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Bal Krishna Mishra

Classics

4  

Bal Krishna Mishra

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" छोड़ के न जाना माँ तुम मुझे "

" छोड़ के न जाना माँ तुम मुझे "

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                      माँ

जिसके रक्त से जीवन का सृजन है 

जिनके श्रम से मिला जीवन को दर्शन ||


जिसकी भक्ति से मिली हमें शक्ति है 

जिसके आशीष से बनती  हमारी हस्ती ||


जिसने हमारी गलतियों पर हमें संभाला है 

जो उपलब्धियां मिली तो हमें सराहा ||


जिसके चरणों में पाया हमने स्वर्ग है 

जिसके होने से हमें गर्व है ||


जो भूल जाती है आज भी मेरी शिकायत 

जिसके होने से है  हमारी अहमियत ||


जिसने माना मेरी झूठ को हमेशा सच

जिसकी आंचल रही सदा रक्षा कवच ||


जो सुख मिलता है  माँ मुझे तेरे सजदे में।

नहीं वो मंदिर मस्जिद गिरजा या गुरुद्वारे में ||


भूल कर भी न भूल पाऊं मैं कभी तुझे 

बस छोड़ के न जाना माँ  तुम मुझे ll

              

                         ~ बाल कृष्ण मिश्रा |

                        मोबाइल : 8700462852


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