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Azhar Shahid

Abstract

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Azhar Shahid

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मोहब्बत और मज़हब

मोहब्बत और मज़हब

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ना-समझ इश्क़ में यूहीं दिल वार गए थे 

इसलिए भी हमारे फैसले बेकार गए थे 


हम मोहब्बत वालों की लड़ाई मज़हब से थी 

हम लड़ भी नहीं सके थे और हार गए थे।


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