वो बचपन की गलियाँ .....
वो बचपन की गलियाँ .....
किसी सोनपरी के स्वर्ग सी गलियाँ,
मखमल के मुलायम सी एहसास दिलाती सखियाँ,
विद्या की नगरी मे भटकाती मासूम अठखेलियाँ,
कक्षा की हमें तलाशती शरारते,
ऐसी थी बचपन की गालियाँ.....
तब किसे पता था जीवन के रंग अजीब,
तब कब हमने जाना कौन बिछड़े कौन करीब,
बस कागज के जहाज संग सपने उड़ाते थे,
बस संगी साथी की मस्ती मे अपनी बस्ती थी,
ऐसी थी बचपन की गलियाँ.....
