वो पहाड़ी
वो पहाड़ी
प्रेम रंगों की पाली,
जैकब वन रुइसडेल की कहानी।
हवा का खेल था उस दिन,
प्राकृतिक सौंदर्य की ज्वाला जागी।
विज्क बाइ दूर्स्टेडे के पहाड़ी पर,
खड़ी थी पवन की उड़ान,
हरा-भरा प्रकृति का आलम,
रंगों में सजी थी वह भूमि महान।
जैकब ने चित्रित की थी उसकी छवि,
दुतगामी रंगों के संग जो उमड़ी थी,
एक जलते हुए तारों की तरह,
उसने भी रूषडेल की तैयारी की थी।
प्रकृति की लीला ने बना दिया था तामस,
उड़ती थी हवा उस पहाड़ी से हर बार।
हर तरफ था हंसता हुआ सृष्टि का रंग,
उठा कर ले गयी थी सबको वह धरती पार।
एक तारा चमका जैसे कोई ज्योति दिखी,
हर कोने में चमका रहा था वह नजारा,
विज्क बाइ दूर्स्टेडे की वो पहाड़ी,
ले गई थी उस रंगीन चित्र को और आगे।
देखकर उस विमल वायुचक्र को,
दिल ने महसूस किया था नया आनंद।
दुर्गंधित वातावरण के बीच उसकी दौड़ ने,
भर दिया था जीवन को सराहनाओं से।।
