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नमिता गुप्ता 'मनसी'

Abstract

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नमिता गुप्ता 'मनसी'

Abstract

ये रात..

ये रात..

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एक पुल की तरह जोड़े रखती है

ये रात

दोनों तारीखों को,

पर, कई बार

छूटती हुई तारीखें

छूटती ही नहीं,

घेरे रखतीं हैं

सपनों को

अपनी पूरी बेचैनियत के साथ !!


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