हां तुम !
हां तुम !
हां तुम !
मैंने चाहा है तुमको
मेरी चाहतों में तुम I
गुजरे कल में तुम
उगते सूरज में तुम I
बहती हवाओं में तुम
बरसते बादलों में तुम I
खिलते फूलों में तुम
ढलती शामों में तुम I
हां तुम !
मन की सुंदरता
तन का सुंदर रूप I
लब तेरे मधुशाला
हर अंग पुष्प की माला I
स्वप्न की परी तुम
हो यौवन रस का अमृत प्याला I
हां तुम !
तुम जीवन ज्योति
तुम करुणा तुम भक्ति
तुम ही मेरा बंधन I
मेरा इश्क तुम
मेरी जान तुम
मेरा हर लम्हा तुमसे
तुम ही मेरा दर्पण I
हां तुम !
बेचैन दिल तन्हा मन
तस्वीर तेरी चूमते नयन I
मिलकर तुमसे लिपटूंँ मैं ऐसे
जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I
मेरा ख्वाब मेरी हकीकत
मेरी चाहत मेरा जूनू
हां तुम !
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✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा
🏠 स्थान -- नई दिल्ली
📧 ई-मेल -- bk10mishra@gmail.com
📲 : 8700462852
Bal Krishna Mishra 🙏

