वर्षा की पहली बूंदें
वर्षा की पहली बूंदें
वर्षा की पहली बूंदों पर
जीवन के बिखरे रंगों पर,
कुछ तुम लिखो, कुछ मैं लिखूँ
कुछ तुम देखो, कुछ मैं देखूँ।
स्वागत में धरती खड़ी हुई
चुनर भी हरी-भरी हुई।
भागम-भाग मची सब ओर
नन्ही बूंदों का मचा शोर।
छम-छम-छम-छम छमके पायल
बूंदें करती वसुधा को घायल।
कुछ तुम लिखो, कुछ मैं लिखूँ
कुछ तुम देखो, कुछ मैं देखूँ।
पहली बूंदों का अहसास
भूखे-प्यासे को देता आस।
कृषक की आंखों में चमक
भरती घर-भर में धनक।
खुशियां देती हरेक मन को
नर-नारी और बचपन को।
कुछ तुम लिखो, कुछ मैं लिखूँ
कुछ तुम देखो, कुछ मैं देखूँ।
टिप-टिप-टिप-टिप टपकी बूंदें
खेत-खलिहान पल-पल गूंजे।
तडाग, पोखर, नदी नीर भरे
कमल-कमलनि मिले गले।
नन्हें पौधों पर नन्हीं बूंदें
खेल-खेल में उछले कूदें।
कुछ तुम लिखो, कुछ मैं लिखूँ
कुछ तुम देखो, कुछ मैं देखूँ।
वर्षा की पहली बूंदों पर
जीवन के बिखरे रंगों पर,
कुछ तुम लिखो, कुछ मैं लिखूँ
कुछ तुम देखो, कुछ मैं देखूँ।
