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Hardik Mahajan Hardik

Abstract

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Hardik Mahajan Hardik

Abstract

वो जमाना नहीं अब रहा

वो जमाना नहीं अब रहा

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ज़माना वो नहीं अब रहा

दुनिया में कोई किसी


का हो भरोसा अब कभी

यह बात रख लो याद न


करो भरोसा किसी पर 

किसी से किसी का बस


अब आज़माना छोड़ दो

उन्हें अपने इस ज़माने में।


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