ये रिश्ता
ये रिश्ता
ये ज़िन्दगी
ये घर, परिवार
सब कुछ की अन्दर
छुपी हुई है
ये रिश्ता।
ये मित, ये गीत,
ये ज़िन्दगी, ये जग,
ये संसार
सब कुछ है
ये रिश्ता।
ये माता, ये पिता,
ये भाई, बहन
हर इन्सान
सब कुछ का
पहचान है
हमारे ये रिश्ता।
ये फूल, ये खुशबु
ये बारिश
ये हावा, धूप
ये सूरज, चांद
सबका नाम है
ये रिश्ता।
ये तन, मन,
ये बाग, बगीचा
वन, उपवन
ये अंधी, तूफान
सबको लेकर
जी रहा है
हर इन्सान
ये सब है हमारे
हर पल की मेहमान
ये सबको लेकर
हर इन्सान
उनकी जीवन जीता
येही है हमारे सबकी
जिन्दगी की वास्तविकता
येही है हम सबका पहचान
सबका साथ
हमारी ये रिश्ता।
जग में दो पल की है
ये ज़िन्दगी
सबसे अच्छा
सबसे सुन्दर और
सबसे प्यारा है
हम सबका ये रिश्ता।
कौन कहता है
धन ही बड़ा
कौन मानता है
मन ही बड़ा
लेकिन इस दुनियां में
सबसे बड़े है
इन्सान की इन्सानियत और
इन्सान की साथ इन्सान की
कैसा मजबूत है ये रिश्ता ?
