STORYMIRROR

नमिता गुप्ता 'मनसी'

Abstract

2  

नमिता गुप्ता 'मनसी'

Abstract

ये रात..

ये रात..

1 min
121

एक पुल की तरह जोड़े रखती है

ये रात

दोनों तारीखों को,

पर, कई बार

छूटती हुई तारीखें

छूटती ही नहीं,

घेरे रखतीं हैं

सपनों को

अपनी पूरी बेचैनियत के साथ !!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract