वो नारी है
वो नारी है
जो जीवन को जन्म देकर भी हारी है
खुद को खोकर भी
ढूंढती है जो सबमें खुशी अपनी
पर अक्सर सबके साथ भी अकेले रह जाती है
सबका ख्याल रखती है
पर खुद को भूल जाती है
अक्सर कुछ घर में वो
होकर भी नहीं हुआ करती है
दिल टूटने पर भी
जिसके होंठों पर मुस्कान है
सबकी सुनने में अक्सर
अपने अन्तर्मन की आवाज को दबा जाती है
वो नारी है।
