Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Nilesh Vora

Drama


3  

Nilesh Vora

Drama


ज़िम्मेदारियाँ

ज़िम्मेदारियाँ

1 min 13.9K 1 min 13.9K

चाहूं भी तो कुरबान

जान करने नहीं देंगी

मेरी ज़िम्मेदारियाँ

मुझे मरने नहीं देंगी !


बन जाउं महादेव

ऐसी इच्छा नहीं

ज़माना हलाहल से

कहीं अच्छा नहीं

हलाहल को मेरे गले से

उतरने नहीं देंगी

मेरी ज़िम्मेदारियाँ

मुझे मरने नहीं देंगी !


ना बनता मैं मानव

तो क्या बात थी

तकदीर में मगर

स्याह ये रात थी

अवतार किसी और का

धरने नहीं देंगी

मेरी ज़िम्मेदारियाँ

मुझे मरने नहीं देंगी !


ऐ ज़िम्मेदारियों !

अगर तुम यहां ना होतीं

मर जाता मैं

जीते जी

ज़िंदगी फना ना होती

चाहत पर मेरी 'निल'

कर गुज़रने नहीं देंगी

मेरी ज़िम्मेदारियाँ

मुझे मरने नहीं देंगी...!


Rate this content
Log in

More hindi poem from Nilesh Vora

Similar hindi poem from Drama