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Bal Krishna Mishra

Classics

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Bal Krishna Mishra

Classics

|| यादों का ज़हर ||

|| यादों का ज़हर ||

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वफ़ा की दुनिया में… मिला बस यही इनाम,

आँखों में आँसू… और होठों पर तेरा नाम।


मौत आएगी मुझे इक सुकून बनकर,

मिट जाएँगे सब शिकवे खाक में मिलकर।


पर तुम्हें तो कतरा-कतरा, पल-पल मरना होगा,

जिंदा रहकर ही यादों का ज़हर पीना होगा।


वफ़ा की दुनिया में… मिला बस यही इनाम,

आँखों में आँसू… और होठों पर तेरा नाम।


न कोई मज़ार होगी मेरी, न कोई निशान होगा,

मिटा दूँगा खुद को ऐसा, कि बस धुआँ-धुआँ होगा।


जहाँ कभी हम मिले थे, वो हरसूँ वीरान होगा,

बस मेरी तन्हाइयों का ही एक जहान होगा।


वफ़ा की दुनिया में… मिला बस यही इनाम,

आँखों में आँसू… और होठों पर तेरा नाम।



हम तो आज़ाद हो जाएँगे राख होकर हवाओं में,

खो जाएँगे खामोशी में, टूटे से ख़्वाबों में।


पर तुम उम्र भर कैद रहोगे यादों के खौफ में,

हर सांस सज़ा बनेगी, टूटे हर एक ख्वाब में।


वही यादें… जो तुम्हें सोने न देंगी,

वही यादें… जो तुम्हें रोने न देंगी।


मेरी खामोशी तुमसे हर रोज़ सवाल करेगी,

मेरी गैरमौजूदगी भी तुमसे बात करेगी।


वफ़ा की दुनिया में… मिला बस यही इनाम,

आँखों में आँसू… और होठों पर तेरा नाम।


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✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा

🏠 स्थान -- नई दिल्ली

📧 ई-मेल -- bk10mishra@gmail.com

📲 : 8700462852


          Bal Krishna Mishra 🙏



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