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Anita Sharma

Inspirational

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Anita Sharma

Inspirational

वक़्त

वक़्त

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वक़्त...हाँ वक़्त!

चल रहा है नहीं भाग रहा है…!

एक जादूगरी है वक्त,

इसके जादू से हर कोई,

शायद बेवक्त जागा रहा है…!


अजब सी बात है ना कि

वक्त का मारा है…इंसान

जो वक्त की रफ्तार से,

बस कुछ वक्त मांग रहा है…!


तो समझना है ज़रूरी

कि कुछ बातें नहीं…"जिंदगी'

वक़्त की पाबंद होती है;

हाथ आना या हाथ से जाना

बस अपने हाथ है!

वरना शेष रह जाता है..वक़्त

बातों-बातों में..

शुभचिंतन में...चेतावनी में…


देखो अभी भी…(वक़्त है)

इतना ही…(वक़्त था...)

कितना…(वक़्त बाकी है!)

कितनी जल्दी…(वक़्त बीत रहा)

कहा था ना…(वक़्त निकल जाएगा)

आखिर…(वक़्त निकल गया…!)


इसलिए ...बस सुनना है गौर से

घडी की टिकटिक को

टिक/टिक/टिक/टिक

टिक/टिक/टिक/टिक…


क्योंकि...वक़्त

एक वक़्त तक...वक़्त देता है…

फिर क्यों ना,वक़्त रहते…

वक़्त काम महत्व समझा जाए!

चिंता नहीं...चिंतन जरूरी।



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