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Ragini Uplopwar Uplopwar

Abstract

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Ragini Uplopwar Uplopwar

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यादों की किताब

यादों की किताब

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मेरी यादों की किताब,

अक्सर मुझसे बातें करती है।

हर उम्र का एक पृष्ठ,

चेहरा बन उभरता है।

दोस्त से लेकर हमसफर की

अक्सर याद दिलाती है।


आहिस्ता से पलटिये,

मेरी जान है ये।

सपने नहीं मेरे,

अरमान है ये।

गुजरे हुये कल की,

अक्सर याद दिलाती है।


मां की सीख,

पिता की चाहत,

परिवार से की थी,

जो बगावत।

जीतकर भी हारने का,

अक्सर दुख दे जाती है।


हसरतें कितनी थी,

कितनी पूरी हुई।

कितनी की मेहनत,

कहां चूक हुई।

मेरा इतिहास मुझे,

अक्सर याद दिलाती है।


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