Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Azhar Shahid

Abstract

2  

Azhar Shahid

Abstract

वक्त

वक्त

1 min
331


एक मुद्दत से जो करके बैठे है गिला वक्त से

बेशक़ ना-मंज़ूर है हमे जो भी मिला वक्त से।


हमें तोहफे की शक्ल में सिर्फ इम्तहान मिले हैं

एक तरफा जो चलता रहा है सिलसिला वक्त से।


अच्छा तुमने हमेशा अमीरों के तलवे क्यों चाटे हैं

पूछ लूँ जो ये सवाल तो जाए तिलमिला वक्त से।


शान-ओ-गुमान वालों के हिस्से भी मौत आई

क्या अब भी चाहिए तुम्हें कोई फैसला वक्त से। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract