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Jeetal Shah

Abstract

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Jeetal Shah

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ये ऐसा कयूँ

ये ऐसा कयूँ

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है खून सभी का एक तो ऐसा क्यूँ

है सभी ककी रू एक तो ऐसा क्यूँ

है सभी का लहु एक तो फिर ऐसा क्यूँ

है सभी के दिलों में धड़कन तो फिर ऐसा क्यूँ


है सब के रंग रूप अलग, 

पर फिर भी कयु मतभेद,

है सभी भाषाओं का अलग ही आनंद,

बोलते बोलते लेते हैं सब आनंद,


क्या अपना क्या बेगाना,

सभी धर्म और सभी,

भाषाओं का है ये,

मिला झोला खेल,


क्या कहे हम ये तो है,

बस किस्मत का खेल।


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