ये क्यूँ सपना सा लगता है
ये क्यूँ सपना सा लगता है
ये क्यूँ सपना सा लगता है
तू क्यूँ अपना सा लगता है
तुम आशा की दहलीज बनो
ये सच् जपना सा लगता है !
मुश्किल तब तो होती है
जब दूर मंजिल होती है
तू भी हार नहीं सकता
इतना ठाना सा लगता है !
मैं तो साथ सदा हूँ
मैँ तो पास खडा हूँ
घवराना क्यूँ सकुचाना
ये तो माना सा लगता है !
मुद्धत हो जाये फिर भी
अद्भुत हो जाये तब भी
आफत की आंधी य़ा तूफां
अपना, अपना सा लगता है !!
