ मस्त सा सुना दे।

 अमित - इन्दु तेरी आवाज़ अच्छी है न और तू फौजियों की रेस्पेक्ट भी बहुत करती है तो चल कोई देश भक्ति गाना ही सुना दे ....

 इन्दु - ओके सुनाती हु सब साथ देना.


 ओ...ओ..ओ ....ओ...

  संदेशे आते है हमें तड़पाते है कि चिट्ठी आती है तो पूछी जाती है कि घर कब आओगे की घर कब आओगे लिखो कब आओगे कि तुम बिन ये घर सुना सुना है ....

 सब इन्दु के साथ ये गाना गुनगुना रहे थे पर गाना खत्म होते होते इन्दु की आँखों में आंसू आ गए थे उसे अपने हसबैंड की याद आ गई थी।

 हम सब मिलकर उसे चुप करवाए और फिर इन्दु ने बोतल घुमाया। 

 इस बार बोतल आशीष पर रुकी ..

आशीष ने कहा कि मैं एक जोक सुनाता हूँ

 

कल एक साधू बाबा मिले...

पप्पू ने पूछा - कैसे हैं बाबाजी.?

बाबाजी बोले - हम तो साधू हैं बेटा...

हमारा 'राम' हमें जैसे रखता है हम वैसे ही रहते हैं! 

तुम तो सुखी हो न बच्चा..? 

पप्पू बोला - हम तो संसारी लोग हैं बाबाजी

हमारी 'सीता' हमें जैसे रखती है, हम वैसे ही रहते हैं...!!! 

     

 हां ....हां ..हां...हां ...सब हसन पड़े, तभी प्रीती ने सबसे बोला अरे सारे जोक पत्नियों पर क्यों बनते है पतियों पर क्यों नहीं बनते तभी आशीष ने कहा ... 

 क्यूंकि पति बेचारे अपनी पत्नियों के जुल्मो सितम के मारे होते है,

 हम सब लड़के हँस पड़े, हां ...हां.. वैरी फनी ..मुँह चिढ़ाते हुए प्रीती ने बोला।


अब आशीष ने बोतल घुमाया और बोतल प्रीती पर रुका,

 सब चिलाने लगे प्रीती... प्रीती ... 

 रजनी ने बोला सुना कुछ तड़कता फड़कता 

   

 प्रीती - जानी ..जिसके घर शीशे के हो वो दूसरों के घर पर पत्थर नहीं मारते... एक्टर राजकुमार के स्टाइल में बोली सब हस पड़े।

 अब प्रीति ने बोतल घुमाया बोतल पवन पर जाके रुकी।

 सब फिर शोर करने लगे, पवन...ये ...पवन 


इन्दु ने कहा देख पवन यहाँ सब मैरिड है बस तू ही कुंवारा है तो तू किसी लड़की को प्रपोस कैसे करेगा ये बता यही तेरा टास्क है।

पवन ने कहा करना किसको है प्रपोस ...


 शोभा ने कहा अमित को समझ ले की ये लड़की है इसका नाम अमिता है अब प्रपोस क़र...

   

पवन खड़ा हुआ अमिता का हाथ पकड़ा और बोला,आप मेरे दिल में यू समाये ....आप मेरे दिल में यू समाये ,जैसे बाजरे के खेत में सांड घुस आये !

सब ठहाके मारमार कर हँसने लगे,हँसते हँसते सबकी साँसे फूल गई फिर जब मामला शांत हुआ तो बोतल पवन ने घुमाया,इस बार बोतल रजनी पर जाकर रुकी।


रजनी ने पहले ही कह दिया मैं होर्रर स्टोरी ही सुनाऊँगी, मुझे कुछ और नहीं आता, सब सुनने को तैयार हो गए, सब आराम से रजनी पर नज़रे गड़ाए बैठ गए।

रजनी ने कहानी शुरू किया। 


गर्मियों की बात है,सात दोस्त बहुत दिनों बाद मिलते है,और डलहौजी हिल स्टेशन जाने का प्लान करते है, डलहौजी पहुँचकर सब एक होटल में रुकते है,होटल एक दम खाली और वीरान होता है,और उन लोगो को रूम नम्बर 13 में ठहराया जाता है, उन सबको नहीं पता की रूम नम्बर 13 एक श्रापित नम्बर होता है।

   कोई भी होटल वाले 13 नम्बर का रूम नहीं बनाते है, उन्हें मालूम ना होने के कारन सब वही रुक जाते है,और फिर टाइम पास के लिए गेम खेलते है और जैसे जैसे रात बढ़ती है,उस रूम में खतरा भी बढ़ता जाता है।

  इतना रजनी ने कहा ही था कि लाइट कट गई।

अब उस सन्नाटे में चीख सुरु हो गई,इतने में फिर लाइट आ गई,लाइट डराने के लिए आशीष ने बंद किया था।

   पर सब डर गए अब आशीष भी डर गया उन लोगो की चीख से।

    वो भी लाइट जलाकर उन लोगो के पास आ गया वो सब एक कोने में सहमे हुए से बैठ सिवाए एक रजनी के रजनी वही बैठी रही और आशीष भी उसी कोने में सहमा बैठा था।


लाइट कभी जलती तो कभी बुझती जब लाइट जलती तो रजनी रूम के बीच में बैठी दिखती बस यही कहती बार बार हेल्प ....हेल्प।

और लाइट बुझती तो बाथरूम का दरवाज़ा खुलता उसमे एक लड़की बैठी दिखती और आवाज बाथरूम से आती हेल्प...हेल्प...

सबकी तो डर के मारे हवाइयां उड़ी थी, कोई क्या करे क्या नहीं कभी रोने की आवाज़ कभी गुर्राने की आवाज़ आती रही,दो बजे से तीन बजे तक यही सब चलता रहा तीन बजकर एक मिनट पर लाइट जली रह गई दुबारा नहीं बुझी,और रजनी बेहोश हो चुकी थी।

  लाइट के जलने के पांच मिनट बाद हम दौड़ कर रजनी के पास गए और उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारे, रजनी होश में आ गई।


जब हम सबने उससे पूछा कि अब कैसी है वो तो उसे कुछ भी पिछले एक घंटे में घटी घटना याद नहीं थी, उसने बताया की जब वो स्टोरी सुरु करने वाली थी तब उसने घड़ी देखा था।


  घड़ी में दो बज रहे थे उसके बाद का रजनी को कुछ भी याद नहीं था, शायद वो जो भी आत्मा थी वो दो बजे ही रजनी को पॉजिस्ट कर चुकी थी,और हम किसी आत्मा के मुँह से ये कहानी सुन रहे थे।

 डर के मारे नींद कहा आनी थी, हम सब 6 बजे तक वही रहे फिर रूम नम्बर 16 में जाकर फ्रेश होकर सब घूमने निकले।

 वहां से निकलने से पहले होने होटल के मैनेजर से हमने रूम नम्बर 13 को लेकर शिकायत भी की।

 पर मैनेजर ने बताया की उनके होटल में रूम नम्बर 13 था ही नहीं।

हमें तो रूम नम्बर 15 और 16 अलॉट किया गया था !

मैनेजर ने अपने रजिस्टर में हमारे सिग्नेचर भी दिखाए, फिर अब हम क्या बोलते चुप चाप वहा से निकल गए, मन और दिमाग को फ्रेश करके हम घूमने आये थे तो घूमने के लिए निकल गए डलहौजी के सभी अच्छी जगहों पर शाम तक घूम कर रात को ही दिल्ली के लिए कैब बुक करके दिल्ली के लिए रवाना हो गए अब सब शांत थे पहले की तरह कोई मस्ती नहीं कर रहा था सुबह 12 बजे तक सब अपने अपने घरो में थे !

वो रात हम 10th क्लास के जोकर कभी भुला नहीं पाए ....


       

       


  



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