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Dhirendra Panchal

Inspirational Children


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Dhirendra Panchal

Inspirational Children


वो पापा हैं

वो पापा हैं

1 min 244 1 min 244

मस्तक जिसका हिमगिरि जैसा ,

आँखे झील हजार।

अधरों पर समरसता विहँसे ,

शब्द-शब्द झंकार।

मैं जीतूं वह बने सिकन्दर , वो पापा हैं।

मेरे चुल्लू में जो भरे समंदर, वो पापा हैं।


फटी एड़ियों में अपने ,

हर राज छुपाते हैं।

हम विचलित ना हो जाएं ,

हंसकर बतियाते हैं।

रखते मुझको दिल के अंदर , वो पापा हैं।

मेरे चुल्लू में जो भरे समंदर, वो पापा हैं।


आशाओं से आकर मेरे ,

हाथ मिलाते हैं ।

इच्छाओं को झट से मेरे ,

गले लगाते हैं ।

मेरे बटुए में जो भरे मुक़द्दर , वो पापा हैं ।

मेरे चुल्लू में जो भरे समंदर , वो पापा हैं ।




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